सुपर ड्रोन – उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व को देश के सबसे सुरक्षित हाई-टेक फॉरेस्ट कॉरिडोर के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- हाथी एप के पूरे देश में सफलता के बाद फिर एक बार चर्चा में उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व
- उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरूण जैन के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का पहला सुपर हाईतकनीक ड्रोन की नजर
- उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के जंगल में गजराज की प्राइवेसी भंग किए बिना अब आसमान से उनकी धड़कनें नापेगा जादुई सुपर ड्रोन
गरियाबंद। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के बिहड़ पहाड़ी के ऊपर घने जंगल और आमामोरा ओढ़ की उन दुर्गम पहाड़ियों पर, जहाँ इंसान के कदम डगमगा जाते हैं और परिंदा भी पर मारने से पहले सोचता है, वहां अब तकनीक के पंख गूंज रहे हैं। हाथी ऐप के जरिए देशभर के वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के गलियारों में अपनी अलग पहचान बनाने वाले उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जुनून अगर सर चढ़कर बोले तो जंगल की खामोशी भी नई इबारत लिखती है। इस बार नवाचार का चेहरा कोई ऐप नहीं, बल्कि एक ऐसा अत्याधुनिक सुपर ड्रोन है, जो छत्तीसगढ़ की धरती पर पहली बार कदम रख रहा है और जिसे चलाने के लिए उपनिदेशक वरुण जैन खुद जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर बिहड़ के बीच पसीना बहा रहे हैं। यह महज एक मशीन नहीं, बल्कि उन वनकर्मियों की तीसरी आंख है जो रात के सन्नाटे में हाथियों की चिंघाड़ सुनकर अपनी जान जोखिम में डालते हैं। आमामोरा ओढ़ की ऊंची चोटियों से जब वरुण जैन ने इस ड्रोन को हवा में लहराया, तो नीचे तालाब की लहरों के बीच बेखौफ अठखेलियां कर रहे 28 हाथियों के दल को भनक तक नहीं लगी कि कोई उनकी जासूसी कर रहा है। इस ड्रोन की जादुई ताकत इसके थर्मल सेंसर में छिपी है, जो रात के घुप अंधेरे में भी हाथी के शरीर की तपिश को पहचान कर उसकी सटीक लोकेशन स्क्रीन पर उकेर देता है। मानवीय नजरिए से देखें तो यह तकनीक उन मासूम ग्रामीणों के लिए किसी फरिश्ते से कम नहीं है, जिनकी साल भर की मेहनत यानी फसलें हाथियों के पैरों तले कुचल जाती थीं। अब इस आसमानी रक्षक की मदद से फसलों के नुकसान का सटीक आकलन तो होगा ही, साथ ही हाथियों की लंबाई-चैड़ाई और उनके स्वास्थ्य का डेटा भी बिना उन्हें परेशान किए विभाग के पास होगा।

उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन का यह प्रयास वन प्रबंधन के उस पुराने ढर्रे को बदल रहा है जहाँ सूचनाओं के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था। अब घंटों का काम मिनटों में सिमट गया है और विभाग के पास हाथियों की हर हरकत का लाइव अपडेट है। इस दुर्गम सफर पर निकले वरुण जैन ने जब ड्रोन की स्क्रीन पर दो हाथियों का शारीरिक मापदंड दिखाया, तो वह दृश्य आधुनिक भारत के उस डिजिटल जंगल की तस्वीर पेश कर रहा था, जहाँ इंसान और जानवर के बीच का संघर्ष अब समझदारी और तकनीक के मेल से कम होने की उम्मीद जगा रहा है। यह नवाचार न केवल कर्मचारियों का समय बचाएगा, बल्कि टाइगर रिजर्व को देश के सबसे सुरक्षित और हाई-टेक फॉरेस्ट कॉरिडोर के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने चर्चा मे बताया इस ड्रोन की कई सारी खासियत है। इसे तकनीकी सुविधाएं तो मिलेगी ही हमारे कर्मचारियों का समय भी काफी बचेगा और जंगल के साथ साथ वन्य जीवों के बारे में काफी एक्यूरेट जानकारी प्राप्त होगी।
