बाघ गणना 2026 – गरियाबंद वन मंडल के कर्मचारियों को मिली विशेष ट्रेंनिंग
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- बाघ गणना के लिए हुई वन विभाग की कार्यशाला, देहरादून से आए अधिकारी ने दी नवीन पद्धतियों की जानकारी
गरियाबंद। वन्यजीव संरक्षण के अंतर्गत बाघ गणना कार्य को प्रभावी ढंग से संपादित करने हेतु आज वनमंडल स्तर पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में वनमंडलाधिकारी श्री ससीगानंधन,उप वनमंडलाधिकारी मनोज चन्द्राकर,राकेश चौबे,विकास चन्द्राकर,सहायक संचालक यूएसटीआर जगदीश दर्राे,समस्त वन परिक्षेत्र अधिकारी सहित वनमंडल के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे इस अवसर पर भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून से पहुचे श्रीमती ऋतु प्रजापति द्वारा बाघ गणना की नवीनतम पद्धतियों, फील्ड डाटा संग्रहण, कैमरा ट्रैपिंग, ट्रैक एवं साइन सर्वे, एम -एसटीआर एप के उपयोग तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आंकड़ों के विश्लेषण संबंधी विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बाघों की पहचान, उनके आवास, संरक्षण की चुनौतियों तथा गणना प्रक्रिया में सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी गई। साथ ही, बाघ संरक्षण में वन विभाग की भूमिका एवं सामूहिक सहभागिता पर विशेष जोर दिया गया।

वनमंडलाधिकारी श्री ससीगानंधन द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि बाघ गणना एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व है, जिससे वन्यजीव संरक्षण की रणनीतियाँ सुदृढ़ होती हैं। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम फील्ड कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होते हैं। कार्यशाला का उद्देश्य बाघ गणना कार्य को पारदर्शी, सटीक एवं वैज्ञानिक तरीके से संपन्न करना रहा।
जंगल में जाकर दिया गया वन अमला को विस्तृत जानकारी-वन्यजीव संरक्षण के अंतर्गत बाघ गणना कार्य के लिए वन कर्मचारियों को प्रशिक्षण में आधुनिक तकनीक एफ के माध्यम से डेटा संग्रहण और मानिट्रिंग की पुख्ता करने की जानकारी दी गई साथ ही सैद्धांतिक चर्चा के पश्चात अधिकारियों और कर्मचारियों को फिल्ड मैदानी क्षेत्र में ले जाकर एफ का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया वन अफसरो ने प्रशिक्षण के दौरान स्पष्ट किया कि बाघ आंकलन के लिए डेटा की शुद्धता अत्यन्त महत्वपूर्ण है उन्होने कर्मचारियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा तकनीकी रूप से सक्षम होने से न केवल डेटा पारदर्शी होगा बल्कि वन जीवो के संरक्षण में भी मदद मिलेगी फिल्ड ट्रेंनिग के दौरान कर्मचारियों के शंकाओ का समाधान किया गया और योजनाबद्ध तरीके से कार्य को पूर्ण करने का निर्देश दिया गया।
इस अवसर पर भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून से पहुचे श्रीमती ऋतु प्रजापति द्वारा बाघ एवं अन्य वन्य प्राणियों के पदचिन्ह, मल, खरोच के निशान व अन्य प्राकृतिक संकेतो के आधार पर अंकलन करने के बारे में जानकारी दिया वही वैज्ञानिक पद्धति से भी अंकलना के आलावा शाकाहारी वन्य प्राणियों की गणना और उनके आवास क्षेत्र के मूल्यांकन के विधियों पर भी प्रकाश डाला ज्ञात हो कि अखिल भारतीय बाघ आंकलन के माध्यम से बाघो की संख्या उनके आवास एवं संरक्षण की स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाता है जिससे भविष्य की संरक्षण रणनीति तय की जाती है। उन्होने ने बताया बाघ संरक्षण वन्य जीव प्रबंधन एवं जैविक विविधता संरक्षण की दृष्टी से यह गणना अत्यन्त महत्वपूर्ण है इसके लिए सभी अधिकारी एवं कर्मचारी पूरी सतर्कता जिम्मेदारी एवं समर्पण के कार्य करें।
