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October 19, 2026

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कांदाडोंगर देव दशहरा -20 अक्टूबर को, देवी देवताओं की पूजा अर्चना, शौर्य प्रदर्शन आदिवासी संस्कृति आस्था का अद्भुत संगम

  • शेख हसन खान, गरियाबंद 
  • माता सीता की खोज करते कांदाडोंगर आये थे भगवान श्रीराम और लक्ष्मण
  • कांदाडोंगर पहाड़ी में विराजी है देवी मां कुलेश्वरी, 84 गांव के देवी देवताओं का वास

गरियाबंद । गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत कांदाडोंगर पहाड़ी पर विराजे मां कुलेश्वरी देवी एवं मां खम्बेश्वरी देवी, राजा कंचना ध्रुर्वा स्थल क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक आस्था का केन्द्र है माता के दरबार मे जो भी मुरादे मांगी जाती है मां उसे अवश्य पूरा करती है कांदाडोंगर के विशाल पहाड़ी के चोटी पर मां का प्राचीन मंदिर गुफा नुमा है और यहां पहुंचने वाले श्रध्दालु पूरे श्रध्दा के साथ मां के दरबार मे पहुंचते है यहां दशहरा के दिन 84 गांव के देवी देवताओं का विशेष पूजा अर्चना किया जाता है सभी देवी-देवताओं के पहुचने पर विशाल शोभा यात्रा निकाली जाती है दशहरा पर्व मे लगभग एक लाख से भी ज्यादा लोगो की भीड़ यहां एकत्र होता है।

तहसील मुख्यालय मैनपुर से लगभग 68 किमी दूर मैनपुर विकासखण्ड अंतर्गत क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कांदाडोंगर क्षेत्र के लोगो का आस्था का प्रमुख केन्द्र है यहां जो भी सच्चे दिल से मन्नत मांगी जाती है। उसे माता अवश्य पूरा करती है खाली हाथ कभी श्रद्धालु नही लौटते जिसके चलते खासकर दशहरा के पर्व में यहां जन सैलाब उमड़ पड़ता है। पूरा पहाड़ी क्षेत्र में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है। और देवी -देवताओं की पूजा अर्चना कर यहां दशहरा का पर्व बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। मैनपुर विकासखण्ड के ग्राम गुढ़ियारी स्थित कांदाडोंगर अपनी प्राकृतिक खुबसुरती के लिए प्रसिद्ध है चारो तरफ घने जंगल हराभरा क्षेत्र पर्यटको को अपनी ओर आकर्षित करता है। कांदाडोंगर की पहाड़ी में ऊंचा शिखर पर 84 गांव की देवी मां कुलेश्वरी का मंदिर है। वही इस पहाड़ पर देवशक्ति से उत्पन्न जलकुंड है जहां का पानी कभी नही सुखता।

क्षेत्रीय मान्यता के अनुसार यहां के ऐतिहासिक एवं पौराणिक कथाएं प्रचलित है क्षेत्र के बुजुर्गजनों के बताएं अनुसार त्रेतायुग में जब रावण ने माता सीता का हरण किया था, तब भगवान श्रीराम और लक्ष्मण दोनो भाई माता सीता की खोज करते कांदाडोंगर आये थे यहां कुछ समय बिताये थे। इस पर्वत में ऐसी कई गुफाएं है जिसे लोग लक्ष्मण झुला, हनुमान झुला एवं ऋषियों का तप स्थली के नाम से जानते है। बताया जाता है जब भगवान श्रीराम ने जब लंका विजय किया तो इसकी सूचना मिलते ही कांदाडोंगर में विराजमान देवी मां कुलेश्वरी, मां खम्बेश्वरी देवी एवं 84 गाव के देवी -देवता, ठाकुरदेव अपने -अपने ध्वज पताखा के साथ एकत्र होकर यहां विजयदशमी का पर्व धुमधाम से मनाया था तब से आज तक कांदाडोंगर में दशहरा का पर्व धूमधाम के साथ मनाया जाता है। आदिवासी परंपरा अनुसार नवरात्र पर देवी देवताओं की पूजा अर्चना का शौर्य प्रदर्शन किया जाता है। वही कांदाडोंगर की पहाड़ी में कई स्थानो पर देवी -देवताओं का स्थल है जहां क्षेत्र के लोग विशेष पूजा अर्चना करते है। कांदाडोंगर क्षेत्र की शान है और यहां देवी -देवताओं से आशीर्वाद लेने तथा पूजा अर्चना करने बड़ी संख्या में प्रदेश सहित अन्य प्रदेशो ओड़िसा से लोग पहुंचते है।

सुप्रसिद्ध कांदाडोंगर अपने अपार प्रकृति के सौंदर्य से भरा है। चारों तरफ हराभरा अनूपम छटा से भरपूर अपने अंदर अपार संभावनाएं को समेटे हुए क्षेत्र के आधार स्तंभ की भांति सदियों से विराजमान हैं तो वहीं दूसरी ओर कांदाडोंगर में सैलानियों के लिए पर्यटन दृष्टिकोण से अद्वितीय शानदार मनोरम प्राकृतिक खुबसूरती बरबस ही लोगों को अपनी ओर खींच लाता है। इसके अलावा आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी कांदाडोंगर प्रख्यात है। इसे ईलाके के देवी देवताओं के गढ़ भी कहा जाता है कांदाडोंगर में न सिर्फ प्रकृति की सुंदर छवि है बल्कि इलाके के सभी देवी देवताओं के आध्यात्मिक केंद्र भी कांदाडोंगर को माना जाता है कांदाडोंगर पहाड़ी मे कई रहस्यमय स्थल है जहां वर्षो पुराना शिला लेख भी है जगह जगह देवी देवताओं का वास है।

  • आदिवासी परंपरा अनुसार होती है दशहरा पर पूजा

दशहरा के पर्व पर यहां 84 गांव के देवी देवताओं के पहुंचने पर मां कुलेश्वरी, मां खम्बेश्वरी व राजा कंचनाध्रुर्वा और सभी देवी देवताओं का विधि विधान के साथ आदिवासी परंपरा अनुसार पूजा अर्चना किया जाता है जहां क्षेत्र के बड़े जनप्रतिनिधि से लेकर ओडिशा और अन्य राज्यों के जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण जन लाखों की संख्या शामिल होते है। साथ ही देवी मां से क्षेत्र मे सुख शांति समृध्दि खुशहाली के लिये कामना किया जाता है। कांदाडोंगर में पहाड़ी के नीचे भगवान राधा कृष्ण के साथ अन्य देवी देवताओं का मंदिर निर्माण किया गया है।

कांदाडोंगर क्षेत्र के पुजारी एवं वरिष्ठ जनों बताया यहां प्रमुख धार्मिक स्थल है यहां आदिवासी परंपरा अनुसार वर्षों से दशहरा का पर्व मनाया जाता है। देवी देवताओं से आशीर्वाद लेने छत्तीसगढ़ एवं उड़ीसा सहित 84 गांव से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचते हैं। बहरहाल इन दोनों दशहरा पर्व की तैयारी जोर-जोर से किया जा रहा है।

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