बिजली की मांग को लेकर राजापड़ाव गौरगाव क्षेत्र के 10 हजार ग्रामीण नेशनल हाईवे 130 – C में कर दिए चक्काजाम
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- राशन – कपड़ा लेकर पहुंचे ग्रामीणों ने कहा- जब तक समस्या का समाधान नहीं तब तक आंदोलन जारी रहेगा
गरियाबंद। गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखंड मैनपुर के राजापड़ाव गौरगांव क्षेत्र के लगभग 10000 ग्रामीण सुबह 7:00 बजे से नेशनल हाईवे 130 सी मैनपुर देवभोग गरियाबंद नेशनल हाईवे मार्ग में बैठकर चक्काजाम कर दिए हैं जिसके चलते सड़क के दोनों तरफ दस किलोमीटर तक वाहनों की लंबी काफिला लग गई है। ओड़ीसा से लेकर रायपुर तक के यात्री परेशान हो रहे हैं।

दूसरी ओर चक्काजाम कर रहे ग्रामीणों का कहना है जब तक उनकी मांग पूरा नहीं होगा तब तक वह सड़क से नहीं हटेंगे राशन पानी लेकर चक्काजाम के लिए बैठे ग्रामीण लगातार शासन प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। स्थानीय अफसर एसडीएम एवं एसडीओपी तथा बिजली विभाग के अधिकारियों ने आंदोलन कर रहे ग्रामीणों को समझने की कोशिश किया लेकिन इसका ग्रामीण पर कोई असर नहीं पड़ा ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
78 साल बाद भी अंधेरे में आदिवासी गांव, NH-130 पर आर-पार की लड़ाई
बिजली नहीं तो सड़क नहीं: राजापड़ाव में हजारों ग्रामीणों ने शुरू किया अनिश्चितकालीन चक्काजाम
गरियाबंद। जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत राजापड़ाव क्षेत्र की पाँच ग्राम पंचायतों भूतबेड़ा, कुचेंगा, कोकड़ी, गरहाडीह एवं गौरगांव के पराटोला एवं आश्रित ग्रामों में वर्षों से लंबित विद्युतिकरण कार्य को लेकर आदिवासी अंचल उबल पड़ा है। शासन-प्रशासन की उदासीनता के खिलाफ हजारों आदिवासी और ग्रामीणों ने NH-130, राजापड़ाव मुख्य मार्ग पर अनिश्चितकालीन चक्काजाम कर आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है
जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम और लोकेश्वरी नेताम के नेतृत्व में आयोजित इस चक्काजाम में हजारों की संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए। सुबह से ही सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। यात्रियों और मालवाहक वाहनों घंटों जाम में फंसे है।
इधर, आंदोलन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 78 वर्ष बाद भी हम लोग अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर हैं। बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। रोजगार के साधन, सिंचाई व्यवस्था और लघु उद्योग पूरी तरह ठप हैं। वहीं स्वास्थ्य, सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर भी गहरा असर पड़ रहा है।
मौके पर जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने सीधे शासन प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि करीब डेढ़ माह पूर्व विद्युतिकरण की मांग को लेकर शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया था। पाँच पंचायतों में जहां पहले से स्वीकृत विद्युतीकरण कार्य चल रहा था, उसे अचानक रोक दिया गया। मांग के बाद केवल आश्वासन दिए गए, लेकिन ज़मीन पर न के बराबर काम हुआ। अब भूमिगत विद्युत लाइन विस्तार का बहाना बनाकर ग्रामीणों को गुमराह किया जा रहा है। इसी उपेक्षा से क्षुब्ध होकर ग्रामीणों ने एक सूत्रीय मांग तत्काल विद्युतिकरण को लेकर आंदोलन शुरू किया है। उन्होंने साफ कहा कि यह आंदोलन इस बार आर-पार का है। लोग राशन-पानी लेकर सड़कों पर उतरे हैं और मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
वहीं आंदोलन की अगुवाई कर रहीं जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम ने कहा कि बिजली की मांग को लेकर राजापड़ाव क्षेत्र के हजारों ग्रामीण सड़कों पर उतर चुके हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसी कई गंभीर समस्याएं हैं, लेकिन सभी को दरकिनार कर ग्रामीण केवल एक ही मांग विद्युतीकरण को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। जब तक कार्य प्रारंभ नहीं होगा, तब तक आंदोलन थमेगा नहीं। यह भी उन्होंने दोहराया कि यह इस बार आर-पार की लड़ाई है।
इधर, चक्काजाम की सूचना मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंचकर बातचीत का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक आंदोलनकारी ठोस कार्रवाई और लिखित आश्वासन से कम पर मानने को तैयार नहीं हैं।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे क्षेत्र के वरिष्ठ आदिवासी नेता जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम, लोकेश्वरी नेताम पूरन मेश्राम, एवं क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने बताया जब तक समस्या का समाधान नहीं होगा चक्काजाम जारी रहेगा। पिछले 6 घंटे से भी ज्यादा समय हो गया है चक्काजाम जारी है।
