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November 4, 2026

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आदर्श ग्राम पर फिरा पानी, 61 लाख के विकास कार्य चढ़ा भ्रष्टाचार की भेंट, एक साल में ही खंडहर हुआ 40 लाख का मल्टीएक्टिविटी सेंटर

  • शेख हसन खान, गरियाबंद 
  • कमार आदिवासियों के उत्थान के नाम पर सरकारी पैसों की खुली लूट, मजदूरी के लिए तरस रहे ग्रामीण, कर्ज के तले दबे हितग्राही
  • बिना बीम-फाउंडेशन के खड़े किए गए थे भवन, एक साल में ही उड़े शटर-खिड़कियां गरियाबंद कलेक्टर और जिपं सीईओ से उच्चस्तरीय जांच की मांग

गरियाबंद । राज्य और केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण अंचलों और विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए भले ही करोड़ों रुपये की योजनाएं संचालित की जा रही हों, लेकिन विभागीय अधिकारियों की उदासीनता और निर्माण एजेंसियों की मनमानी के कारण ये योजनाएं धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं। ताजा मामला गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखंड मैनपुर के अंतर्गत आने वाले विशेष पिछड़ी कमार जनजाति बाहुल्य ग्राम बेहराडीह (ग्राम पंचायत बोईरगांव) का है। यहाँ ‘आदर्श ग्राम’ के नाम पर खर्च किए गए करीब 61 लाख रुपये भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

  • 61 लाख खर्च, फिर भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित ग्रामीण

तहसील मुख्यालय मैनपुर से महज 9 किलोमीटर दूर स्थित आश्रित ग्राम बेहराडीह को लगभग तीन वर्ष पूर्व जिला पंचायत गरियाबंद द्वारा ‘आदर्श ग्राम’ के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी। इस योजना के तहत कमार जनजाति के विकास और उन्हें आजीविका से जोड़ने के लिए मधुमक्खी पालन, तालाब निर्माण (मछली पालन हेतु), वृक्षारोपण और तार फेंसिंग जैसे कार्य कराए जाने थे।इन तमाम विकास कार्यों पर लगभग 61 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की गई, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी इसका कोई ठोस लाभ ग्रामीणों को नहीं मिला। स्थिति यह है कि कई गरीब परिवारों को आज तक उनके हिस्से की मजदूरी राशि तक नहीं मिल पाई है। वहीं, तालाब निर्माण के बाद हितग्राहियों को पूरा भुगतान न मिलने के कारण वे साहूकारों और बैंकों के कर्ज तले दब चुके हैं।

  • 40 लाख की लागत से बना मल्टीएक्टिविटी सेंटर एक साल में ही खंडहर

योजना के तहत भूमि संरक्षण विभाग गरियाबंद द्वारा वर्ष 2023-24 में लगभग 9.48 लाख रुपये की लागत से अलग-अलग तीन मल्टीएक्टिविटी केंद्र भवनों का निर्माण कराया गया था, जिस पर कुल मिलाकर करीब 40 लाख रुपये खर्च किए गए। स्वसहायता समूह की महिलाओं को रोजगार और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से बनाए गए ये भवन आज खुद बदहाली के आंसू रो रहे हैं।निर्माण के दौरान ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने घटिया निर्माण कार्य की शिकायत की थी, लेकिन संबंधित विभाग ने इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। वर्ष 2025 में कार्य पूरा होने के एक साल के भीतर ही तीनों भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। हालात इतने बदतर हैं कि भवनों के शटर और खिड़कियां हवा में उड़ गए हैं और दीवारों की नींव बाहर निकल आई है। बिना बीम डाले खड़े किए गए इन भवनों की गुणवत्ता पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

  • अधिकारियों की उदासीनता से बढ़ा भ्रष्ट तंत्र का मनोबल

ग्रामीणों का आरोप है कि जिला पंचायत द्वारा अवस्थापना विकास कार्य के लिए भूमि संरक्षण विभाग और ग्राम पंचायत को कार्य एजेंसी बनाया गया था, लेकिन विभागीय देखरेख के अभाव में पूरी योजना का बंटाधार हो गया। दूरस्थ वनांचल क्षेत्र होने के कारण इन निर्माण कार्यों का जायजा लेने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचता, जिसका फायदा उठाकर निर्माण एजेंसियों ने जमकर भ्रष्टाचार किया है।

  • जनपद सदस्य ने कलेक्टर व सीईओ से उच्चस्तरीय जांच की मांग की 

इस पूरे बहुचर्चित भ्रष्टाचार के मामले में अब जनप्रतिनिधि भी खुलकर सामने आ गए हैं। क्षेत्र के जनपद सदस्य सुखचंद ध्रुव ने गरियाबंद जिले के कलेक्टर रणबीर शर्मा एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर चंद्राकर को आधिकारिक रूप से पत्र लिखकर बेहराडीह में शासकीय निर्माण कार्यों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की पुरजोर मांग की है।जनपद सदस्य और ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

बेहराडीह में कराए गए सभी विकास कार्यों और मल्टीएक्टिविटी भवनों के निर्माण की गुणवत्ता की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।घटिया निर्माण और लापरवाही के दोषी पाए जाने वाले संबंधित अधिकारियों व निर्माण एजेंसियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।

  • शासकीय राशि के दुरुपयोग की भरपाई दोषियों से वसूल की जाए

गरीब और बेसहारा हितग्राहियों को उनके बकाया मजदूरी का भुगतान तथा तालाब निर्माण की शेष राशि जल्द से जल्द दिलाई जाए।ग्रामीणों ने चेताया है कि यदि समय रहते इस पूरे प्रकरण पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्र के आदिवासियों में पनप रहा यह आक्रोश बड़ा रूप ले सकता है, जिससे शासन की छवि भी धूमिल हो रही है।