गरियाबंद में भगवान श्रीराम के ब्रह्मास्त्र से धू-धू कर जला अधर्म का प्रतीक रावण, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा गांधी मैदान
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- राम-रावण के नाटकीय युद्ध के बाद 20 फीट ऊंचे पुतले का दहन, रावणभाठा और गांधी मैदान में उमड़ा जनसैलाब
गरियाबंद। बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में विजय सत्य और धर्म की ही होती है। विजयादशमी पर इसी शाश्वत संदेश का साक्षी बना गरियाबंद। मंगलवार को जिला मुख्यालय में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की विजय के प्रतीक दशहरा पर्व पर रावण दहन के दो आयोजन हुए। रावणभाठा में नगर पालिका प्रशासन और गांधी मैदान में दशहरा उत्सव समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। श्रीराम-रावण युद्ध के नाटकीय मंचन से लेकर पुतलों के दहन तक पूरे आयोजन में धर्म की अधर्म पर विजय का संदेश दिखाई दिया। रावण दहन के बाद लोगों ने एक-दूसरे को दशहरा की शुभकामनाएं दीं और भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

- देवी-देवताओं की पूजा के बाद रावणभाठा में दहन
दशहरा पर्व को लेकर शहर में सुबह से ही उत्साह का माहौल रहा। शाम होते ही रावण दहन देखने के लिए रावणभाठा में लोगों की भीड़ जुटने लगी। यहां अंचल के प्रमुख देवी-देवताओं की पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद श्रीराम और रावण के बीच युद्ध का नाटकीय प्रदर्शन किया गया। धर्म और अधर्म के संघर्ष को दर्शाते इस मंचन के बाद रात 8 बजकर 50 मिनट में रावण दहन हुआ। नगर पालिका अध्यक्ष रिखीराम यादव ने सभी जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में रावण का पुतले का दहन किया। इसके बाद नगर पालिका अध्यक्ष रिखीराम यादव और उपाध्यक्ष आसिफ मेमन ने नगरवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं।
- गांधी मैदान में ब्रह्मास्त्र के प्रतीकात्मक दृश्य के साथ जला रावण
रावणभाठा में कार्यक्रम के बाद लोगों का रुख गांधी मैदान की ओर हुआ। यहां दशहरा उत्सव समिति की ओर से रात 9 बजे के बाद 20 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। राम-रावण के बीच नाटकीय द्वंद्व के बाद भगवान श्रीराम के ब्रह्मास्त्र चलाने के प्रतीकात्मक दृश्य के साथ रावण का पुतला धू-धू कर जल उठा। पुतले के आग की लपटों में घिरते ही गांधी मैदान जय-जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद शानदार आतिशबाजी ने आयोजन को और आकर्षक बना दिया। मैदान में मौजूद लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक इस क्षण को उत्साह के साथ देखा। पर्व ने लोगों को यह संदेश दिया कि अहंकार, अन्याय और अधर्म का अंत निश्चित है, जबकि सत्य और मर्यादा का मार्ग सदैव विजय की ओर ले जाता है।
आयोजन को सफल बनाने में दशहरा उत्सव समिति के सदस्यों ने सभी का धन्यवाद व्यापित किया। रावण दहन के दोनों आयोजनों के दौरान शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन शाम से ही अलर्ट रहा। बड़ी संख्या में पुलिस जवान तैनात रहे। पुलिस की मुस्तैदी के चलते दोनों स्थानों पर आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए।
