विकास के दावे खोखले – ग्राम डूमरघाट सड़क नहीं, मरीजों को कांवर में लादकर मीलो पैदल चल अस्पताल तक लाना पड़ता है
- डुमरघाट में नहीं है बिजली, स्वास्थ्य की सुविधाएं, अधुरे स्कूल भवन
- सांसद और विधायक और मैनपुर ब्लाॅक मुख्यालय के अधिकारी भी पिछले 10 वर्षो में नहीं पहुंचे
- गरियाबंद कलेक्टर से ग्रामीणों ने लगाई फरियाद, अब तो सुनो हमारी पुकार
- शेख हसन खान, गरियाबंद
गरियाबंद। गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों के गांवों में आजादी के 79 वर्षो बाद भी आदिवासी ग्रामीण मूलभूत बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।यहां सरकार के विकास के दावे खोखले नजर आते हैं। गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क तो दूर कच्ची मिट्टी वाला सड़क भी नहीं बन पाया है और अभी भी बीमार या गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए ग्रामीण उल्टे खाट या फिर कांवर में लादकर मीलो पैदल दूरी तय कर मैनपुर अस्पताल तक लाने मजबूर हो रहे हैं। यहां सरकार के अन्य जनकल्याणकारी योजनाएं कैसे पहुंचती होगी इसकी कल्पना किया जा सकता है। तहसील मुख्यालय मैनपुर से महज 12 किमी दूर ग्राम डुमरघाट की यह स्थिति बनी हुई है।

ग्राम पंचायत बोईरगांव के आश्रित ग्राम डुमरघाट की जनसंख्या लगभग 210 के आसपास है यहां विशेष पिछड़ी कमार जनजाति के साथ आदिवासी एवं यादव समाज के लोग निवास करते हैं। बरदुला ग्राम से 07 किमी घने दुर्गम पहाड़ी जंगली रास्ता को पारकर इस गांव में पहुंचा जाता है सड़क नाम की कोई चीज नहीं है। सिर्फ सड़क मरम्मत के नाम पर पिछले 5-6 वर्षो में लाखों रूपये मनरेंगा व अन्य योजना से निकालकर हजम किया जा चुका है। मौके पर सड़क गायब है यहां मोटर साइकिल तो दूर पैदल चलना किसी खतरे से कम नही है पैर फिसलते ही 20 से 25 फीट गहरे गड्ढे में गिरने की संभावना बनी रहती है। पूरी सात किलोमीटर सड़क गड्ढों में तब्दील हो गया है। प्रधानमंत्री सड़क निर्माण के लिए चार बार सर्वे किया जा चुका है लेकिन अब तक निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
- मरीज एवं गर्भवती महिलाओं को कांवर में लादकर पैदल अस्पताल तक लाना पड़ता है
ग्राम डुमरघाट तक सड़क नहीं होने के कारण बड़े -बड़े गड्ढे हो गये है जिसे ग्रामीण व शिक्षक अपने स्वयं के खर्च से कुछ स्थानों पर मरम्मत कर रहे हैं ताकि मोटर साइकिल निकल सके। इस गांव में स्वास्थ्य सुविधा की कोई व्यवस्था नहीं है। इन दिनों सर्दी खांसी बुखार का प्रकोप है। ग्राम के 80 वर्षीय बुजुर्ग अमरसिंह, पलटन कमार, भक्तिराम, दसरूराम, कुशल, बनसिंह, नकुलराम, जयराम, गिरधारी, गुमान, खोगेश्वर, मानसिंह, बुटकुलराम, यशोदा बाई, मकरध्वज, रामेश्वर पटेल, गोपीचंद, नंदलाल व अन्य ग्रामीणों ने बताया गांव में अत्यधिक तबीयत खराब होने या गर्भवती महिला को बरदुला उपस्वास्थ्य केन्द्र तक पैदल कांवर में बिठाकर ले जाते है और वहां से मैनपुर तब इलाज होता है।

- ठेकेदार स्कूल भवन निर्माण छोड़कर भागा
