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January 23, 2026

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विश्व प्रसिद्ध हीरा खदान पायलीखण्ड, बेहराडीह की सुरक्षा में एक चौकीदार नहीं है तैनात

  • शेख हसन खान, गरियाबंद 
  • गरियाबंद जिले के लोगों को सरकारी तौर से उत्खनन का इंतिजार
  • राज्य निर्माण के 25 वर्षो बाद भी हीरा खदान मामले पर नहीं हो पाया कोई ठोस पहल, मामला कोर्ट के अधीन
  • नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण पुलिस और वन विभाग भी नहीं है सुरक्षा में तैनात

गरियाबंद । छत्तीसगढ़ प्रदेश के गरियाबंद जिला अंतर्गत विकासखंड मैनपुर के पायलीखंड एवं बेहराडीह के हीरा (डायमंड) खदानों का पता प्रशासन को लगभग 36-37 वर्ष पूर्व छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पहले अविभाजित मध्यप्रदेश राज्य के जमाने में लगा था तब से लेकर आज तक इलाके मे हीरा तस्करी का लम्बे समय से व्यापार चल रहा है। तब हीरा खदानों के मामले को संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश के तत्कालिन मुख्यमंत्री दिग्वीजय सिंह के निर्देश पर पायलीखण्ड एवं बेहराडीह जंगल पर हीरा मिलने वाले एक निश्चित बड़े हिस्से को तार के बाड़ो से घेर कर सुरक्षित किए किया गया था। पायलीखंड के हीरा खदानों की सुरक्षा के लिए बी.एस.एफ की कंपनी तैनात किया गया था और खनिज विभाग ने बकायदा चौकीदार नियुक्त किया था मगर इसकी सुरक्षा पिछले कुछ वर्षो से भगवान भरोसे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार क्षेत्र में वर्ष 2006-07 मे नक्सलियो के दबाव बढने के बीच जहां पायलीखंड हीरा खदान से बी.एस.एफ. कंपनियो को खदान की सुरक्षा से वापिस बुला लिया गया तो वही बेहराडीह हीरा खदान की सुरक्षा से वन विभाग ने हाथ खड़ा कर दिया तब से लेकर आज तक हीरा खदान की सुरक्षा पूरी तरह से भगवान के भरोसे है। यहां उड़ीसा, महाराष्ट्र, आंध्र सीमावर्ती राजस्थान राज्य के व्यापारियो द्वारा आकर इस क्षेत्र से हीरा तस्करी कर ले जाने की खबर समय -समय पर आती रहती है। इसकी पुष्टि स्वयं विभाग कर रही है। पिछले 16-17 वर्षो में गरियाबंद जिले के पुलिस ने क्षेत्र से हीरा की अवैध तस्करी के सैकड़ों मामले दर्ज किये है करोड़ों की हीरा के साथ तस्करों को पकड़ने में पुलिस ने सफलता प्राप्त किया है।

  • हीरा खदान से सुरक्षा हटने के बाद से लगातार अवैध उत्खनन के चलते चारों तरफ सिर्फ गड्ढे ही गड्ढे

बताया जाता है कि तहसील मुख्यालय मैनपुर से लगभग 42 किमी दूर विश्व के प्रसिध्द हीरा खदान पायलीखण्ड एवं मैनपुर से 8 किमी दूर बेहराडीह हीरा खदान का मामला न्यायालय मे होने के कारण छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्षो बाद भी सरकारी दोहन शुरू नहीं हो पाया है। समय समय पर इन हीरा खदानो मे अवैध खुदाई की खबर निकलकर सामने आती है। खासकर बारिश के दिनो मे इन दोनो हीरा खदानो मे नदी नालों में बाढ़ का फायदा उठाकर ओड़िसा महाराष्ट्र और राजस्थान के तस्करो द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन को अंजाम दिया जाता है जिसका प्रमाण हीरा खदान क्षेत्र मे देखा जा सकता है। हीरा खदान क्षेत्रो में तस्वीरों द्वारा पूर्व में इस बेदर्दी के साथ अवैध खुदाई किया गया है कि जगह जगह 10 से 20 फीट गहरे कुएं जैसे सैकड़ों गड्डे हो गये है और तो और हीरा खदान की सुरक्षा के लिए निर्माण किये गये वर्षो पूर्व चैकीयों को भी हीरा के तलबगारो ने चारो तरफ से खोद डाला है।

  • आस्टेलिया के वैज्ञानिकों ने एक दर्जन किम्बर लाईट पाईप होने की किया था पुष्टि

ढाई दशक पूर्व आस्ट्रेलिया से पहुंचे वैज्ञानिकों ने इन हीरा खदानों में एक दर्जन से ज्यादा किम्बर लाईट पाईप होने की बात सर्वेक्षण के बाद बताई गई थी। वैज्ञानिकों के अनुसार किम्बर लाईट पाईप कई किमी लंबी होती है और इन पाईप में हीरा चिपका होता है आस्ट्रेलिया के बाद सबसे ज्यादा बहुमुल्य किमती रत्न होने का दावा पायलीखण्ड और बेहराडीह हीरा खदान में किया गया था।

  • हीरा खदानों में लगाये सुरक्षा तार के बाड़े और लोहे के गेट तक गायब

बेहराडीह एवं पायलीखण्ड हीरा खदान क्षेत्र में एक बड़े भू-भाग को जहां हीरा खदान के रूप में चिन्हाकिंत है। उन स्थानों को बड़े -बड़े लोहे के हजारों एंगल लगाकर लगभग दोनों खदानों में 20 से 25 हेक्टेयर जमीन को चारो तरफ से घेरा गया था। सामने लोहे गेट लगाये गये थे पर अवैध तस्करी करने वालो ने लोहे के पूरे एंगल के साथ गेट को भी उखाड़कर ले गये हैं और खदान क्षेत्र में सिर्फ गड्ढे ही नजर आते हैं।

  • मैनपुर क्षेत्रवासी भी सरकारी दोहन के इंतिजार में

मैनपुर क्षेत्र के पायलीखण्ड बेहराडीह इस धरती के नीचे अपार खनिज संपदा भरा पड़ा है लेकिन इसके ऊपर निवास करने वाले लोग आज भी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों सहित ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से मांग किया है कि राज्य सरकार हीरा खदान मामले में कोई ठोस निर्णय लेते हुए इसका सरकारी रूप से दोहन किया जाये। इससे मिलने वाले आय से जहां गरियाबंद जिले के मैनपुर देवभोग क्षेत्र का विकास होगा। इस क्षेत्र की तकदीर बदलेगी और हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा तो वहीं प्रदेश के विकास में भी इसका उपयोग होगा।

  • क्या कहते हैं एसडीओपी

मैनपुर एसडीओपी पुलिस विकास पाटले ने चर्चा में बताया कि पुलिस प्रशासन द्वारा समय -समय पर हीरा खदान क्षेत्रों का गस्त किया जा रहा है।