रोजगार के अभाव में गरियाबंद जिले के अमली से ग्रामीणों का पलायन आंध्र की ओर कूच, गांव हुआ खाली, घरों में जड़ दिए ताले
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- विशेष पिछड़ी कमार भुंजिया जनजाति के ग्रामीणों ने किया पलायन, मचा हड़कंप
- स्थानीय अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा कि गांव में पर्याप्त रोजगार के साधन उपलब्ध, ग्रामीण कर रहे आदतन पलायन
- एक दर्जन से ज्यादा ग्रामीणों का प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत, निर्माण कार्य की राशि निकाल कर गये पलायन
गरियाबंद । गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर क्षेत्र के दुरस्थ वनांचल मे बसे अमली एवं ताराझर जैसे ग्रामो से फिर एक बार ग्रामीणो द्वारा रोजगार के अभाव मे पलायन कर कामकाज की तलाश मे आंध्रप्रदेश तेलंगाना चले जाने और गांव में सन्नाटा पसरने के साथ ही घरों में ताला लटके होने की जानकारी लगते ही स्थानीय प्रशासन स्तर में हड़कंप देखने को मिल रहा है। एक तरफ राज्य सरकार द्वारा पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है तो दूसरी ओर ग्रामीणों के द्वारा अपने छोटे -छोटे बच्चों को साथ में लेकर पलायन किये जाने की खबर से हड़कंप मच गई है।

तहसील मुख्यालय मैनपुर से 40 किमी दूर ग्राम पंचायत इंदागांव के आश्रित ग्राम अमली जो पहाड़ी के ऊपर बसा हुआ है। इस ग्राम से विशेष पिछड़ी जनजाति आदिवासी कमार भुंजिया जनजाति 15 परिवार के 40 सदस्यों ने अपने घरों मे ताला जड़कर आंध्रप्रदेश एवं तेलंगाना रोजगार की तलाश मे पलायन कर गये हैं। लायन करने वाले ये सभी विशेष पिछड़ी जनजाति के साथ राष्ट्रपति के दस्तक पुत्र भंुजिया कमार जनजाति से है। ग्राम अमली के घरो के सामने ताला लगाकर और कई घरों के दरवाजों को ईट से बंदकर ग्रामीण बाल बच्चों के साथ पलायन किये हैं।
इस संबंध मे ग्रामीणो से चर्चा करने पर बताया कि यहां के ग्रामीण तीन महिने पहले ही पलायन कर गये हैं और जनपद पंचायत द्वारा अभी दो सप्ताह से एक तालाब डबरी निर्माण करवा कर रोजगार देने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि यहां के ग्रामीण लंबे समय से रोजगार की मांग कर रहे थे। ग्रामीणों के सामने जीवन यापन करने के लिए रोजगार का कोई साधन नहीं है जिसके कारण मजबुरन अपने छत्तीसगढ़ प्रदेश को छोड़कर आंध्रप्रदेश पलायन करने मजबुर हो रहे है। इसी तरह ग्राम पंचायत कुल्हाड़ीघाट के आश्रित ग्राम बेसराझर, ताराझर, कुरवापानी, मटाल व अन्य ग्रामो से भी बड़ी संख्या मे ग्रामीण पलायन कर आंध्रप्रदेश जाने की जानकारी आ रही है। ग्राम अमली के ग्रामीण मनसाय नेताम, घनश्याम नेताम, उकियाबति ने बताया कि हमारे इस गांव में पहुंचने के लिए न तो सड़क हैं और न ही बिजली की सुविधा है। ग्रामीणों को राशन चावल दाल लेने के लिए 15 किमी दूर जाना पड़ता है। स्वास्थ्य की कोई सुविधा नहीं है और यहां के ग्रामीण बांस बर्तन बनाकर जीविका उपार्जन करते है जिसके कारण समय पर रोजगार नही मिलने से ग्रामीण पलायन करने मजबूर हुए है। ऐसे में सरकार व प्रशासन के द्वारा गांव में रोजगार मूलक काम चलाने का दावा यहां पर फेल साबित होती दिख रही है। ऐसे में अमली गांव का सुध कब तक प्रशासन लेता है। यह देखना होगा तो वही पलायन कर गए राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों के लिए गांव में क्या रोजगार मूलक काम उपलब्ध करा पाने में प्रशासन कितनी गंभीर नजर आती है।
ग्राम पंचायत के सचिव परमेश्वर शेट्टी ने बताया कि ग्राम अमली में रोजगार गारंटी योजना के तहत डबरी निर्माण कार्य चल रहा है जिसमें ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अमली के ग्रामीण जयलाल, धनसिंग, मनोहर, साधुराम, गजमन, मंगल, उजल, तिलक 9 लोगों का प्रधानमंत्री आवास भी स्वीकृत है और उनके द्वारा राशि आहरण भी किया जा चुका है। इस पूरे मामले से मैनपुर जनपद पंचायत को अवगत कराया जा चुका है।
- क्या कहते हैं सीईओ
जनपद पंचायत मैनपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डीएस नागवंशी ने बताया ग्राम अमली से ग्रामीण पलायन किय है जिसकी जानकारी जिला अधिकारियो को दिया जा चुका है। गांव में रोजगार मूलक कार्य भी चल रहा है। बावजूद इसके हर वर्ष ग्रामीण यहां से पलायन करते हैं।
