महा ग्रामसभा में उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के 128 ग्रामों के हजारों ग्रामीण हुए शामिल, बिन्द्रानवागढ़ MLA जनक ध्रुव एवं सिहावा MLA अंबिका मरकाम सभा में जमकर गरजे
- शेख हसन खान गरियाबंद
- जल-जंगल-जमीन बचाओ संघर्ष समिति उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के बेनर तले हजारों महिला- पुरूष महा ग्रामसभा में हुए शामिल
- विस्थापन का अन्याय अब बर्दास्त नहीं, दो टूक बोले विधायक जनक ध्रुव और अंबिका मरकाम जनता पर अत्याचार कतई सहन नहीं करेंगे
- क्षेत्र की जनता मेरा परिवार और परिवार के साथ अन्याय बर्दास्त नहीं, टाईगर रिजर्व में आदिवासी के बेदखली के खिलाफ भड़के विधायक
गरियाबंद। तहसील मुख्यालय मैनपुर से 30 कि.मी. दूर राजापड़ाव गौरगांव क्षेत्र के ग्राम कोकड़ी में आज शनिवार को जल, जंगल, जमीन बचाओ संघर्ष समिति उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व द्वारा महा ग्रामसभा का आयोजन सुबह 11 बजे संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर के छायाचित्र की पूजा अर्चना कर किया गया इस महाग्रामसभा में 128 ग्राम के महिला पुरूष जनप्रतिनिधि, सामाजिक मुखिया हजारो की संख्या में शामिल हुए, महा ग्रामसभा की अध्यक्षता हिम्मत सिंह नेताम ने किया तो वहीं उदंती जल, जंगल, जमीन बचाव समिति के अध्यक्ष सिरधन सोम ने ग्रामसभा में जो प्रस्ताव पास किया गया उसे पढ़कर सुनाया गया साथ ही महा ग्रामसभा द्वारा 60 दिवस की समय दिया गया है वे इन संकल्पों को विधानसभा, लोकसभा जिला जनपद में उठाकर शासन से अनुपालन कराये एवं 60 दिवस में कोई कार्यवाही नही होती है तो पेशा एक्ट के तहत ग्रामसभा का असहयोगी माना जायेगा। महा ग्रामसभा में धमतरी एवं गरियाबंद जिले के विभिन्न ग्रामो से पहुंचे सामाजिक मुखिया मांझी, गायता, पुजारी एवं जनप्रतिनिधियों ने खुलकर अपनी बातो को रखी।

कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बिन्द्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव, सिहावा क्षेत्र के विधायक श्रीमति अंबिका मरकाम, एसडीएम नेहा भेड़िया, नायब तहसीलदार भी पहुंचे थे। विधायक जनक ध्रुव ने अपने संबोधन में कहा हजारो साल से हमारे आदिवासी समाज के पुरखा जंगल में निवास करते हैं, हम जंगल छोड़कर कहाँ जाएँ? उन्होंने आगे कहा कि जल, जंगल और जमीन आदिवासियों की अस्मिता, संस्कृति और आजीविका का मुख्य आधार हैं वनों से आदिवासियों को अलग करने का मतलब उनकी संस्कृति और अस्तित्व को मिटाना है विधायक ध्रुव ने कहा शाम 6-7 बजे के बाद नेशनल हाईवे में नाका लगा देने से हजारो आदिवासियों और क्षेत्र के लोगो को इलाज व विषम परिस्थिति में भारी दिक्कतो का सामना करना पड़ रहा है। आज यह महा ग्रामसभा का मुख्य विषय यही है साथ ही विस्थापन के नाम पर वन विभाग द्वारा ग्रामीणों पर दबाव बनाया जा रहा है जबकि यहां निवास करने वाले लोगो को जो सैकड़ो साल से यहां निवास कर रहे है और जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा कर रहे है उन्हे पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली जैसे बुनियादी सुविधाए उपलब्ध कराना चाहिए। विधायक जनक ध्रुव ने कहा क्षेत्र की समस्याओं को लेकर विधानसभा में पहले भी आवाज उठाते रहे है और आगे भी आवाज उठाते रहेगें इस क्षेत्र की प्रमुख मुद्दा विधानसभा में आगामी सत्र में प्रमुखता केे साथ उठाई जायेगी।
