शासकीय आश्रम में बीमार छात्र के इलाज में लापरवाही, आदिवासी बच्चे की मौत से मचा हड़कंप
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- आश्रम अधीक्षक पर लापरवाही का आरोप मामले की जांच की मांग को लेकर भड़के क्षेत्र के जनप्रतिनिधि
- शासकीय आदिवासी बालक आश्रम बड़ेगोबरा का मामला, माता पिता का एकलौता संतान की मौत से परिवार सदमे में
गरियाबंद । शासकीय आदिवासी बालक आश्रम बड़े गोबरा के नाम से संचालित भाठीगढ़ के आश्रम में एक आदिवासी बच्चे के बीमार पड़ने पर आश्रम प्रबंधन द्वारा इलाज में लापरवाही बरतने और देरी के कारण छात्र की मौत हो गई। यह खबर लगते ही जहां संबंधित विभाग के अफसरों में हड़कंप मच गई है, वही दूसरी ओर माता पिता के एक मात्र संतान के मौत से परिवार सदमे में है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने आदिवासी छात्र के मौत पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग किया है और आरोप लगाया गया है कि आश्रम अधीक्षक एवं संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा मामले को दबाने के लिए कागजी घोड़ा दौड़ाना प्रारंभ कर दिया गया है। परिजनों को किसी प्रकार के बयान नहीं देने का दबाव बनाए जाने की सनसनीखेज मामले सामने आए हैं। बहरहाल एक गरीब आदिवासी अपने बच्चे के सुनहरे भविष्य को लेकर उन्हे पढ़ाने आवासीय आदिवासी बालक आश्रम भेजा गया था ताकि उसका बच्चा पढ़ लिखकर मा-बाप का सहारा बन पाए लेकिन एक आदिवासी छात्र बदहाल सिस्टम की भेंट चढ़ गए जो अब कभी अपने घर नहीं लौट पायेगा।

मिली जानकारी के अनुसार ग्राम भाठीगढ़ में शासकीय आदिवासी बालक आश्रम बड़ेगोबरा का संचालन किया जा रहा है इस आश्रम में ग्राम गजकन्हार विकासखण्ड नगरी निवासी छात्र राघव कुमार जाति गोड़ ने 26 जून 2023-24 में कक्षा छटवीं में प्रवेश लिया था और इस सत्र में वह कक्षा सातवी का छात्र था छात्र राघव कुमार मंडावी बच्चों में होनहार थे और अपने माता पिता का एक मात्र संतान था उसके नाना मैनपुर से 8 कि.मी. दूर ग्राम पथर्री में निवास करता है जिसके कारण उन्होने अपने पौत्र को भाठीगढ़ स्थित आदिवासी बालक आश्रम में निवास कर पढ़ाई के लिए प्रवेश दिलवाया था। छात्र राघव मंडावी पिछले 20 जनवरी से आश्रम के साथियों और वहां के कर्मचारियों को अपना तबियत खराब होने की जानकारी देते हुए उनके माता पिता से मोबाईल में बात कराने की गुहार लगाते रहा लेकिन आश्रम के कर्मचारियों ने छात्र की बातो को अनसुना कर दिया। 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के दिन छात्र के पिता फिरतु राम मंडावी अपने बच्चे को देखने आश्रम पहुंचा तो उनके होश उड़ गए उन्होने अपने पुत्र राघव को बेहद कमजोर के साथ ही आश्रम के बिस्तर में सोया पाया पिता द्वारा हाल-चाल पुछाने पर बेटा ने सबके सामने अपने पिता को बताया पिछले कई दिनों से वह बीमार है। यहां अधीक्षक के साथ कर्मचारियों को फोन लगाकर घर में सूचना देने कई बार बोल चुका हूॅ लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। बीमार बेटा को देखकर पिता ने तत्काल छुट्टी के लिए आवेदन देकर अपने बच्चे को इलाज के लिए 26 जनवरी के दोपहर अपने घर ले गया और घर में इलाज कराने के बाद सुधार नहीं होने पर धमतरी बठेना अस्पताल ले गया जहां छात्र राघव मंडावी की आज शुक्रवार सुबह 4 बजे मौत हो गई ।
