गरियाबंद में ठेकेदार की ‘दबंगई- सरपंच ने रोका तो बोला- “कौन सा काम ईमानदारी से होता है?”, इंजीनियर के पहुंचने तक 80 % छत भी ढाल दी
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- मैनपुर उरमाल के प्राथमिक शाला अतिरिक्त कक्ष निर्माण में बड़ा खेल- मानकों को ताक पर रखकर हो रहा था काम, आरईएस इंजीनियर ने पकड़ी धांधली
गरियाबंद । जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत उरमाल में समग्र शिक्षा मद से बन रहे प्राथमिक शाला अतिरिक्त शाला भवन निर्माण में ठेकेदार की मनमानी और दबंगई का अनोखा मामला सामने आया है। लगभग 8 लाख रुपये की लागत से बन रहे इस भवन में शुरुआत से ही गुणवत्ता की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। हद तो तब हो गई जब घटिया सेंट्रिंग और नियमों को ताक पर रखकर छत की ढलाई की जा रही थी। सरपंच के रोकने पर भी ठेकेदार और उसके नुमाइंदों ने अपनी धौंस दिखाई और देखते ही देखते 80 फीसदी छत की ढलाई भी पूरी कर डाली।

- सरपंच ने दी सूचना, तब तक ढल गई 80 % छत
ग्राम पंचायत उरमाल के सरपंच खगेश्वर ध्रुव को जब निर्माण कार्य में अनियमितता की भनक लगी, तो वे अपने पंचायत पदाधिकारियों के साथ मौके पर निरीक्षण करने पहुंचे। वहां का नजारा देखकर वे हैरान रह गए। काम में खुलेआम घटिया सामग्रियों और गलत तरीकों का इस्तेमाल हो रहा था। सरपंच ने तुरंत इसकी सूचना ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के तकनीकी सहायक को दी। हालांकि, मैनपुर मुख्यालय से तकनीकी सहायक के मौके पर पहुंचने से पहले ही हड़बड़ी में निर्माण एजेंसी ने जबरन स्लैब की 80 फीसदी ढलाई पूरी कर ली।
- प्रारंभिक जांच में खुली पोल: नियमों की उड़ी धज्जियां
मौके पर पहुंचे तकनीकी सहायक तामेश्वर साहू ने जब शुरुआती जांच की, तो भारी गड़बड़ियां सामने आईं।बीम और ढलान में गड़बड़ी नियमों के मुताबिक 9 सेंटीमीटर की बीम बनाई जानी थी, जिसे बढ़ाकर 20 सेंटीमीटर का कर दिया गया। वहीं, स्लैब की ढलान 4 सेमी होनी थी, जिसे बिल्कुल नहीं किया गया।
छड़ों की गलत बाइंडिंग: तय मापदंडों के अनुसार छड़ों (राड़) को नहीं बांधा गया था। सेंट्रिंग में भी भारी अनियमितता पाई गई।
इंजीनियर की दो टूक: तकनीकी सहायक ने बताया कि काम रोकने के निर्देश के बावजूद साइट इंचार्ज ने बात नहीं मानी और उलटे “जो करना है कर लो” की धमकी दी। पंचायत प्रतिनिधियों के सामने उपयंत्री ने पंचनामा तैयार कर लिया है और उच्च अधिकारियों को प्रतिवेदन सौंपकर भुगतान रोकने की बात कही है।
- ठेकेदार का दुस्साहस: “पंचायतों में कौन सा काम ईमानदारी से होता है?”
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब सरपंच खगेश्वर ध्रुव ने निर्माण एजेंसी फर्म ‘यूनाइटेड ट्रेड्स’ के प्रोराइटर सफदर हुसैन को फोन लगाया, तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना और चौंकाने वाला था।अपनी गलती स्वीकार करने या काम सुधारने के बजाय प्रोराइटर ने उलटे सरपंच को ही नसीहत दे डाली। उसने कहा कि “पंचायतों में कौन सा काम ईमानदारी से होता है, हमें अच्छे से पता है। हमें अपनी मर्जी से काम करने दो, जो होगा अधिकारी संभाल लेंगे, आप लोगों को इसमें दखल देने की जरूरत नहीं है।”
- आगे की कार्रवाई
ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि आदिवासी विकास खंड क्षेत्र में सरकारी पैसों का इस तरह का बंदरबांट बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। फिलहाल, तकनीकी अमले द्वारा निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच की जा रही है और इंजीनियरों ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर ठेकेदार का पूरा भुगतान रोका जाएगा और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
उपयंत्री तोमेश साहू ने बताया – उपयंत्री तोमेश साहू ने बताया कार्यस्थल पर पहुंचने से पूर्व ही ठेकेदार द्वारा 80% ढलाई का कार्य बहुत ही गुणवत्ता विहीन किया गया है जिसका पंचनामा तैयार कर कार्यवाही के लिए उच्च अधिकारियों को भेजा जा रहा है।
