पैसों की खातिर ओडिशा के अस्पताल में 5 दिनों तक बंधक रही आदिवासी प्रसूता गरियाबंद जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप के दखल के बाद सुरक्षित घर लौटे जच्चा बच्चा
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- मामला गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड ग्राम मुचबहाल मालीपारा का है
गरियाबंद । भुजिया जनजाति की 23 वर्षीय गर्भवती महिला ओडिसा के एक अस्पताल में 6 दिनों तक बनी रही बंधक, नॉर्मल डीलवरी के एवज में मांगी गई 20 हजार में से 15 हजार चुकाने बेवा सास पैसे जुगाड़ करती रही। स्थानीय उपस्वास्थ्य केंद्र में गर्भवती का पंजीयन तक नहीं। जिला पंचायत गरियाबंद अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप ने दखल देकर प्रसूता को सकुशल घर पहुंचवाया।
मामला गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर के ग्राम मुचबहल के मालिपारा वार्ड में रहने वाली भुजिया जनजाति की 23 साल की नवीना चींदा कालाहांडी के धर्मगढ़ ओड़िशा के एक निजी अस्पताल में पांच दिनों तक अघोषित रूप से बंधक बना कर रखी गई थी,प्रसूता की सास दोषो बाई ने बताया कि 18 तारीख को प्रसव पीड़ा के बाद उसे ओड़िसा धर्मगढ़ स्थित मा भंडारणी क्लिनिक में भर्ती कराया। उसी दिन ही सामान्य प्रसव में पोती ने जन्म दिया। भर्ती से पहले 5 हजार जमा किया गया था। प्रसव के बाद 15 हजार रुपए और मांगे गए।पैसे पूरे देने के बाद ही बहू, 3 साल का पोता और नवजात को लाना संभव था। इसलिए पैसे की जुगाड़ में 21 जनवरी को गांव वापस आ गई। सास ने बताया कि बेटा पोड़ा आंध्रप्रदेश के ईंट भट्ठे में मजदूरी करता है। उसको भी फोन लगाया पर उसके सेठ भी नहीं दे रहे थे 6 माह के गर्भ के दरम्यान बेटे के साथ रही बहु घर वापस आ गई थी।
पहला गर्भ ऑपरेशन से हुआ था, इसलिए डर गई सास ने कहा कि पहला गर्भ तीन साल पहले धर्मगढ़ के इसी अस्पताल में हुआ था। ऑपरेशन करना पड़ा था,तब सोना चांदी बेच कर 85हजार दिया था।इस बार प्रसव पीड़ा के बाद स्थानीय अस्पताल को मैंने संपर्क नहीं किया, क्योंकि पिछली बार वे इंकार कर दिए थे। बहु के आंध्रप्रदेश से आने के बाद एक दो बार मितानिन आए,लेकिन कोई कार्ड तक नहीं दिया । सरकारी हिसाब से कोई देख रेख नहीं हो रहा था इसलिए बॉलरों किराया कर ओडिसा ले गई। दोबारा आपरेशन न कराने पड़े, इसलिए हमने उन्हें उनकी मुंह मांगी कीमत देने के लिए तैयार थे पर इतना ज्यादा मांग रखा गया था जिसका बंदोबस्त हमारे पास 6 वे दिन तक भी नहीं हो पाया था आज जिला पंचायत गरियाबंद अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप के मदद से जच्चा बच्चा सकुशल घर पहुंच गए हैं।
सरकारी योजना से वंचित है भुजिया परिवार – 2000 की आबादी वाले गांव में पोशो चिदा का परिवार अकेला विशेष पिछड़ी जनजाति भूंजिया है।गांव के बीच बीच टूटे हुए मकान में सास बहु रहते हैं।रोजगार का अभाव था इसलिए बेटा आंध्र काम करने जाता है।गांव कलस्टर में शामिल नहीं इसलिए विशेष पिछड़े जनजाति योजना का लाभ इस परिवार को नहीं मिल रहा।पीएम आवास के तहत आवास मिला है पर बना नहीं पा रहे हैं। बूढ़ी सास मजदूरी कर किसी तरह गुजारा कर रही। परिवार के लिए मजदूरी ही अंतिम विकल्प था।
- सूचना मिलते ही मदद के लिए प्रतिनिधि भेजा जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप ने
जिला पंचायत गरियाबंद अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप ने बताया कि लाचार सास पैसे की तलाश दो दिन से कर रही थी।कारण सुनते ही हैरानी हुई। लेकिन पहले अस्पताल में मौजूद जच्चा बच्चा को सकुशल वापस लाना था।अस्पताल में प्रतिनिधि के तौर पर मैने दो बड़े भाइयों को भेजा था। देवभोग के वरिष्ठ पत्रकार जयविलास शर्मा और पुरुषोत्तम पात्र पहुंचे थे। देवभोग बीएमओ प्रकाश साहू ने मौके के लिए एंबुलेंस भेजा। मसला समझने के बाद उसे सकुशल वापस लेकर आए, ऐसी परस्थिति क्यों निर्मित हो रही है,सरकारी योजना का लाभ भुजिया जनजाति के महिला तक क्यों नहीं पहुंचा, लापरवाही किसकी थी। इस संबंध में जांच के लिए सीएमएचओ को निर्देशित किया जाएगा।मौके पर गए जय विलास शर्मा ने बताया कि पहुंचने के बाद प्रबंधन ने 2 घंटे इंतजार कराया।फिर अस्पताल में मौजूद कालाहांडी जिला पंचायत सदस्य गोपीनाथ महानंद ने मदद किया।बचत 15 हजार के बजाए स्वेच्छा से बिल भरने कहा गया।गौरी शंकर कश्यप के माध्यम से 5 हजार दिया गया,जिसके बाद एंबुलेंस के जरिए जच्चा बच्चा को उसके गांव सकुशल छोड़ा गया।
मामले में अस्पताल संचालक चैतन्य मेहेर ने सफाई देते हुए कहा कि उसे किसी भी प्रकार से किसी पैसे की मांग नहीं किया।उनके द्वारा हमें दिक्कतों की कोई जानकारी नहीं दी गई थी।जब तक रही स्टाफ ने उनका पूरा ख्याल रखा है। अगर वे रूपये की दिक्कत बताते तो उन्हें पहले ही जाने दे दिए होते पर उन्होंने अंतिम समय तक कुछ भी नहीं बताया।
जच्चा बच्चा कार्ड नहीं था – मितानिन गांव में उस वार्ड की मितानीन पार्वती ध्रुव ने बताया कि,6 वा माह के गर्भ में वो गांव आई, 7 वे माह में उसकी जांच किया गया। जरूरी दवाएं और पौष्टिक आहार दिया गया था।पंजीयन कार्ड खत्म हो गया था, इसलिए उसका जच्चा बच्चा कार्ड नहीं बनाया जा सका।पहले प्रसव सिजेरियन था, इसलिए दूसरे में भी वो उसी अस्पताल चल दी। किसी को इसकी जानकारी नहीं दिया।
पता नहीं है, पता करवाता हूं- मैनपुर बीएमओ गजेन्द्र ध्रुव ने कहा कि ये सब आपसे जानकारी मिल रही है। मुझे पता नहीं था। पता करवाता हूं और स्थिति की जानकारी लेता हूं।
