उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के जंगल में वृक्षों के ‘संजीवनी अभियान’ में जुटे कर्नाटक से पहुंचे ट्री डॉक्टर द्वारा 3,500 ज़ख्मी वृक्षों का वैज्ञानिक उपचार शुरू
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण की अनोखी मिसाल: 3,500 पेड़ों को बचाने USTR में उतरी 100 वनकर्मियों की ‘मेडिकल टीम’
- पैरी नदी के जलग्रहण क्षेत्र को बचाने की जंग: गर्डलिंग से क्षतिग्रस्त 3.5 हज़ार पेड़ों का शुरू हुआ इलाज
- उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में 3,500 क्षतिग्रस्त पेड़ों का इलाज शुरू; कर्नाटक से पहुँचे ‘ट्री डॉक्टर’ विजय निशांत
गरियाबंद-उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) के करका वन क्षेत्र में गर्डलिंग (छाल काटकर सुखाने की प्रक्रिया) का शिकार हुए लगभग 3,500 पेड़ों को नया जीवन देने के लिए एक ऐतिहासिक वैज्ञानिक अभियान शुरू किया गया है। इन पेड़ों को बचाने के लिए ‘प्रोजेक्ट वृक्ष फाउंडेशन’ के प्रसिद्ध ‘ट्री डॉक्टर’ विजय निशांत कर्नाटक से विशेष रूप से पहुँचे हैं। ड्रोन और उपग्रह तस्वीरों के तुलनात्मक विश्लेषण से पता चला है कि पिछले एक दशक में कर्का क्षेत्र में अतिक्रमण के चलते 1.25 लाख से अधिक वृक्ष नष्ट हुए हैं। 2016 में जहाँ अतिक्रमण 22 हेक्टेयर था, वहीं 2026 में यह बढ़कर 102.47 हेक्टेयर पहुँच गया है।
- 4 श्रेणियों में बाँटकर शुरू हुई पेड़ों की ‘सर्जरी’
विशेषज्ञ विजय निशांत के मार्गदर्शन में प्रभावित वृक्षों को उनकी स्थिति के आधार पर चार श्रेणियों में विभाजित कर उपचार दिया जा रहा है:-तत्काल सर्जरी (ट्री बैंडेजिंग): गंभीर रूप से घायल पेड़ों को तुरंत प्राथमिक उपचार।
50-75% जीवन संभावना वाले पेड़: ‘ब्रिज ग्राफ्टिंग’ (पौध ऊतकों को जोड़कर पोषक तत्व पहुँचाना) के जरिए पुनर्जीवन।
50% से कम संभावना वाले पेड़: गहन देखभाल, रूट स्ट्रेंग्थनर और टिश्यू ग्रोथ हॉर्मोन का छिड़काव।
पूर्णतः मृत पेड़: प्राकृतिक पुनर्जनन को बढ़ावा देने के लिए चुनिंदा कटाई ताकि जड़ों से नई कोंपलें फूट सकें।
- बीवैक्स, संतरे का तेल और आधुनिक तकनीकों का प्रयोग
इस अभियान में हर पेड़ को अलग क्रमांक (नंबर) देकर वैज्ञानिक अभिलेखीकरण किया जा रहा है। उपचार में मधुमक्खी के मोम (बीवैक्स), संतरे के तेल, रूट ट्रेंचिंग और पादप वृद्धि हार्मोनों का इस्तेमाल हो रहा है। इसके साथ ही, प्राकृतिक रूप से घाव भरने वाले पेड़ों का अध्ययन कर भविष्य के लिए वैज्ञानिक मॉडल भी तैयार किया जा रहा है।
- 100 से अधिक वनकर्मी ले रहे ट्रेनिंग
अभियान में USTR के 100 से अधिक मैदानी वनकर्मियों के साथ-साथ नगरी के उद्यानिकी विशेषज्ञ श्री चन्द्रप्रकाश साहू, श्री बीरबल और ग्राफ्टिंग विशेषज्ञ शामिल हैं। इसका उद्देश्य वनकर्मियों की तकनीकी क्षमता को बढ़ाना है ताकि वे आगे भी पेड़ों की निगरानी कर सकें।
- पैरी नदी और पारिस्थितिकी के लिए बेहद ज़रूरी
करका क्षेत्र पैरी नदी का ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) है, जो राजिम में महानदी से मिलती है। इस क्षेत्र में जंगलों का बचना जैव विविधता, मृदा संरक्षण और जलग्रहण तंत्र की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। USTR का यह प्रयास क्षतिग्रस्त पारिस्थितिकी तंत्र को पुनः बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व की उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कर्नाटक से पहुंचे डॉक्टर और वन विभाग की टीम द्वारा पेड़ों की उपचार प्रारंभ कर दिया गया है
