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August 16, 2026

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अबतक नहीं टूटी प्रशासन की नींद, गरियाबंद के ग्राम रूवाड़ स्कूल के सामने 6 दिन से छात्रों के साथ पालकों का आंदोलन जारी

  • शेख हसन खान, गरियाबंद
  • बदहाल सिस्टम के खिलाफ बढ़ता आक्रोश स्कूल में जड़ा ताला, स्कूल के बाहर स्वतंत्रता दिवस पर किया गया ध्वजारोहण
  • शासन प्रशासन के खिलाफ बढ़ता गुस्सा शिक्षा विभाग के बड़े अफसर बेखबर

गरियाबंद। गरियाबंद जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र रसेला रूवाड़ में सैकड़ों छात्र छात्राओं एवं पालकों ने स्कूल भवन की मांग को लेकर जर्जर स्कूल भवन के सामने जहां एक ओर ताला लगा दिये है, वहीं दूसरी ओर 11 अगस्त से लगातार शासन प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर अपने मांग मंगवाने लगे हुए हैं। लेकिन शिक्षा विभाग के जिला स्तर के अफसर बेखबर बने हुए हैं। शायद उन्हे कोई बड़ा आंदोलन का इंतजार है। बदहाल सिस्टम के चलते गांव के छात्र छात्राएं पढाई लिखाई को छोड़कर मजबूरन स्कूल भवन जैसे महत्वपूर्ण मांगो को लेकर आंदोलन करने को विवश हो रहे है और तो और आजादी के 80 वर्ष 15 अगस्त को स्कूल के सामने छात्र छात्राओं व पालको ने ध्वजारोहण कर आजादी का त्यौहार मनाया साथ ही अपना धरना प्रदर्शन आंदोलन जारी रखा है।

ग्राम के वरिष्ठ नागरिक यशवंत सोरी, कृष्ण कुमार ठाकुर (ग्राम पटेल), उदेराम नेताम, अलाल सिंह नागेश, ललितराम नेताम, दयाराम नागेश, गंगाराम नेताम, बलदेव सिंह, दाऊलाल, विजयकृष्ण नागेश, महेश सोरी, हरिसिंह दीवान, दयालु राम दीवान, मोहन सिंह, प्रेम कुमार, दिलेश नेताम, दशरथ नेताम, रोहित नेताम, तुलसराम, लादाबाहरा से हीरालाल, परसराम, बिसाहू राम, केरगांव से हीरा राम, खगेश मरकाम, भगतराम ने बताया सरकार द्वारा यहां मिडिल स्कूल का जो निर्माण किया गया है।

वह बेहद जर्जर हो गया है और इसी जर्जर स्कूल मे मिडिल स्कूल में हाई एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल संचालित हो रहा है। पालकों और ग्रामीणों के द्वारा चंदा एकत्र कर दो लाख रूपए की लागत से एक टिन का शेड का निर्माण किया गया है। उस टिन शेड के नीचे बच्चे पढाई करने मजबूर हो रहे हैं। इस समस्या से छत्तीसगढ के शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव एवं गरियाबंद जिले के आला अफसरो को कई बार आवेदन किया गया लेकिन अबतक समस्या का समाधान नहीं किया गया है। बच्चों को पढाई करने के लिए जहां एक ओर जगह नही है वहीं उन्हे जो सुविधाएं मिलनी चाहिए नहीं मिल पा रही है। मजबूरन पढाई लिखाई छोड़कर बच्चे व पालक पिछले 6 दिनों से स्कूल के सामने गेट मे ताला जड़कर आंदोलन करने को मजबूर हो रहे हैं।

अफसरो के उदासीन रवैये से बढी नाराजगी – एक तरफ राज्य व केन्द्र सरकार द्वारा बेहतर शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की दावे करती नही थकी जा रही है आज शहरो के स्कूलों मे तमाम तरह की सुविधाएं और डिजिटल क्लास संचालित हो रहा है। ठीक इसके विपरित आदिवासी वनांचल क्षेत्र के ग्रामीण ईलाको के बच्चो को जहां एक ओर पढाई करने के लिए भवन कमरा नसीब नही हो पा रहा है।‌ वहीं शिक्षको की भारी कमी से पढाई प्रभावित हो रहा है नतीजन मजबूर होकर छात्र और पालक आंदोलन की राह पकड़ रहे हैं। ऐसे समय में चाहिए कि संबंधित विभाग के जिम्मेदार अफसर मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों और छात्रो की जायज मांगो को गंभीरता से सुने और उनके समाधान करने की दिशा में ठोस कदम उठाया जाये लेकिन जिले मे एक अलग ही तरह की शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया दिखाई दे रहा है जिसके कारण ग्रामीणों और छात्रो का आक्रोश बढता जा रहा है।

  • आदिवासी नेत्री लोकेश्वरी नेताम ने किया छात्रों के आदोलन का समर्थन

आदिवासी महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती लोकेश्वरी नेताम, आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष उमेंन्दी कोर्राम ने भी छात्रों के आंदोलन को जायज बताते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्र के बच्चों को शिक्षक और स्कूल भवन जैसे समस्याओं के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो हम स्वयं बच्चो के समर्थन में आंदोलन में शामिल होंगें।