दांव पर लग रही जान! गरियाबंद में ‘भगवान भरोसे’ चल रही बिजली पोल शिफ्टिंग
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- नेशनल हाईवे किनारे बिना हेलमेट-सेफ्टी बेल्ट के ऊंचे खंभों पर काम कर रहे श्रमिक
- न इंजीनियर मौजूद, न सुरक्षा मानक; जिम्मेदार बोले- ठेकेदार को थमाएंगे नोटिस
गरियाबंद। जिले में विकास और निर्माण कार्यों के नाम पर श्रमिकों की जिंदगी से किस हद तक खिलवाड़ किया जा रहा है, इसकी एक बानगी पाण्डुका क्षेत्र में देखने को मिली है। नेशनल हाईवे 130-सी के किनारे चल रहे विद्युत पोल शिफ्टिंग के कार्य में सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां काम कर रहे श्रमिक बिना किसी सुरक्षा उपकरण के मौत के मुंह में झूलते नजर आए, जिन्हें देखने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था।
- ऊंचाई पर जान जोखिम में, सुरक्षा उपकरण गायब

विद्युत पोल शिफ्टिंग का कार्य बेहद संवेदनशील और तकनीकी रूप से जोखिम भरा माना जाता है। कायदे से ऐसे कार्यों के दौरान श्रमिकों के पास हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, ग्लव्स और अन्य अनिवार्य सुरक्षा उपकरण होने चाहिए। साथ ही, किसी अप्रिय घटना से निपटने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों या इंजीनियरों की मौजूदगी अनिवार्य होती है।
लेकिन, पाण्डुका के पास नेशनल हाईवे के किनारे चल रहे इस कार्य की तस्वीरें कुछ और ही दास्तां बयां कर रही हैं। ऊंचे-ऊंचे बिजली के पोल पर चढ़कर काम कर रहे श्रमिकों के सिर पर न तो हेलमेट था और न ही शरीर पर सुरक्षा के लिए कोई सेफ्टी बेल्ट बंधी थी। जरा सी चूक इन श्रमिकों के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी, लेकिन ठेकेदार और विभाग को इसकी कोई परवाह नहीं है।
- सड़क से गुजरने वालों की सुरक्षा पर भी सवाल
यह पूरा मामला केवल श्रमिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यस्त नेशनल हाईवे के किनारे काम होने के कारण यहां से गुजरने वाले आम राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। बिना किसी संकेतक (Warning Board) या सुरक्षा बैरिकेड के चल रहे इस काम से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
- अधिकारियों के रटे-रटाए बोल: ‘नोटिस जारी करेंगे
जब इस गंभीर लापरवाही को लेकर मीडिया ने विद्युत विभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) हेमंत ठाकुर से बात की, तो उनका जवाब बेहद औपचारिक नजर आया। उन्होंने कहा कि “ठेकेदारों को हमेशा निर्देशित किया जाता है कि विद्युत कार्य के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए। यदि संबंधित ठेकेदार द्वारा सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया है, तो उसके विरुद्ध नोटिस जारी किया जाएगा।”
- बड़ा सवाल: क्या कार्रवाई होगी या बात सिर्फ ‘नोटिस’ तक सिमट जाएगी ?
विभाग के इस रवैये ने स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल यह उठता है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इस बात की भनक नहीं थी? क्या ठेकेदार अपनी मनमानी कर श्रमिकों की जान जोखिम में डालते रहेंगे और विभाग सिर्फ नोटिस जारी कर खानापूर्ति करता रहेगा ?
श्रमिकों की सुरक्षा कोई औपचारिकता नहीं बल्कि एक कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है। यदि समय रहते ऐसे लापरवाह ठेकेदारों पर कड़ा जुर्माना और पेनल्टी जैसी ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
