विस्थापन के दबाव के खिलाफ 36 परिवारों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- पुरखों की जमीन, जल-जंगल-जमीन और गांव छोड़कर नहीं जाएंगे, गांव में ही मूलभूत सुविधाएं चाहिए- संजय नेताम
गरियाबंद । ग्राम देवझरअमली में प्रस्तावित विस्थापन को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। शुक्रवार को देवझरअमली के 36 परिवारों एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने पुरखों की भूमि, गांव, जल-जंगल-जमीन, देवी-देवताओं एवं सांस्कृतिक विरासत को छोड़कर कहीं अन्यत्र विस्थापित होकर नहीं जाना चाहते।

ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम, लोकेश्वरी नेताम तथा उदंती फेडरेशन के ग्राम सभा अध्यक्ष अर्जुन नायक सहित देवझरअमली के बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
- कलेक्टर ने गंभीरता से सुनी ग्रामीणों की बात
ग्रामीणों ने विस्थापन को लेकर अपनी आपत्तियां, ग्राम की परिस्थितियां तथा वन विभाग द्वारा कथित रूप से बनाए जा रहे दबाव से संबंधित बातें कलेक्टर के समक्ष रखीं। ग्रामीणों की बात को जिलाधीश ने गंभीरता से सुना तथा कहा कि 21 सितंबर को सभी संबंधित लोग उपस्थित हों, सभी पक्षों के साथ मिलकर इस विषय पर चर्चा की जाएगी।
- संजय नेताम ने कहा—विस्थापन नहीं, गांव में विकास चाहिए
जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कहा कि ग्राम देवझरअमली में लगभग 156 परिवार निवासरत हैं, जिनमें 36 परिवारों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे अपने पुरखों की जगह और जल-जंगल-जमीन छोड़कर नहीं जाना चाहते। यह गांव केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि ग्रामीणों की पीढ़ियों पुरानी सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से गांव में सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, संचार और अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग करते रहे हैं। लेकिन जब गांव में विकास की बात आती है तो अनेक प्रकार की विभागीय अड़चनें सामने आती हैं और दूसरी ओर विस्थापन के लिए परिवारों को भूमि एवं आर्थिक पैकेज की बातें बताई जा रही हैं। एक तरफ गांव में विकास के लिए बजट और सुविधाओं की कमी बताई जाती है और दूसरी तरफ विस्थापन के नाम पर करोड़ों रुपये के पैकेज की बातें सामने आती हैं, यह स्थिति ग्रामीणों के लिए गंभीर सवाल खड़ा करती है।
यह क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र है तथा PESA और वन अधिकार अधिनियम (FRA) जैसे कानूनों के तहत ग्राम सभा की महत्वपूर्ण वैधानिक भूमिका है। FRA के तहत ग्राम देवझारामली को लगभग 768.55 हेक्टेयर सामुदायिक वन संसाधन (CFR) अधिकार प्राप्त है। ऐसे में यदि विस्थापन की बात की जा रही है तो प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि मान्य सामुदायिक वन अधिकारों और ग्रामीणों के अन्य वन अधिकारों की सुरक्षा किस प्रकार सुनिश्चित होगी।
संजय नेताम ने कहा कि यदि प्रशासन या वन विभाग विस्थापन को आवश्यक मानता है तो उसका विधिक आधार, संबंधित दस्तावेज, पुनर्वास पैकेज, अधिकारों की स्थिति तथा कानून में निर्धारित प्रक्रिया ग्राम सभा और प्रभावित परिवारों के समक्ष स्पष्ट रूप से रखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण का विरोध ग्रामीण नहीं कर रहे हैं, बल्कि संरक्षण और स्थानीय समुदायों के अधिकारों के बीच कानून सम्मत एवं न्यायपूर्ण व्यवस्था चाहते हैं।
जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम ने आरोप लगाया कि ग्रामीणों के संज्ञान में ऐसी शिकायतें आई हैं कि वन विभाग के अधिकारी/कर्मचारी गांव में जाकर परिवारों से विस्थापन संबंधी चर्चा कर रहे हैं तथा कुछ लोगों के माध्यम से ग्रामीणों को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और किसी भी परिवार की व्यक्तिगत सहमति अथवा बातचीत को ग्राम सभा की सामूहिक राय के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हम अपने पुरखों की धरती छोड़कर नहीं जाना चाहते। हमें विस्थापन नहीं चाहिए, हमें अपने गांव में ही विकास चाहिए। ग्राम सभा और प्रभावित परिवारों की वास्तविक, स्वतंत्र एवं सूचित राय को दरकिनार करके कोई निर्णय नहीं होना चाहिए।”
- अर्जुन नायक बोले—ग्राम सभा को केंद्र में रखकर हो निर्णय
उदंति फेडरेशन के ग्राम सभा अध्यक्ष अर्जुन नायक ने कहा कि देवझारामली के मामले में ग्राम सभा की भूमिका को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। विस्थापन से संबंधित किसी भी निर्णय से पहले ग्रामीणों को पूरी जानकारी दी जाए और सभी पक्षों की बात ग्राम सभा के समक्ष रखी जाए।
- 21 सितंबर की बैठक पर ग्रामीणों की नजर
कलेक्टर द्वारा 21 सितंबर को सभी संबंधित लोगों को बुलाकर संयुक्त रूप से चर्चा करने की बात कहे जाने के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि देवझरअमली के विस्थापन संबंधी मामले में प्रशासन सभी पक्षों की बात सुनकर कानून एवं ग्राम सभा के अधिकारों के अनुरूप आगे की कार्रवाई करेगा।
