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September 8, 2026

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छत्तीसगढ़ ज़कात फाउंडेशन ने रायपुर में 350 बच्चों को स्कॉलरशिप से नवाज़ा

  • छत्तीसगढ़ में करीब 1,000 विद्यार्थियों को दी जाएगी ₹52 लाख की छात्रवृत्ति, 68 शिक्षकों का सम्मान
  • 12 साल से ‘मिशन तालीम’ के जरिए शिक्षा, हुनर और रोज़गार की दिशा में काम कर रहा फाउंडेशन, अब तक 8,000 से अधिक छात्रवृत्तियां
  • शेख हसन खान, गरियाबंद 

रायपुर। छत्तीसगढ़ ज़कात फाउंडेशन, रायपुर द्वारा मिशन तालीम के अंतर्गत आयोजित 12वाँ एज़ाज़ी प्रोग्राम रविवार, 6 सितम्बर 2026 को शहीद स्मारक ऑडिटोरियम, जी.ई. रोड, रायपुर में आयोजित किया गया। बच्चों, शिक्षकों और पालकों से खचाखच भरे ऑडिटोरियम में रायपुर एवं आसपास के करीब 350 विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप प्रदान की गई, जबकि वर्ष 2026 में पूरे छत्तीसगढ़ के करीब 1,000 विद्यार्थियों को लगभग ₹52 लाख की छात्रवृत्ति दिए जाने की जानकारी दी गई। इस अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाएं देने वाले 68 शिक्षकों का भी सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में मेधावी विद्यार्थियों, नीट एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल बच्चों, खेल प्रतिभाओं, शैक्षणिक टॉपर्स तथा उर्दू-अरबी कैलीग्राफी और हीना आर्ट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। स्कॉलरशिप मिलने पर कई पालक भावुक नजर आए और उन्होंने नम आंखों से फाउंडेशन का शुक्रिया अदा करते हुए बच्चों के बेहतर मुस्तकबिल के लिए दुआएं दीं।कार्यक्रम का आग़ाज़ मौलाना हाफ़िज़ हबीबुर रहमान साहब की तिलावत-ए-क़ुरआन से हुआ। इसके बाद माहिर-ए-हुनर उर्दू क्लास के विद्यार्थियों ने नात-ए-पाक पेश की।

  • 12 साल में 8,000 से अधिक छात्रवृत्तियां

फाउंडेशन के कोर सदस्य इनामुल्लाह ने संस्था के 12 वर्षों के सफर और उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि “ज़कात सिर्फ रकम नहीं, बल्कि तालीम, रोज़गार और उम्मीद की नई रोशनी है।” उन्होंने बताया कि इन वर्षों में फाउंडेशन द्वारा 8,000 से अधिक छात्रवृत्तियां प्रदान की जा चुकी हैं।

फाउंडेशन की सहायता से पढ़ने वाले विद्यार्थियों में अब तक 16 एमबीबीएस डॉक्टर, एक बीडीएस डॉक्टर, करीब 160 इंजीनियर, 10 सीए-सीएमए प्रोफेशनल, 4 नर्सिंग ऑफिसर, 110 से अधिक नर्सिंग प्रोफेशनल, 160 से अधिक फार्मेसी विद्यार्थी, 110 से अधिक आईटीआई विद्यार्थी और करीब 800 ग्रेजुएट शामिल हैं।संस्थापक सदस्य सैय्यद अकील अहमद ने बताया कि वर्ष 2015 में करीब ₹9 लाख और 300 से अधिक विद्यार्थियों से शुरू हुआ छात्रवृत्ति का यह सफर लगातार बढ़ते हुए वर्ष 2026 में ₹52 लाख और करीब 1,000 विद्यार्थियों तक पहुंच गया है।

  • ज़कात लेने वाले अब ज़कात देने वाले बन रहे हैं

उन्होंने बताया कि फाउंडेशन की मदद से इंजीनियरिंग, मेडिकल, फार्मेसी, सीए, सीएमए सहित विभिन्न क्षेत्रों में पढ़े अनेक विद्यार्थी आज अच्छी नौकरियों और व्यवसाय में स्थापित हो चुके हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कभी फाउंडेशन की सहायता से अपनी पढ़ाई आगे बढ़ाने वाला एक विद्यार्थी आज प्रतिष्ठित एमएनसी में कार्यरत है और अपना महंगा घर खरीदने की तैयारी कर रहा है।

  • टैलेंट सर्च से मेडिकल कॉलेज तक

कार्यक्रम में उस होनहार विद्यार्थी का विशेष सम्मान किया गया जिसने फाउंडेशन के टैलेंट सर्च एग्जाम के माध्यम से निःशुल्क कोचिंग का अवसर प्राप्त किया, इस वर्ष नीट पास किया और शासकीय मेडिकल कॉलेज, महासमुंद में प्रवेश हासिल किया। वरिष्ठ शिक्षाविद् जनाब ज़फ़र अमजद साहब को शिक्षा, उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार और सामाजिक सेवाओं में दीर्घ योगदान के लिए “बीकन ऑफ इंस्पिरेशन – मशअल-ए-राह” सम्मान से नवाज़ा गया।

