स्वच्छ भारत का दम तोड़ता सपना – कागजों पर ओडीएफ गांव में अधिकांश शौचालय कबाड़ में तब्दील, फिर नदी नालों की तरफ ग्रामीण जाने को मजबूर
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- खुले मे शौच को मजबुर ग्रामीण सरकारी दावो की पोल खोलती धरातल की कड़वी सच्चाई
- मैनपुर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में कहीं निर्माण अधूरा तो कहीं पानी की सुविधा नहीं होने के कारण इसका उपयोग ही नहीं हुआ
मैनपुर । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के क्लीन इंडिया के सपने को पूरा करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गांधी जयंती के अवसर पर 2019 में स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की गई थी, लेकिन स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए अधिकांश शौचालय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए दरअसल, जल्दबाजी में शौचालय का तो निर्माण किया गया है, लेकिन वह उपयोग के लायक नहीं रहा कहीं निर्माण अधूरा तो कहीं पानी की सुविधा नहीं होने के कारण इसका उपयोग ही नहीं हुआ जिसके कारण ग्रामीण इलाको के गांवो मे शाम होते ही नदी नालो तालाबो मे शौच जाने के लिए ग्रामीण मजबुर हो रहे है।

उल्लेखनीय है कि शौचालय निर्माण के नाम पर गरियाबंद जिले के ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपए खर्च किया गया एक शौचालय के लिए करीब 12 हजार रुपए तक मिला शौचालय निर्माण की जिम्मेदारी जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत को दी गई थी, लेकिन ग्राम पंचायतों द्वारा जल्दबाजी में आधा अधूरा निर्माण करवाकर पूर्ण होना बताया गया अब भी अधिकतर जगहों पर शौचालय अधूरा है, जिसके कारण इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। वहीं जहां पर निर्माण पूर्ण भी हुआ, लेकिन उपयोग नहीं हो रहा है। कुछ जगहों पर तो सिर्फ शौचालय निर्माण किया गया, लेकिन सेप्टिक टैंक नहीं बनाया गया।
गुणवत्ताहीन होने से खंडहर बन गए शौचालय – शौचालय के नाम पर चार दीवार खड़ा कर शौचालय का निर्माण पूर्ण बताया गया, जबकि जब शौचालय बनाया जा रहा था, तब ग्रामीण काफी खुश थे, लेकिन उनकी खुशी निर्माण एजेंसी को रास नहीं आई टारगेट पूरा करने के उद्देश्य से आधे अधूरे शौचालय बनाकर ओडीएफ यानी शौच मुक्त ग्राम पंचायत घोषित कर दिया स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने गांव के कई शौचालय गुणवत्ताहीन होने के कारण खंडहर बन गए।
शौचालय का उपयोग मुर्गी पालने में – गरियाबंद जिले के विकासखण्ड मैनपुर के कई अंदरूनी गांव के ग्रामीण शौचालय का उपयोग मुर्गी पालने के लिए कर रहे हैं, क्योंकि वे पहले से ही खुले में शौच जाते रहे हैं और उन्हें अब भी खुले में ही जाना पसंद है वहीं कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां शौचालय तो बनाया गया, लेकिन उसका उपयोग ही नहीं हुआ। इस तरह स्वच्छ भारत मिशन का सपना पूरा नही हो पा रहा है शौचालय निर्माण के बाद जब ओडीएफ घोषित हुआ, इसके बाद से इस ओर ध्यान ही नहीं दिया गया, यह भी असफल होने का एक कारण है।
कड़वी सच्चाई को विभाग लाख नकारे लेकिन गांव में आज भी लोग खुले जाने मजबुर – देश को खुले में शौच मुक्त बनाने के सरकार के बड़े दावों और स्वच्छ भारत मिशन की चमकती तस्वीरों के पीछे की एक कड़वी और चिंताजनक सच्चाई सामने आ रही है। जिले के ग्रामीण इलाकों में कभी घर-घर की शान बनने वाले शौचालय आज देखरेख के अभाव में खंडहर और कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि मजबूरी में एक बार फिर ग्रामीण नदी, नालों और तालाबों के किनारों का रुख करने लगे हैं।
कागजों पर ओडीएफ, जमीन पर बदहाली – सरकारी आंकड़ों में भले ही गांवों को खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया गया हो, लेकिन मैदानी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। योजना के तहत जल्दबाजी में बनाए गए अधिकांश शौचालयों की गुणवत्ता बेहद घटिया थी। कई जगहों पर टंकियां नहीं जुड़ीं, तो कहीं पाइपलाइन चोक हो गई। नतीजतन, कुछ ही महीनों में ये उपयोग के लायक नहीं बचे और आज इनमें ग्रामीणों ने कबाड़, लकड़ी या गोबर के कंडे भरने शुरू कर दिए हैं।
क्या कहते है मुख्य कार्यपालन अधिकारी– जनपद पंचायत मैनपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गेंदलाल चुरेन्द्र ने बताया जब शौचालय निर्माण हुआ और ओडीएफ घोषित हुआ उस समय कई लोग संयुक्त परिवार मे रहते थे अब कई परिवार अलग अलग होने के कारण फिर नया शौचालय निर्माण के लिए आवेदन आ रही है जिसे स्वीकृति के लिए भेजा गया है। उन्होने आगे बताया कई जगह जो शौचालय उपयोग नही किये जाने की जानकारी मिल रही है वहां फिर जनजागरूकता अभियान चलाया जायेगा।
क्या कहते है ब्लॉक समन्वयक – स्वच्छ भारत मिशन के ब्लॉक समन्वयक उत्तर यादव ने कहा मैनपुर विकासखण्ड मे मै नया ज्वाइनिंग किया हॅू कितने संख्या मे शौचालय बना है और कहां कहां उपयोग किया जा रहा है फाइल देखकर ही बता पाउंगा।
