राज्य निर्माण के 26 साल बाद भी मैनपुर के 40 से ज्यादा गांव में नहीं पहुंच पाई बिजली की रौशनी
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- दिये तले अंधेरा – हाईटेंशन तारों के साये में लालटेन और चिमनी के सहारे जीने को मजबूर मैनपुर क्षेत्र के 50 हजार ग्रामीण
- वादे हुए हजार, पर आज भी समस्या बरकरार,, आंदोलन करते थके ग्रामीण
गरियाबंद । आज 01 नवम्बर को छत्तीसगढ़ राज्य के गठन को 26 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। एक ओर प्रदेश को सरप्लस बिजली वाला राज्य बताकर देश के दूसरे राज्यों को ऊर्जा आपूर्ति करने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर गरियाबंद जिले के आदिवासी बहुल्य विकासखंड मैनपुर के 40 से अधिक पारा-टोलो और गांवों में आज भी बिजली की एक किरण तक नहीं पहुंची है। इक्कीसवीं सदी के इस आधुनिक युग में भी यहां के ग्रामीण और स्कूली बच्चे लालटेन, चिमनी और दीयों के सहारे काला अंधेरा चीरने को मजबूर हैं। प्रदेश ने पिछले ढाई दशकों में विकास के कई सोपान तय किए हैं, लेकिन मैनपुर क्षेत्र के कई दूरदराज इलाके आज भी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर हैं। शाम ढलते ही नारीपानी, तौरेंगा, पयलीखण्ड, बरगांव, कुर्रूभाठा, जांगड़ा, अमाड़, डुमरघाट, रक्शापथरा, मोंगराडीह, भालूपानी, कुचेंगा, गरीबा, जुगांड़, कोकड़ी, ओड, कुकराल, नगराल, आमामोरा, देवझरअमली, भीमाटिकरा, महुआनाला, साहेबिनकछार, चिपरी, गौरगांव, कमारपारा, भुतबेड़ा सहित 40 से ज्यादा गांवों में बिजली नही पहुंच पाई है यहां के ग्रामीण अंधेरा होने के डर से महिलाएं शाम से पहले ही चूल्हा-चौका संभाल लेती हैं और बच्चे उसी धुंधले उजाले में पढ़ने को विवश होते हैं।

जंगल के भीतर बसे इन ग्रामो मे हमारे संवाददाता शेख हसन खान ने पहुंचकर लोगो से चर्चा किया। ग्रामीणो ने बताया बिजली की मांग को लेकर कई दफे आंदोलन चक्काजाम मैनपुर से गरियाबंद तक पदयात्रा कर चुके है कभी वन विभाग द्वारा बिजली लगाने मे एनओसी नही दिया जाता तो कभी बजट का अभाव बताया जाता है आज छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 26 वर्षो बाद भी बिजली की रौशनी नही पहुंच पाई है जिसके चलते गांव के विकास थम सा गया है ग्रामीणो का कहना है छत्तीसगढ़ प्रदेश को सर प्लस बिजली वाला राज्य का दर्जा मिला है और यहां के बिजली को अन्य प्रदेशो मे बेचा जा रहा है लेकिन हमारे लिए यह दुर्भाग्य का विषय है कि आज तक हमारे इन गांवो मे बिजली नही लग पाई है।
- फ्लॉप साबित हुई क्रेडा की सौर ऊर्जा योजना
शासन द्वारा इन गांवों में बिजली पहुंचाने के विकल्प के तौर पर क्रेडा विभाग के माध्यम से सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गये है लेकिन रख-रखाव के अभाव में ये योजनाएं पूरी तरह दम तोड़ रही हैं। कई गांवों में सौर प्लेटें और कलपुर्जे खराब पड़े हैं। जो प्लांट चालू भी हैं, वे बमुश्किल 1 से 2 घंटे ही रोशनी देते हैं, जिसके बाद पूरी रात ग्रामीणों को अलाव या लालटेन के भरोसे गुजारनी पड़ती है। हालंकि सौर ऊर्जा विभाग द्वारा लगातार इसके सुधार के प्रयास किये जाते है लेकिन क्रेडा विभाग हमेशा बजट का रोना रोता है और विभाग के द्वारा जो गांव मे देखरेख के लिए सौर प्लांट मरम्मत कर्मचारी के लिए भी बजट का अभाव बना हुआ है।
- सर के ऊपर से गुजर रही लाइन, नीचे पसरा है अंधेरा
विभागीय विडंबना देखिए कि नेशनल हाईवे 130-सी (मैनपुर-देवभोग मार्ग) पर बसे ग्राम पंचायत तौरेंगा एवं डुमरघाट के ऊपर से मुख्य बिजली के तार गुजरे हैं, लेकिन गांव के आशियाने आज भी अंधेरे में डूबे हैं। सरपंच बनसिंह सोरी, अनुप कश्यप व अन्य ग्रामीणों का कहना है कि 21वीं सदी में बिजली के बिना जीवन कितना नारकीय होता है, इसका अंदाजा यहां आकर ही लगाया जा सकता है। मोबाइल चार्ज करने तक के लाले पड़े हैं।
- राजनीतिक दलों के वादे और संघर्ष
बिजली लगाने की मांग को लेकर क्षेत्र के आदिवासियों ने अनगिनत बार धरना-प्रदर्शन, रैलियां और सड़क की लड़ाई लड़ी है। हर पांच साल बाद चुनाव के दौरान नेताजी बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव बीतने के बाद कोई सुध लेने नहीं पहुंचता।
- क्या कहते है अफसर
बिजली विभाग के कार्यपालन अभियंता गरियाबंद हेमंत कंवर ने बताया मैनपुर विकासखण्ड 50 से अधिक पाराटोला मे बिजली नही लगी है जहां सौर ऊर्जा से रौशनी की व्यवस्था किया गया है। श्री कंवर ने बताया बिजली लगाने के लिए स्टीमेट बनाकर भेजा गया है कई ग्रामो मे टाइगर रिजर्व क्षेत्र होने के कारण परेशानी आ रही है अंडरग्राउंड बिजली कनेक्शन लगाने के लिए स्टीमेट बनाकर भेजा गया है स्वीकृत होने पर कार्य प्रारंभ किया जायेगा।
