सालों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते थके ग्रामीणों ने अपने खर्च से सड़क का निर्माण कर मिशाल पेश किया
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- बारिश में मरीजों को अस्पताल तक ले जाने तथा बच्चों को स्कूल जाने में होती थी परेशानी
गरियाबंद । खेतों के बीच वर्षो से बसे आदिवासी परिवार के ग्रामीण सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्राम पंचायत से लेकर जनपद, जिला और कलेक्टर तक आवेदन देकर थक चुके। सालों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बाद भी सड़क नहीं बनने पर ग्रामीणों ने अपने स्वयं के लाखों रूपये खर्च कर लगभग 1 किमी सड़क निर्माण किया है जो क्षेत्र में एक बेहतर मिशाल पेश किया है।

साथ ही शासन प्रशासन की नाकामी को उजागर कर रही है। तहसील मुख्यालय मैनपुर से महज 3 किमी दूर ग्राम पंचायत देहारगुड़ा के पारा बेलकोना जो खेतों के बीच बसा हुआ है और यहां तीन परिवार के लोग निवास करते हैं। बारिश में चारों तरफ खेतों में फसल लगने से यहां के छोटे -छोटे बच्चों को स्कूल आंगनबाड़ी जाने मे भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही बीमार होने की स्थिति में मरीज को अस्पताल तक लाने के लिए उठाकर लाना पड़ता है। इन समस्याओं को देखते हुए इस पारा में निवास करने वाले ग्रामीणों ने कई बार रोजगार गारंटी योजना के तहत सड़क निर्माण की मांग किया लेकिन हर बार उन्हे आश्वासन ही दिया गया।
पिछले वर्ष सुशासन तिहार मे आवेदन देने पर एक सप्ताह मे सड़क निर्माण की बात कही गई थी लेकिन कलेक्टर बदलने के बाद ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान की दिशा में स्थानीय अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। इस वर्ष बारिश के मौसम को देखते हुए यहां के ग्रामीणों ने अपने स्वयं के खर्च लगभग ढाई तीन लाख रूपये खर्च कर 6 फीट चौड़ा और लगभग 900 मीटर लंबा सड़क का निर्माण किया है और उसके उपर मुरूम भी डाल रहे है ताकि आने जाने में परेशानी न हो। ग्रामीण लुजेश कुमार, सालिकराम, गाड़ाराय, ओहनसिंह एवं ग्रामीणों ने बताया कि गांव तक सड़क निर्माण के लिए कई बार आवेदन निवेदन कर थक चुके कोई ध्यान नहीं दिया। मजबूरन हम ग्रामीणों ने अपने स्वयं के खर्च से सड़क का निर्माण किया है।