गांव में प्राथमिक और मिडिल स्कूल है जिसकी दर्ज संख्या 21 है। तीन शिक्षक बच्चों को शिक्षा देने प्रतिदिन पहुंचते है लेकिन प्राथमिक शाला भवन बेहद जर्जर हो गया है। नया स्कूल भवन लाखों रूपये का स्वीकृत हुआ कौन निर्माण करवा रहा है। इसकी जानकारी तक ग्रामीणों को नहीं है और तो और निर्माण एजेंसी कार्य काॅलम छड़ निकालकर पिछले एक वर्ष से अधुरा छोड़ दिया है। आठवी के बाद रास्ता नही होने के कारण अधिकांश बच्चे अपनी पढ़ाई छोड़ देते है।
- गांव के नजदीक से बिजली की मुख्य लाइन गुजरी है लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री के घोषणा के बाद भी गांव में अंधेरा
ग्राम डुमरघाट के नजदीक से देवभोग की तरफ मुख्य बिजली लाइन तार गुजरी है लेकिन इस गांव में आज तक बिजली की रौशनी नही पहुंची जबकि पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ रमनसिंह ने 12 वर्ष पहले डुमरघाट में बिजली लगाने की घोषणा किया था। सौर ऊर्जा सिस्टम यहां फ्लाप साबित हो रही है। ग्रामीणों को राशन चांवल दाल के साथ ही बुजुर्गो को वृद्ध पेंशन एवं माताओं को महतारी वंदन की राशि के लिए मीलो पैदल दूरी तय कर मैनपुर आना पड़ता है।
- गांव में नहीं पहुंचे ब्लाॅक मुख्यालय के अफसर, कलेक्टर से लगाई गुहार
ग्राम डुमरघाट के ग्रामीणों ने बताया इस गांव में सांसद विधायक की बात छोड़ दीजिए मैनपुर ब्लाॅक मुख्यालय के सीईओ, बीईओ और डाॅक्टर तक नही आते और तो और अधिकांश ग्रामीणों को सांसद विधायक का नाम भी नही मालूम। लेकिन यहां के ग्रामीणों ने गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उइके से फरियाद लगाया है कि इस गांव की मुख्य समस्या सड़क और बिजली को पूरा किया जाये इसके लिए ग्रामीण आने वाले दिनो में गरियाबंद पहुंचकर कलेक्टर से मुलाकात करने की बात कहते है।
- आंगनबाड़ी भवन अधुरा, शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्यवाही, पंचायत द्वारा कोई कार्य नहीं
यहां के ग्रामीणों में भारी नराजगी बातचीत में पता चलता है कि ग्रामीण बेहद दुखी नजर आ रहे हैं क्योंकि उनके फरियाद को सूनने वाला कोई नहीं है। गांव में एक आंगनबाड़ी भवन का निर्माण किया गया है लेकिन संबंधित निर्माण एजेंसी ने न तो शौचालय निर्माण किया और न ही दरवाजा लगाया और तो और कीचन में फ्लोरिंग भी नहीं किया। ग्राम पंचायत के द्वारा गांव में सीसी रोड़ या रंगमंच कोई निर्माण कार्य नहीं किया गया है। ग्रामीणों ने बताया सरपंच और सचिव भी इस गांव तक नहीं पहुंचते। शिकायत करने के बाद भी कुछ नहीं होता। गांव में प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ है लेकिन सड़क खराब होने के कारण सामाग्री नहीं पहुंच पा रही है।
- क्या कहते हैं जनपद सदस्य
जनपद सदस्य सुकचंद ध्रुव ने बताया ग्राम डुमरघाट मूलभूत बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। सड़क नहीं है। पुल पुलिया और तो और स्वास्थ्य की कोई सुविधा नहीं है। मरीजों को कांवर में अस्पताल तक लाना पड़़ता है। श्री ध्रुव ने कहा यहां के ग्रामीणों को गरियाबंद कलेक्टर से मुलाकात करवा कर समस्या का समाधान करने की मांग करेंगे।
