गरियाबंद कलेक्टर के निर्देशों का लोक निर्माण सेतु संभाग और ठेकेदार ने पांच दिनों बाद भी नहीं किया पालन
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- कलेक्टर के निरीक्षण के 5 दिनों बाद भी देहारगुड़ा अधुरे पुल पर नहीं लगा सूचना बोर्ड, गार्ड भी तैनात नहीं किए अफसरों की लापरवाही पर उठे सवाल
- कलेक्टर ने अधुरे पुल का निरीक्षण कर जर्जर सीढ़ी को हटाने के साथ पुल निर्माण से संबंधित सूचना बोर्ड लगाने के साथ 6 कर्मचारी तैनात करने का दिया था निर्देश
गरियाबंद । गरियाबंद जिले के तहसील मुख्यालय मैनपुर से 5 किमी दूर ग्राम देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच पुल निर्माण अधुरा होने के कारण बारिश के इन दिनो मे लोहे और सेंट्रिंग प्लेट की सीढ़ियो को छोटे -छोटे बच्चे पारकर जान जोखिम मे डाल स्कूल पढ़ाई करने आने मजबुर हो रहे थे। यहां खबर सामने आने के बाद राष्ट्रीय मानव अधिकारी आयोग एनएचआरसी ने इस मामले को स्वतः संज्ञान मे लिया और आयोग ने छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह मे विस्तृत रिपोर्ट मांगी जिसके बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी इस अधुरे पुल मामले को संज्ञान में लेते हुए गरियाबंद कलेक्टर जिला प्रशासन को बच्चो की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने कहा और मुख्यमंत्री ने पुल निर्माण पूरा होने तक स्कूली बच्चों और क्षेत्रवासियो को किसी भी परिस्थिति में जोखिम उठाकर आवागमन न करना पड़े इसके लिए जिला प्रशासन को तत्काल सुरक्षित और सुगम वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करने कहा था।

इसी बीच गरियाबंद के कलेक्टर रणबीर शर्मा ने 11 सितम्बर दिन शुक्रवार को झमाझम बारिश के बीच इस अधुरे देहारगुड़ा पुल का निरीक्षण करने पहुंचे और कलेक्टर के साथ जिले के अफसर क्षेत्र के विधायक जनक ध्रुव एवं लोक निर्माण सेतु संभाग अफसर ठेकेदार भी पहुंचे थे इस दौरान गरियाबंद कलेक्टर ने विभाग के अफसर एवं ठेकेदार को साफ शब्दो मे फटकार लगाते हुए कहा था कि 24 घंटे के अंदर अधुरे पुल के दोनो तरफ सूचना बोर्ड लगाया जाये और कितने की लागत से पुल का निर्माण किया जा रहा है।
कितना कार्य पूर्ण हुआ है इसका भी बोर्ड लगाया जाये साथ ही 6 सुरक्षा गार्ड अधुरे पुल मे 24 घंटे तैनात करने का निर्देश दिया था और कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए तथा कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि इस मामले मे किसी भी प्रकार की लापरवाही पर एफआईआर तक दर्ज किया जा सकता है। गरियाबंद कलेक्टर रणबीर शर्मा के निरीक्षण करने के आज मंगलवार 5 दिनों बीत जाने के बावजूद कलेक्टर के निर्देशो का न तो ठेकेदार ने पालन किया और न ही संबंधित विभाग ने और तो और कलेक्टर के निरीक्षण के बाद एक दिन भी ठेकेदार या संबंधित विभाग के अफसर निरीक्षण में नही पहुंचे बल्कि दूसरे दिन ही लोहे और सेंट्रिंग प्लेट की सीढ़ियो को हटा दिया गया था। पर अधुरे पुल स्थल पर आज 5 दिन बाद भी सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया और न ही सुरक्षा गार्ड तैनात किया गया। लोहे की सीढ़ी को हटाने के बाद बारिश मे ग्रामीण अब नदी मे बाढ़ को पारकर आना जाना कर रहे है और कल बुधवार से क्षेत्र मे स्कूल भी प्रारंभ हो जायेगी ऐसे मे छोटे बच्चों को नदी पार करने मे भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
जिला कलेक्टर रणबीर शर्मा के सख्त निर्देशों के बावजूद लोक निर्माण विभाग (सेतु संभाग) के अधिकारी और ठेकेदार अपनी अकर्मण्यता से बाज नहीं आ रहे हैं* मैनपुर क्षेत्र के देहारगुड़ा में निर्माणाधीन अधूरे पुल का निरीक्षण करने पहुंचे कलेक्टर ने आमजन की सुरक्षा को देखते हुए 24 घंटे के भीतर चेतावनी व सूचना बोर्ड लगाने का कड़ा निर्देश दिया था लेकिन 05 दिन बीत जाने के बाद भी मौके पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने अधिकारियों और ठेकेदार को स्पष्ट हिदायत दी थी कि निर्माणाधीन स्थल पर हादसों की आशंका को देखते हुए तुरंत सांकेतिक और सूचना बोर्ड स्थापित किए जाएं। इसके बावजूद, अब तक न तो ठेकेदार की नींद खुली है और न ही विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने आदेश का पालन कराने में कोई दिलचस्पी दिखाई है।
- कलेक्टर के आदेशों को ठेंगा दिखाने वाले अफसर ग्रामीणों का क्या खाक सुनेंगे
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रामकृष्ण ध्रुव, महामंत्री गेंदु यादव, देहारगुड़ा के सरपंच महेश दीवान, पवन दीवान, सोहन नागेश स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन के मुखिया के निर्देशों की इस तरह अनदेखी करना विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पुल का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है, जिससे रात के अंधेरे में नदी पार करने दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है। जब जिलाधीश के 24 घंटे वाले अल्टीमेटम का यह हाल है, तो आम जनता की शिकायतों पर यह विभाग कितना संजीदा होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
- हादसे का इंतजार कर रहा विभाग
सूचना बोर्ड न होने से अनजान राहगीर सीधे अधूरे पुल के खतरे की ओर बढ़ जाते हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि कलेक्टर के आदेशों पर पानी फेरने वाले सेतु संभाग के बेपरवाह अधिकारियों और लापरवाह ठेकेदार पर प्रशासन क्या सख्त कार्रवाई करता है, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही विभाग की नींद टूटेगी।
