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October 29, 2026

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महिला एवं बाल विकास विभाग मैनपुर के पास न खुद का भवन और न ही स्थायी अधिकारी

  • शेख हसन खान, गरियाबंद 
  • जिम्मेदार अधिकारी नही होने से अधिकांश आंगनबाड़ी केन्द्रो मे पेयजल, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं, भगवान भरोसे चल रहा
  • मैनपुर क्षेत्र की जनता ने महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े एवं गरियाबंद कलेक्टर से लगाई फरियाद

गरियाबंद। गरियाबंद जिले के आदिवासी मैनपुर ब्लॉक में शासन के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में शुमार महिला एवं बाल विकास विभाग खुद ही बेहाल और भगवान भरोसे संचालित हो रहा है। हालात यह हैं कि विभाग के पास न तो अपना खुद का कार्यालय भवन है और न ही कोई स्थायी परियोजना अधिकारी। आलम यह है कि ब्लॉक की 339 आंगनबाड़ियों में से 100 से अधिक केंद्र आज भी किराए के मकानों, सामुदायिक भवनों और जर्जर झोपड़ियों में संचालित हो रहे हैं, जहां नौनिहालों का भविष्य दांव पर लगा है। तहसील मुख्यालय मैनपुर में एकीकृत बाल विकास परियोजना की शुरुआत सन 1980 में हुई थी। पूर्व में विभाग का जो भवन था, वह पूरी तरह जर्जर हो जाने के कारण पिछले 3-4 वर्षों से किराए के भवन में संचालित हो रहा है। वर्तमान में पूरा कार्यालय महज एक छोटे से कमरे में सिमट गया है, जिसके चलते विभागीय बैठकों और रोजमर्रा के कार्यों के संचालन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

  • एक साल से स्थायी परियोजना अधिकारी का पद खाली, गरियाबंद से चल रहा कामकाज

महिला एवं बाल विकास विभाग की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मैनपुर परियोजना अधिकारी पी आर ठाकुर के दिसंबर 2025 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन एक साल बाद भी मूल अधिकारी की नियुक्ति नहीं हो पाई है। वर्तमान में गरियाबंद के जिला अधिकारी ही मैनपुर का अतिरिक्त प्रभार संभाले हुए हैं। इस प्रशासनिक उदासीनता के कारण इस विभाग की महत्वपूर्ण योजनाओ का संचालन और क्रियान्वयन करने मे भारी परेशानी हो रही है और तो और 0 से 6 वर्ष के बच्चों तक शासन की महत्वपूर्ण योजनाएं और योजनाओं का लाभ सुचारू रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों ने इस गंभीर समस्या को लेकर छत्तीसगढ़ शासन की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल और गरियाबंद कलेक्टर रणबीर शर्मा से मांग किया है कि तत्काल मैनपुर में स्थायी अधिकारी की नियुक्ति और नए कार्यालय भवन के निर्माण किया जाये जिससे सरकार के इस महत्वपूर्ण विभाग की योजनाओ का लाभ सुचारू रूप से मिल सके।

  • बदहाल आंगनबाड़ियां, जान जोखिम में डालकर पहुंच रहे मासूम 

मैनपुर विकासखण्ड क्षेत्र के दुरस्थ वनांचल के ग्रामो मे दर्जनो जर्जर खपरैल भवन वाला 30 से 35 वर्ष पुराने कवेलू और खपरैल वाले जर्जर भवनों में कई आंगनबाड़ियां चल रही हैं, जो कभी भी धराशायी हो सकती हैं। इन आंगनबाड़ियो मे न तो शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही अन्य सुविधाएं जिसके चलते भारी परेशानियो का सामना करना पड़ता है कई जगह आंगनबाड़ी भवन अधुरे होने के कारण किराए के मकानो और झोपड़ियो मे आंगनबाड़ी संचालित करना पड़ रहा है। स्थायी अधिकारी नही होने के कारण इस समस्या का स्थायी समाधान भी नही हो पा रहा है।

  • रनिंग वाटर योजना में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 3-4 साल पहले मैनपुर क्षेत्र के 148 आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को शुद्ध पेयजल देने के लिए लाखों रुपए खर्च कर रनिंग वाटर सिस्टम लगाया गया था। लेकिन विडंबना देखिए कि एक दर्जन केंद्रों को छोड़कर अधिकांश जगहों पर पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी और धीरे-धीरे पाइपलाइन व टंकियां टूट-फूटकर कबाड़ बन गईं। अधिकांश केंद्रों पर न तो ढंग का शौचालय है और न ही पीने का साफ पानी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी देने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

क्या कहते है जिला अधिकारी – महिला एवं बाल विकास विभाग जिला कार्यक्रम अधिकारी वरूण सिंह नागेश ने चर्चा मे बताया कि मैनपुर परियोजना कार्यालय के पास स्वयं का भवन नही है, इसलिए किराए के भवन मे संचालित किया जा रहा है। उन्होने कहा कि जल्द ही यहां नया परियोजना अधिकारी की नियुक्ति की मांग करेंगे। उन्होने बताया मै अभी नया आया हूॅ जहां भी आंगनबाड़ी केन्द्रो मे शौचालय, पेयजल मूलभूत समस्याएं है उसे दूर किया जायेगा। बच्चो को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी।