छत्तीसगढ़ माटीपुत्र छत्तीसगढ़िया कथावाचक पंडित युवराज पांडेय को राजिम कुंभ कल्प मेला में समानजनक स्थान देने की उठी मांग
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- पंडित युवराज पाडेय छत्तीसगढ़ की परम्परा लोक संस्कृति और सनातन मुल्यो को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ की सनातन परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक राजिम कुंभ कल्प मेला के शुभारंभ से पूर्व गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखण्ड अमलीपदर क्षेत्र से एक महत्वपूर्ण और सार्थक मांग सामने आई है। स्थानीय समाजसेवियों और ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से आग्रह किया है कि राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कथावाचक पं. युवराज पांडेय को इस ऐतिहासिक आयोजन में उचित और विशिष्ट स्थान प्रदान किया जाए। हर वर्ष माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर भगवान राजीव लोचन एवं श्री कुलेश्वर महादेव की दिव्य त्रिवेणी संगम भूमि पर आयोजित यह कुंभ कल्प मेला आस्था, श्रद्धा और संस्कृति का महोत्सव बन जाता है। लाखों श्रद्धालु देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से यहां पहुंचकर स्नान, ध्यान, पूजा-पाठ, दान-पुण्य और संतों के सान्निध्य का लाभ लेते हैं।
इस वर्ष भी शासन-प्रशासन द्वारा भव्य और सुव्यवस्थित तैयारियां की गई हैं। विभिन्न विभागों के स्टॉल, साधु-संतों के लिए शिविर, अखाड़ों की व्यवस्था तथा संत-महात्माओं के लिए विशेष पंडाल लगाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित सत्ता एवं विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता भी मेले में शामिल होंगे।
- पंडित युवराज पाडेय छत्तीसगढ़ संस्कृति की पहचान
गरियाबंद जिले के मैनपुर, अमलीपदर,गोहरापदर, देवभोग, छुरा एवं जिले भर से अब मांग उठने लगी है कि छत्तीसगढ़ माटी पुत्र छत्तीगढ़िया कथावाचक पंडित युवराज पाडेय को राजिम कुंभ कल्प मेला मे सम्मानजनक स्थान दिया जाए समाजसेवी एवं क्षेत्रीय जनता ने शासन प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट करते हुए कहा कि गरियाबंद जिले की पावन धरती पर जन्मे पंडित युवराज पांडेय छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान हैं। उन्होंने न केवल प्रदेश में बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में कथा-वाचन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की परंपरा, लोक-संस्कृति और सनातन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाया है। श्रवण कुमार सतपथी ने कहा कि पं. युवराज पांडेय की कथाओं में समरसता, नैतिकता और युवा पीढ़ी को सही दिशा देने का संदेश स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उनकी सरल जीवनशैली और प्रभावशाली वाणी ने छत्तीसगढ़ का मान-सम्मान राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया है। ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों का मानना है कि ऐसे विभूति को राजिम कुंभ कल्प मेला जैसे विराट धार्मिक आयोजन में विशेष मंच और सम्मान मिलना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी को भी अपनी माटी के गौरवशाली व्यक्तित्वों से प्रेरणा मिल सके। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस जनभावना को कितना गंभीरता से लेता है और क्या छत्तीसगढ़ माटी के इस सपूत को राजिम कुंभ कल्प मेले में वह स्थान मिल पाता है, जिसके वे वास्तव में अधिकारी हैं।
