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September 4, 2026

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शिक्षक दिवस पर विशेष -शिक्षा की अलख जगाते शिक्षक चित्रसेन पटेल 2 साल से नहीं ली एक भी छुट्टी

  • समय से पहले पहुंचकर बदल रहे बच्चों का भविष्य
  • शेख हसन खान, गरियाबंद 

गरियाबंद। राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका सर्वोपरि मानी जाती है, और इस बात को अक्षरशः सच कर दिखाया है गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक के समर्पित शिक्षक चित्रसेन पटेल ने। आज जहाँ लोग छोटी-छोटी बातों पर अवकाश ले लेते हैं, वहीं शिक्षक प्रधान पाठक चित्रसेन पटेल शिक्षा के क्षेत्र में कर्तव्यनिष्ठा की एक नई और अनूठी मिसाल कायम कर रहे हैं। बीते दो शिक्षण सत्रों से उन्होंने एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली है। उनकी इस अद्भुत कार्यशैली और समर्पण की पूरे क्षेत्र में जमकर तारीफ हो रही है शिक्षक चित्रसेन पटेल की दिनचर्या अन्य लोगों से काफी अलग है। वे प्रतिदिन निर्धारित समय से एक घंटा पहले ही विद्यालय पहुँच जाते हैं। स्कूल समय से पूर्व पहुँचकर वे न केवल पठन-पाठन की रूपरेखा तैयार करते हैं, बल्कि विद्यालयीन परिवेश को पठन-पाठन के अनुकूल बनाने में जुट जाते हैं। उनकी इस समयबद्धता का असर बच्चों पर भी दिख रहा है और छात्र भी समय से स्कूल पहुँचने लगे हैं और तो और उनकी निष्ठा केवल नियमित स्कूली घंटों तक सीमित नहीं है। वे कमजोर विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन अतिरिक्त कक्षाएं (एक्स्ट्रा क्लासेस) लेते हैं। सबसे खास बात यह है कि रविवार, शासकीय अवकाश या त्योहारों की छुट्टियों के दिनों में भी वे घर पर बैठने के बजाय बच्चों को परीक्षा की तैयारी कराते हैं। बोर्ड परीक्षाओं और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए वे विद्यार्थियों को विशेष मार्गदर्शन दे रहे हैं, ताकि ग्रामीण अंचल के बच्चे किसी भी क्षेत्र में पीछे न रहें। शिक्षक चित्रसेन पटेल के इस अभूतपूर्व प्रयास ने न केवल विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने का काम किया है, बल्कि पूरे समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है।

स्थानीय ग्रामीणों, अभिभावकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने उनकी इस निष्ठा की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। लोगों का कहना है कि यदि हर विद्यालय में चित्रसेन पटेल जैसे समर्पित शिक्षक हों, तो सरकारी स्कूलों की तस्वीर और बच्चों का भविष्य पूरी तरह बदल जाएगा। शिक्षा को व्यवसाय नहीं, बल्कि साधना मानने वाले चित्रसेन पटेल मैनपुर ही नहीं, बल्कि पूरे जिले के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।

शासकीय विद्यालय सुबह घंटी से पहले जाग जाती है-तहसील मुख्यालय मैनपुर से 5 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत देहारगुड़ा शासकीय विद्यालय की सुबह अक्सर घंटी से पहले ही जाग जाती है, क्योंकि वहाँ प्रधान पाठक चित्रसेन पटेल पहुँच चुके होते हैं। बीते दो शिक्षा सत्रों में उन्होंने जहां एक भी दिन अवकाश नहीं लिया। प्रतिदिन वे विद्यालय एक घंटा पूर्व आकर कक्षाओं की तैयारी, परिसर की व्यवस्था और बच्चों की प्रगति की समीक्षा करते हैं।

विद्यालय की साफ-सफाई और रखरखाव उनके लिए केवल दायित्व नहीं, बल्कि संस्कार है। दशहरा, दीपावली, शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन अवकाश के दिनों में भी वे विद्यालय से जुड़े रहते हैं। इन अवकाशों में वे अतिरिक्त कार्य और नई-नई शैक्षणिक गतिविधियाँ सीखने, शिक्षण सामग्री तैयार करने, नवाचार अपनाने और आगामी सत्र की योजना बनाने में समय देते हैं। रविवार छुट्टी के दिन भी वे दो घंटे विद्यालय आकर बच्चों को मार्गदर्शन देते हैं साथ ही शाला विकास कार्यों और शैक्षणिक तैयारियों में जुटे रहते हैं।

पढ़ाई में वे बच्चों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखते। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निरंतर मार्गदर्शन देते हैं और बच्चों में आत्मविश्वास जगाते हैं। इसी सतत प्रयास का परिणाम है कि पिछले पाँच वर्षों में 7 बच्चों का चयन विभिन्न प्रतियोगी के माध्यम से प्रयास आवासीय विद्यालय में हो चुका है।

संध्याकालीन पाठशाला (Best Practice)-ग्राम के प्रत्येक मोहल्ले में संध्याकालीन पाठशाला का संचालन पिछले 3 वर्षों से निरंतर क्रियान्वयन कमजोर एवं पिछड़े बच्चों को अतिरिक्त अध्ययन अवसर

  • शिक्षा में सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण

चित्रसेन पटेल मानते हैं कि शिक्षक का कार्य कक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि हर दिन सीखते रहना और बच्चों को आगे बढ़ाना ही सच्ची सेवा है। उनका यह समर्पण विद्यालय को प्रगति की राह पर ले जा रहा है और समाज को एक प्रेरणादायी उदाहरण दे रहा है।