Recent Posts

February 26, 2026

समाचार पत्र और मीडिया है लोकतंत्र के प्राण, इसके बिन हो जाता है देश निष्प्राण।

दुर्लभ उड़न गिलहरी के बिछड़ चुके बच्चे को मां से मिलाने रात में घंटों इंतजार किया वन विभाग की टीम ने

  • शेख हसन खान, गरियाबंद 
  • रात में बच्चे को लेने पहुंची मां और सुरक्षित जंगल की तरफ लौटी, पूरी घटना कैमरे में कैद
  • रक्षापथरा प्राथमिक स्कूल के प्रधान-पाठक धनसिंह नेगी, सहायक शिक्षक संतोष निषाद की सूझबूझ से रेस्क्यू

गरियाबंद । उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में उड़न गिलहरी के बच्चे जो बिछड़ गया था उसका सफल रेस्क्यू कर उसके मां से मिलाया गया उड़न गिलहरी के बच्चे को मां से मिलाने के लिए रात भर वन विभाग की टीम घने जंगल के अंदर सुरक्षित दूरी बनाकर इंतिजार करता रहा। पूरा घटनाक्रम ट्रैप कैमरे में कैद हो गया। इस दौरान बिलासपुर के वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट अभिजीत शर्मा, रेंजर केजूराम कोरचे, वनरक्षक सुधांशु वर्मा, पेट्रोलिंग श्रमिक सूरज पात्रा, राजेंद्र नागेश ने रेस्क्यू ऑपरेशन किया। रात भर बन विभाग की टीम ने मौके से सुरक्षित दूरी बनाकर माँ के आने का इन्तेजार किया, ट्रैप कैमरा लगाया गया रात 10 बजे उड़न गिलहरी की माँ की आहट हुई और 12 बजे तक बच्चे को लेकर घने जंगलो में चली गयी।

उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के जंगल में उड़न गिलहरी के बच्चे का सफल रेस्क्यू कर उसकी माँ से मिलाया गया. मैनपुर के पत्रकार हसन खान एवं रक्शापथरा प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक धनसिंह नेगी द्वारा दिनांक 25 फरवरी 2026 को सुबह 11ः50 बजे उपनिदेशक कार्यालय को सूचना दी गयी कि गोना जाने वाले मार्ग पर एक सूखा धावड़ा का वृक्ष गिर गया है एवं उस वृक्ष पर एक अज्ञात जानवर (उड़न गिलहरी का बच्चा) अकेला बैठा है एवं चींटियो द्वारा चोटिल किया जा रहा है तत्काल उड़न गिलहरी के बच्चे का रेस्क्यू शुरू किया गया शिक्षको द्वारा बच्चे को स्कूल में छाव में ले जाया गया तौरेंगा (बफर) परिक्षेत्र की टीम मौके पर पहुंची और उड़न गिलहरी के बच्चे को अपनी कस्टडी में लेकर मौके का मुआयना किया. मौके पर सूखे श्रावड़ा वृक्ष में उड़न गिलहरी का घोंसला कोटर पाया गया किन्तु बच्चे की माँ नहीं मिली। वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट अभिजीत शर्मा द्वारा दिए गये सुझाव अनुसार उड़न गिलहरी के बच्चे को पीपल, बड के फल खिलाये एवं पानी पिलाया गया, चूँकि उड़न गिलहरी निशाचर (रात्री में विचरण करने वाले) होते है। इसीलिये शाम होने तक इन्तजार किया गया ताकि रात्रि में यदि माँ आस पास होगी तो बच्चे को लेने की संभावना होगी रेस्क्यू टीम ने शाम होते ही बच्चे को वापिस जंगल के पास साजा वृक्ष पर छोड़ दिया। कैमरा ट्रैप (बिना फ्लैश) लगाया गया और सुरक्षित दूरी से नजर रखी गयी। रात्री लगभग 10 बजे मादा उड़न गिलहरी की हलचल हुई और 2 घंटे में बच्चे को लेकर वापिस जंगल की ओर चली गयी। अगले दो दिनों तक टीम आस पास के जंगलो की निगरानी रखेगी ताकि मादा उड़न गिलहरी और बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।