सिहावा विधायक श्रीमती अंबिका मरकाम ने वन विभाग और प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारे पूर्वज पीढ़ियों से इस जंगल क्षेत्र में निवास करते आए हैं, जिनकी वजह से आज जल, जंगल, ज़मीन और वन्य प्राणी सुरक्षित हैं वन विभाग द्वारा स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों को उनके अपने ही घरों से बेदखल करने के जो कुंठित प्रयास किए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य हैं क्षेत्र की जनता को एकजुट रहने का आह्वान करते हुए श्रीमती मरकाम ने कहा कि संगठन में ही असली शक्ति है और हमें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर लड़ना होगा। उन्होंने ग्रामीणों को चेताया कि हमारे संगठन और एकता को तोड़ने के लिए कई लोग और प्रशासनिक अधिकारी तरह-तरह के प्रयास करेंगे, लेकिन हमें आपस में नहीं उलझना है, बल्कि एकजुटता बनाए रखनी है। जनप्रतिनिधि होने के नाते जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता उनका परिवार है और वे परिवार के साथ हमेशा खड़े रहेगें।
संरक्षक मनोज साक्षी, अर्जून नायक, टीकम नागवंशी, आदिवासी नेता महेन्द्र नेताम, पुरन मेश्राम, दैनिक राम मंडावी, दीनाचंद मरकाम सहित क्षेत्र के वरिष्ठ आदिवासी नेताओं ने कहा आज हमें जंगल से बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है आवागम में दिक्कत हो रही है गांव में बिजली नही है, स्वास्थ्य शिक्षा के लिए आंदोलन करते थक चूके है वनग्राम को राजस्व ग्राम का दर्जा नही मिला जल, जंगल, जमीन व वन्य प्राणी आज क्षेत्र में जो सुरक्षित है वह इस क्षेत्र के लोगो की देन है और हमें जो बेदखल करने का प्रयाास किया जा रहा है वह कभी पूरा नही होगा। आज हम सभ हो एक ठोस निर्णय लेने की जरूरत है। इस मौके पर प्रमुख रूप से जल, जंगल, जमीन बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष सिरधन सोम, महा सचिव रेवा देवदास, सचिव माखन सलाम, धनेश मरकाम, मनोज साक्षी, हिम्मत सिंह नेताम, टीकम नागवंशी, महेन्द्र नेताम, दैनिक राम मंडावी, अर्जून नायक, मंगल सिंह नाग, रवि नेताम, लक्ष्मण सिंह मरकाम, गोकुल नेताम, ईश्वरी नेताम, बुधराम मांझी, संतोष मरकाम, शंकर लाल नेताम, चिमन लाल, कृष्णा मंडावी, दिनाचंद मरकाम, निरमती नेताम, दुखिया बाई मरकाम, देवी सिंह नेताम, रमुला मरकाम, फूलमति नेताम, बुधुराम मरकाम, फूलचंद मरकाम, रेवती यादव, रामकृष्ण ध्रुव, गेंदु यादव, डीके यादव, एवं हजारो की संख्या में 128 ग्रामों के हजारो लोग शामिल हुए शाम 5 बजे तक महा ग्रामसभा का आयोजन किया। संचालन पुरन मेश्राम ने किया।
आदिवासी समाजों और जंगलों के अधिकारों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी तेज हो गई है। महा ग्रामसभा दौरान बिन्द्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव एवं सिहावा विधायक अंबिका मरकाम एवं क्षेत्र के आदिवासी जनप्रतिनिधियों ने आदिवासियों के विस्थापन, रात्रि कर्प्यू क्षेत्र के मूलभूत सुविधाओं के मुद्दे पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है उन्होंने सरकार और प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि आदिवासी समाज सदियों से जंगलों का संरक्षक रहा है और उनके पुरखे हजारों साल से यहीं निवास करते आए हैं।