- पिता ने रो रोकर बताया
छात्र के पिता फिरतु राम मंडावी ने बताया कि उनका एक मात्र बेटा जिसे उन्होंने पढ़ने के लिए आदिवासी आश्रम में भेजा था। बच्चे के बीमार होने के बाद आश्रम अधीक्षक व कर्मचारियों द्वारा उनका इलाज नहीं करवाया गया। मैं 26 जनवरी को बच्चे को बीमार हालत में अपने घर ले गया और घर में इलाज कराने के बाद धमतरी तक ले गया लेकिन उनका बेटा नहीं बच पाया और उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि समय में अधीक्षक द्वारा यदि इलाज कराया जाता तो आज उसका बच्चा जिन्दा होता।
- जनपद सदस्य सुकचंद ध्रुव ने कहा- दोषियों पर तत्काल कार्यवाही हो नहीं तो आन्दोलन करेंगे
क्षेत्र के आदिवासी नेता एवं जनपद सदस्य सुकचंद धुव्र ने आरोप लगाते हुए बताया कि आश्रम प्रबंधन एवं अधीक्षक के लापरवाही के चलते कक्षा सातवीं के आदिवासी छात्र राघव की मौत हो गई। श्री ध्रुव ने बताया राघव के तबीयत खराब होने पर मैं स्वयं उनके परिवार के साथ इलाज कराने धमतरी ले गया था लेकिन आज शुक्रवार को राघव की मौत हो गई। श्री ध्रुव ने कहा कि इस मामले की निष्पक्षता से जांच किया जाए और दोषियों पर कड़ी कार्यवाही किया जाय अन्यथा आन्दोलन करने बाध्य होंगे।
आश्रम अधीक्षक में सफाई देते हुए कहा कि 17 जनवरी को चिरायु दल ने किया था बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण -आदिवासी बालक आश्रम के अधीक्षक राकेश साहू ने बताया कि 17 जनवरी को चिरायु दल की टीम सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया था तब छात्र की तबीयत ठीक था। उन्होंने आगे बताया कि उसके पिता 26 जनवरी को इलाज कराने अपने घर ले गये थे।
- क्या कहते हैं सहायक आयुक्त
आदिवासी सहायक आयुक्त गरियाबंद लोकेश्वर पटेल ने बताया कि इस मामले की जानकारी आज ही मुझे मिली है। पूरा मामले को जानने के बाद ही कुछ बता पाउंगा।
- छात्र की मौत से बदहाल सिस्टम पर फिर उठा सवाल
आदिवासी बालक आश्रम में एक आदिवासी छात्र की मौत ने फिर एक बार बदहाल सिस्टम की पोल खोलकर कर रख दिया है लेकिन इसके बाद क्या शासन प्रशासन जागेगी और व्यवस्था में सुधार किया जायेगा या फिर हर बार की तरह अपने नाकामियों को छुपाने के लिए तरह तरह के कागजी घोड़े दौड़ाए जायेंगे। आज यह मामला के सामने आते ही जहां एक ओर मामले को दबाने के लिए आश्रम प्रबंधन द्वारा पूरा जोर लगा दिया गया है। मृतक के परिजनो तक दबाव बनाया जा रहा है कि दूसरे जिले के बच्चे को हम यहां पढ़ाई करवा रहे थे कह कर दबाव बनाने की कोशिश किया जा रहा था जो जांच का विषय है। वहीं पता चला है कि आश्रम अधीक्षक किसी बड़े कांग्रेस नेता के अपने आप को खास बताया जाता है जिससे क्या यह मामला दब जायेगा। बहरहाल मामले की जांच और आगे की क्या कार्रवाई होगी। इस पर क्षेत्रवासियों की नजर बनी हुई है।
