बारिश के दिनों में खुले आसमान तले रखे गये सरस्वती योजना की सैकड़ों साइकिलों के कलपुर्जे खराब होने लगे
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- मैनपुर से 6 किमी दूर ग्राम देहारगुड़ा आश्रम परिषर के सामने खुले आसमान के नीचे रख दिये गये साइकिल के समान, जिम्मेदार बेखबर
गरियाबंद। स्कूली छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने और उनकी राह आसान बनाने के उद्देश्य से संचालित सरस्वती साइकिल योजना जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही की भेंट चढ़ती नज़र आ रही है। लाखों रुपये की लागत से बच्चों के लिए मंगवाई गई साइकिलों के कलपुर्जे और सामग्रियां खुले आसमान के नीचे फेंकी पड़ी हैं, जिसके चलते जारी बारिश में उनके पूरी तरह खराब होने का गंभीर अंदेशा पैदा हो गया है। गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर क्षेत्र के स्कूली बच्चो को सरस्वती साइकिल योजना के तहत साइकिल वितरण करने के लिए सैकड़ो साइकिल के कलपूर्जे ट्रक के माध्यम से लाकर मैनपुर से 06 किमी दूर ग्राम देहारगुड़ा स्थित आश्रम परिषर के सामने खुले आसमान के नीचे रख दिया गया है इन दिनो लगातार रूक रूककर बारिश हो रही है और बारिश के कारण सरस्वती साइकिल के कलपूर्जे खराब होने की संभावना बनी हुई है।

- क्या है पूरा मामला
शासन द्वारा छात्राओं और दूर-दराज से आने वाले विद्यार्थियों को बांटने के लिए भारी मात्रा में साइकिल की सामग्री मंगवाई गई है नियमतः इन सामग्रियों को सुरक्षित गोदाम या कवर्ड शेड में रखा जाना चाहिए था। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। खुले में पड़ा सामान साइकिलों के फ्रेम, रिम, टायर, चेन कवर और अन्य स्पेयर पार्ट्स बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के खुले मैदान में पटक दिए गए हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण लोहे के कलपुर्जों में जंग लगने की संभावना है। बिना इस्तेमाल के ही यह सामग्री खराब हो सकती है ऐसे में जब इन पुर्जों को जोड़कर बच्चों को दिया जाएगा, तो साइकिलों की मजबूती और सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा होगा। एक तरफ सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और छात्र-छात्राओं को सुविधा देने के लिए करोड़ों रुपये का बजट आवंटित करती है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन व संबंधित विभाग की यह सुस्ती सरकारी खजाने को सीधी चपत लगा रही है।
- स्थानीय लोगों का गुस्सा
गरीब और ग्रामीण इलाकों के बच्चे उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उन्हें साइकिल मिलेगी, जिससे वे स्कूल आ-जा सकेंगे। लेकिन अधिकारियों की इस बेपरवाही से लाखों रुपये की सामग्री पानी में खराब होने की संभावना बनी हुई है। अगर समय रहते इन्हें ढका या सुरक्षित जगह नहीं भेजा गया, तो बच्चों को जंग लगी और खटारा साइकिलें मिलेंगी। इन साइकिल के पूर्जो को आश्रम के भीतर सुरक्षित रखना चाहिए लेकिन इस ओर जिम्मेदारो द्वारा ध्यान नही दिया जा रहा है। इस लापरवाही से होने वाले वित्तीय नुकसान की भरपाई किस जिम्मेदार अधिकारी से की जाएगी। समय रहते यदि प्रशासन ने इस मामले का संज्ञान नहीं लिया, तो योजना का उद्देश्य तो अधूरा रहेगा ही, साथ ही जनता के टैक्स का पैसा भी यूं ही पानी में बह जाएगा। अब देखना यह होगा कि खबर सामने आने के बाद जिम्मेदार विभाग नींद से जागता है या सामग्री के पूरी तरह नष्ट होने का इंतजार करता है।
