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April 2, 2026

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गरियाबंद जिले में नक्सलवाद का अंत का दावा, अब नये सवेरा की ओर जिंदगी 

  • मैनपुर के जंगल में हार्डकोर माओवादी जयराम उर्फ चलपति सहित 31 नक्सली मारे गए
  • याद रहेगी – एडिशनल एसपी राजेश पवार सहित 11 जवानो की शहादत
  • लाल आतंक के खौफ के चलते दो दशक आदिवासी क्षेत्र विकास में पिछड़ गया, नक्सलवाद खत्म होने के बाद अब विकास की संभावना
  • शेख हसन खान, गरियाबंद 

गरियाबंद । गरियाबंद के घने जंगलों में कभी बारूद की गंध घुली रहती थी. करीब 19 सालों तक एक पूरी पीढ़ी ने नक्सलियों के लाल आतंक का दंश झेला. लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है. कभी दहशत का पर्याय रहा यह इलाका आज शांति और विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है. गरियाबंद अब सिर्फ एक जिला नहीं, बल्कि नक्सलवाद की कब्रगाह के रूप में अपनी नई पहचान बना चुका है.

  • 2025 जब सुरक्षा बलों ने तोड़ा नक्सलियों का घमंड

यह जीत अचानक नहीं मिली. जनवरी 2025 में कुल्हाड़ीघाट के घने कोहरे के बीच सुरक्षा बलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 नक्सलियों को ढेर कर दिया. इस ऑपरेशन में एक करोड़ का इनामी जयराम उर्फ चलपती भी मारा गया इसके बाद सितंबर में मटाल की पहाड़ियों में एक और बड़ी सफलता मिली, जहां 10 नक्सलियों के साथ सीसी मेंबर बालकृष्ण उर्फ मनोज भी मारा गया. गरियाबंद प्रदेश का इकलौता जिला बन गया जहां एक ही साल में दो बड़े नक्सली कमांडर खत्म किए गए।

कभी नक्सलियों की दहशत से कांपने वाला गरियाबंद जिला अब नक्सली आतंक से पूरी तरह मुक्त हो चुका है लगातार सुरक्षा अभियानों, जिला पुलिस की रणनीतिक कार्रवाई और स्थानीय सहयोग के चलते नक्सलियों का प्रभाव लगभग समाप्त हो चुका है। जिन इलाकों में कभी बंदूक की आवाज गूंजती थी, वहां अब बच्चों की पढ़ाई और लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां सामान्य रूप से चल रही हैं। इस बदलाव के पीछे हमारे सुरक्षा बलों की मेहनत और जवानों का बलिदान सबसे बड़ी वजह है। साथ ही, कई भटके हुए लोगों का मुख्यधारा में लौटना भी इस परिवर्तन का अहम हिस्सा बना है। जिले के मैनपुर के दुर्गम कुल्हाड़ीघाट, बेसराझर पहाड़ी मे हार्डकोर नक्सली नेता जयराम उर्फ चलपति, सीसी मनोज उर्फ मोडेम बालकृष्णन, एससीएस प्रमोद उर्फ पांडु तथा विमल उर्फ सुरेश सहित 31 नक्सलियो को मार गिराने मे पुलिस के जवानो ने बड़ी सफलता प्राप्त की है। पुलिस सूत्रो के अनुसार जनवरी 2024 से लेकर अब तक सुरक्षा बलो ने नक्सल संगठन को अंदर तक हिला देने वाली बड़ी कार्यवाही की एवं गरियाबंद अब सिर्फ एक जिला नही बल्कि नक्सलवाद की कब्रगाह के रूप मे अपनी पहचान बना चुका है। नक्सलवाद समाप्ति के साथ ही अब गरियाबंद जिला खासकर इस पिछले आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर शांति, विकास और नये विश्वास की पहचान बनायेगी।