  • माहिर-ए-हुनर से रोज़गार की तैयारी

फाउंडेशन के माहिर-ए-हुनर कार्यक्रम के अंतर्गत उर्दू पढ़ना-लिखना, उर्दू एवं अरबी कैलीग्राफी, जेनरेटिव एआई, टैली, एमएस ऑफिस, कम्प्यूटर, फैशन डिजाइनिंग, मेहंदी-हीना आर्ट और स्पोकन इंग्लिश जैसे प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। संस्था के अनुसार अब तक 800 से अधिक युवाओं और महिलाओं को विभिन्न हुनर की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। कार्यक्रम को सफल बनाने में कई महीनों से सक्रिय 22 सदस्यीय छात्र वर्किंग ग्रुप को भी सम्मानित किया गया।

  • अतिथियों ने शिक्षा, ईमानदारी और अनुशासन का दिया संदेश

कार्यक्रम में अमरजीत सिंह छाबड़ा, चेयरमैन, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग; मिर्ज़ा एजाज़ बेग, चेयरमैन, छत्तीसगढ़ हज कमेटी; शम्मी नाहिद, सीईओ, छत्तीसगढ़ वक़्फ़ बोर्ड एवं सदस्य, अल्पसंख्यक आयोग तथा आकाश तिवारी, नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम रायपुर विशेष रूप से उपस्थित रहे।

आकाश तिवारी ने विद्यार्थियों से ईमानदारी को जीवन का आधार बनाने की अपील करते हुए कहा कि अच्छे काम का रास्ता कठिन जरूर होता है, लेकिन फाउंडेशन ने जरूरतमंद बच्चों के लिए आगे बढ़ने का रास्ता आसान किया है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना की।

शम्मी नाहिद ने अपने संघर्षों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को मेहनत से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने विशेष रूप से पालकों से बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि बेटियों की तालीम ही आने वाले बेहतर भविष्य की बुनियाद है।

मिर्ज़ा एजाज़ बेग ने कहा कि कुरआन का पहला संदेश “इक़रा” यानी “पढ़ो” है। उन्होंने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि पैसों की कमी को शिक्षा की राह में बाधा न बनने दें और पूरी लगन से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ें।

अमरजीत सिंह छाबड़ा ने मुस्लिम समाज की ज़कात की तुलना सिख समाज की दसवंध परंपरा से करते हुए कहा कि दोनों का मूल उद्देश्य जरूरतमंदों की सहायता और समाज का उत्थान है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ज़कात फाउंडेशन ज़कात का तालीम के लिए बेहतर उपयोग कर रहा है। सामाजिक सद्भाव का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि “चांद ईद में भी देखा जाता है और करवाचौथ में भी, इसलिए हमें समाजों के बीच फर्क से ज्यादा समानताओं को देखना चाहिए।” उन्होंने विद्यार्थियों की हर संभव मदद का भरोसा दिलाते हुए अल्पसंख्यक छात्रावास और अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी। कोर सदस्य इरफान बुखारी ने कहा कि जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता की मूल बुनियाद शिक्षा है। फैसल रिज़वी ने फाउंडेशन के कार्यक्रमों में अनुशासन की सराहना करते हुए ज़कात के व्यवस्थित और शिक्षा केंद्रित उपयोग को संस्था की बड़ी विशेषता बताया।

  1. शहर की अनेक प्रतिष्ठित शख्सियतें रहीं मौजूद

कार्यक्रम में अकरम सिद्दीकी, एस. एम. हाशिम, शकील अहमद, मोहम्मद नूर बशीर खान, आबिद खान, शकील रज़ा मुतवल्ली, अशफाक कुरैशी, इमरान नदीम, रफीक खान, गुलज़ेब अहमद, डॉ. शाहिद, डॉ. सितारा, नज़र हसन हुसैनी, सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी मोहम्मद शाहिद, मौलाना अजहर, मौलाना अली इमाम, मौलाना हबीबुर रहमान, अख्तर रज़ा और अब्दुल वहाब सहित शहर की अनेक सामाजिक, शैक्षणिक और प्रतिष्ठित शख्सियतें मौजूद रहीं।

  • तालीम के साथ समाज सेवा भी

फाउंडेशन ने बताया कि शिक्षा के साथ समाज सेवा के क्षेत्र में भी लगातार काम किया जा रहा है। अब तक जरूरतमंद बच्चों के लिए करीब 15,000 स्टेशनरी किट, कोविड के दौरान 3,000 से अधिक राशन किट वितरित की गईं। जरूरतमंद मरीजों के लिए 25 से अधिक ऑक्सीजन मशीनों की सेवा, राहगीरों के लिए पानी की व्यवस्था और वृक्षारोपण जैसे अभियान भी चलाए गए।

इसके अलावा पिछले करीब 11 वर्षों से “जॉब्स यू लाइक” के माध्यम से युवाओं तक रोज़गार के अवसरों की जानकारी पहुंचाई जा रही है। हमारी मंजिल सिर्फ स्कॉलरशिप देना नहीं, बल्कि ऐसी नस्ल तैयार करना है जो तालीमयाफ्ता, हुनरमंद और खुद्दार हो तथा कल किसी दूसरे जरूरतमंद का सहारा बन सके।