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February 21, 2026

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गरियाबंद वन मंडल एवं उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के जंगल को आग से बचाने वन विभाग ने कसा कमर, निगरानी तेज

  • शेख हसन खान, गरियाबंद 
  • उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व में थर्मल ड्रोन करेगा आग बुझाने में मदद्

गरियाबंद । गर्मी का सीजन शुरु होते ही जंगलों में आगजनी का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में वन विभाग ने जंगलों को आग से बचाने की कवायद शुरु कर दी है। सड़क किनारे फायर लाईन तैयार करने सहित तमाम इंतजाम इन दिनों जंगली इलाकों में किये जा रहे है। गौरतलब है कि गर्मी का सीजन शुरु होते ही पतझड़ के साथ पेड़ पौधों के सूखने का सिलसिला शुरु हो जाता है। तेज धूप, गर्मी व जमीन पर बिछे सूखे पत्तों के चलते जंगलों में आगजनी का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। हर साल गर्मी सीजन के दौरान जंगलों में आगजनी की सैकड़ों घटनाएं सामने आती है। जिनमें कई भीषण आगजनी की घटनाएं भी होती है। आगजनी की घटनाओं से पेड़ पौधों को तो नुकसान होता ही है। जंगली जानवरों को भी आफत का सामना करते हुए वहां से जान बचाकर दूसरे इलाकों में शरण लेना पड़ता है। यही वजह है कि हर साल गर्मी का सीजन शुरु होने से पहले ही वनविभाग की तैयारियां शुरु हो जाती है। हर साल की तरह इस साल भी वन विभाग और वन प्रबंधन समिति का अमला जंगलों को आग से बचाने की तैयारी में जुट चुका है। गरियाबंद वनमंडल एंव उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व का ज्यादातर भू-भाग घने जंगलों से घिरा हुआ है और लोगों की आवाजाही के लिये जंगलों के बीच से ही छोटे बड़े मार्ग गुजरे हुए है।

आमतौर पर कुछ लोग धूम्रपान करने के बाद जलते हुए बीड़ी या सिगरेट के टुकड़े को लापरवाहीपूर्वक सड़क किनारे जंगलों की ओर फेंक देते है। जिसके बाद छोटी से एक चिंगारी सूखे पत्तों को चपेट में लेकर भीषण आग का रुप ले लेती है। यही वजह है कि जंगलों के भीतर से गुजरे जितने भी सड़क है उनके किनारे फायर लाईन तैयार कर सूखे पत्तों को जलाया जा रहा है। ताकि आग जंगल की ओर आगे न बढ़ सके।

  • महुआ संग्रहण के लिये लगा देते हैं आग

बताया जा रहा है कि सूखे पत्तों के जमीन में बिछ जाने के कारण महुआ के संग्रहण के लिए पत्तों के नीचे दब जाते है। ऐसे में महुआ संग्राहकों को थोड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन अपनी दिक्कतों को दूर करने के लिये कई संग्राहक महुआ पेड़ के नीचे चारो तरफ मौजूद सूखे पत्तों को आग लगा देते हैं। ताकि उन्हें महुआ संग्रहण करने में आसानी हो, लेकिन यहीं आग जंगल के अन्य हिस्सों में फैलते हुए भीषण आगजनी का कारण बन जाता है। इसलिये महुआ संग्राहकों को पेड़ के नीचे आग नहीं लगाने सख्त हिदायत दी जा रही है।

  • गरियाबंद DFO शशिगानंदन जंगल को आग से बचाने कर रहे अपील

गरियाबंद डीएफओ शशिगानंदन एवं एसडीओ मनोज चंद्राकर द्वारा इन दिनों लगातार बैठक लेकर और गांव-गांव पहुंचकर लोगों को जंगल की सुरक्षा और आगजनी की घटना रोकने की अपील कर रहे हैं। गरियाबंद वनमंडल सहित उदंती सीतानदी अभ्यारण्य क्षेत्र में भी आगजनी की घटनाएं हर साल होती है।

  • उदंती सीता नदी के जंगल में आज से बचाव के लिए थर्मल ड्रोन का भी लिया जाएगा सहारा

उदंती सीतानदी डीएफओ वरुण जैन ने बताया अभी तक क्षेत्र के जंगल पुरी तरह सुरक्षित है। वन विभाग का अमला और ग्रामीण सजगता के साथ जंगल की सुरक्षा में लगे हुए हैं साथ ही वन विभाग द्वारा लगातार प्रशिक्षण एंव कार्यशाला आयोजित कर जंगल को आगजनी से रोकने उपाय बताये जा रहे हैं। उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के उपनिदेशक वरूण जैन ने आगे बताया कि कि पिछले साल अभ्यारण क्षेत्र में आगजनी की लगभग 7 सौ घटनाएं सामने आई थी। जिनमें कुछ बड़ी घटनाएं भी शामिल है। आगजनी से जंगली जानवरों को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है।

उन्होंने बताया कि जंगलों को आग से बचाने के लिये थर्मल ड्रोन का सहारा लिया जायेगा। जिसके जरिये 5 से 10 कि.मी. तक जंगल की निगरानी रखने के साथ ही आग भी बुझाया जा सकेगा। लोगों को वन उपज संग्रहण के लिये जंगल में आग नहीं लगाने सख्त हिदायत दी गई है। वहीं कुछ लोगों पर कार्रवाई भी इस साल की गई है। कला जत्था व नुक्कड़ के माध्यम से भी लोगों को जागरुक करने का प्रयास है। जंगलों में फायर लाईन तैयार करने के साथ ही फायर वाचर भी तैनात किये गए है। वहीं जंगलों में सोलर पंप भी लगाये गए है। ताकि जानवरों को पर्याप्त मात्रा में पानी मिल सके।