Recent Posts

January 23, 2026

समाचार पत्र और मीडिया है लोकतंत्र के प्राण, इसके बिन हो जाता है देश निष्प्राण।

बांस बर्तन के बाद अब विशेष पिछड़ी कमार जनजाति के ग्रामीण बांस के आभूषण बनाकर आर्थिक रूप से होंगे सशक्त

  • शेख हसन खान, गरियाबंद 
  • कुल्हाड़ीघाट ग्राम पंचायत में वन विभाग द्वारा दिया जा रहा प्रशिक्षण आसाम से पहुंची नीरा सरमा

गरियाबंद। गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखंड मैनपुर क्षेत्र मे विशेष पिछड़ी कमार जनजाति के लोग बड़ी संख्या मे निवास करते हैं। आजादी के 79 वर्षो बाद भी यह जनजाति के लोगो का बांस बर्तन जीविका का मुख्य साधन है। उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के उपनिदेशक वरूण जैन के विशेष प्रयास से कमार जनजाति के लोगों के जीवन स्तर में आर्थिक रूप से सुधार लाने के लिए अब उन्हे बांस के जेवरात आभूषण बनाने की भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिससे वे आर्थिक रूप से सक्षम होंगे।

तहसील मुख्यालय मैनपुर से महज 20 किमी दूर ग्राम पंचायत कुल्हाडीघाट के आश्रित ग्राम कठवा में पांच ग्रामों के कमार जनजाति के महिला पुरूषो को बांस से आभूषण बनाने का प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित किया गया है। इन्हे प्रशिक्षण देने के लिए बकायदा आसाम से श्रीमती नीरा सरमा, जिन्हें लोग प्यार से बैम्बू लेडी ऑफ इंडिया के नाम से जानते हैं। वे स्वयं पहुंची है और कमार जनजाति के लोगों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है साथ ही बांस रोपण के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

  • उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के उपनिदेशक ने बताया

उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के उपनिदेशक वरूण जैन ने बताया कि विश्व बांस दिवस के अवसर पर 1200 बांस के पौधो का रोपण किया गया है। साथ ही बांस हस्तकला को बढावा देने के लिए विशेष पिछड़ी कमार जनजाति को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसमें श्रीमती नीरा सरमा बैम्बू लेडी ऑफ इंडिया द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कमार जनजाति के लोगो मे बांस के जेवर आभूषण बनाने के प्रति काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।