  • एक नजर 

सन् 2006 मे मैनपुर के बिहड़ रास्तो से जिले मे प्रवेश किये नक्सली

मिली जानकारी के अनुसार गरियाबंद जिले मे नक्सलियो ने वर्ष 2007 मे अपनी दस्तक दिया था और मैनपुर विकासखण्ड के दूरस्थ वनांचल राजापड़ाव गौरगांव क्षेत्र के ग्राम खरता मे तेंदूपत्ता की बोरियो को आग के हवाले कर अपनी उपस्थित दर्ज कराई थी इसके कुछ दिनो बाद नक्सलियो ने तत्कालीन भाजपा विधायक डमरूधर पुजारी के निवास पर हमला कर वहां से हथियार लूट लिया था और दोपहर 3 बजे के आसपास देवभोग से राजधानी रायपुर की ओर आने वाली यात्री बस को नक्सलियो ने राजापड़ाव के आगे नेशनल हाइवे पर रोककर पर्चा और बैनर लगाकर बंद का आह्वान किया था उस समय नक्सली डर से मैनपुर देवभोग क्षेत्र के 300 से ज्यादा गांव के ग्रामीण अपने घरो से निकले नही नक्सलियो ने जिले मे सबसे ज्यादा मैनपुर विकासखण्ड क्षेत्र मे अपने कायराना हरकतो को अंजाम दिया जिसमे मैनपुर से महज 01 किमी दूर वन विभाग के तेंदूपत्ता गोदाम मे शाम 5 बजे पहुंचकर 9 करोड़ से ज्यादा के तेंदूपत्ता को आग के हवाले कर दिया आज भी गोदाम जले और तहस नहस स्थिति मे नक्सली आगजनी की याद दिला रही है। मैनपुर कुल्हाड़ीघाट मार्ग मे सड़क निर्माण कार्य मे लगे जेसीबी मशीन एवं अन्य मशीनो को आग के हवाले कर दिया और तो और पयलीखण्ड हीरा खदान पुलिस चौकी के साथ उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व वनभैंसा संरक्षण संवर्धन केन्द्र को भी आग के हवाले कर दिया था नक्सलियो ने मैनपुर के भुतबेड़ा वन विभाग चैकी, गोबरा चैकी के साथ दर्जनो स्थानो पर आगजनी किया था और तो और सुरक्षा बलो को नुकसान पहुंचाने समय -समय पर अपने कायराना हरकत को अंजाम देते हुए विस्फोटक सामाग्रियो से क्षेत्र मे अशांति फैलाते रहे।

  • एडिशनल एसपी राजेश पवार सहित 11 जवानों की शहादत हमेशा याद रहेगी

साल 2011 की वह काली तारीख आज भी लोगों की स्मृतियों में सिहरन पैदा कर देती है। जिले से ओडिशा के सोनाबेड़ा के जंगलों में नक्सली विरोधी गश्त पर गए पुलिस बल पर नक्सलियों ने घात लगाकर एम्बुश हमला किया था। इस लैंडमाइन विस्फोट में 9 जवान शहीद हो गए थे जिनमें अपर पुलिस अधीक्षक राजेश पवार भी शामिल थे 9 वीरों की शहादत ने पूरे इलाके को शोक और भय में डुबो दिया था। उसी वर्ष जुगाड़ थाना क्षेत्र में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल के काफिले पर हुआ कायराना हमला न सिर्फ राजनीतिक व्यवस्था, बल्कि आम जनजीवन की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल बनकर उभरा, जिसमें 7 निर्दोष लोगों की जान चली गई और पिछले विधानसभा चुनाव के समय भी गोबरा क्षेत्र मे सुरक्षा बल के एक जवान नक्सली विस्फोट मे शहीद हो गये।

  • पुलिस बल ने दृढ़ता से अभियान चलाया नक्सलियों का जड़ के साथ खात्मा

गरियाबंद जिले मे पिछले 2024 से जिला पुलिस बल, ई 30, एसटीएफ, सीआरपीएफ और कोबरा के साथ पुलिस सुरक्षा बलों ने जिस दृढ़ता से अभियान चलाया, उसने नक्सलियों की जड़ों को हिला दिया। 2025 की कार्रवाइयों ने यह साफ कर दिया कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो सबसे कठिन लड़ाई भी जीती जा सकती है। लेकिन इस जीत की असली कीमत उन 11 जवानों ने चुकाई है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी। यह शांति उनके बलिदान की देन है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।

  • मैनपुर क्षेत्र के लगभग 90 प्रतिशत ग्राम नक्सल प्रभावित होने के चलते विकास से पिछड़ गया

पिछले 19 वर्षो मे नक्सलियो के दहशत और गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखण्ड क्षेत्र के 90 प्रतिशत से अधिक ग्राम नक्सल प्रभावित होने के कारण यह क्षेत्र विकास कार्यो से महरूम हो गया और विकास के क्रम पिछड़ता चला गया संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधि सांसद विधायक एवं आला अफसर भी चाहकर ग्रामीण क्षेत्रो के दौरे मे नही पहुंच पाते थे और ग्रामीणो की समस्याओ का समाधान नही हो पा रहा था अब गरियाबंद जिला नक्सल मुक्त होने से एक नये सवेरा लेकर आया है अब जिले के इस आदिवासी क्षेत्र के लोगो को विकास को लेकर एक नई आस जगी है।

आज गरियाबंद में स्कूल खुल रहे हैं, सड़कें बन रही हैं और लोग सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं। लेकिन यह शुरुआत है, मंजिल नहीं। जरूरत इस बात की है कि शासन केवल ऑपरेशन तक सीमित न रहे, बल्कि विश्वास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के जरिए लोगों के दिलों तक पहुंचे। जिले की यह सफलता देश के लिए एक मिसाल जरूर है, लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी है कि शांति बनाए रखने के लिए लगातार सजग रहना होगा। क्योंकि इतिहास गवाह है जहां विकास रुकता है, वहां असंतोष फिर जन्म लेता है।