गरियाबंद जिले के सरकारी स्कूल में महापुरुषों के तस्वीर के नीचे ‘किताबों की जगह शराब की पैग
- ब्लैकबोर्ड की जगह बोतल!’ आखिर बच्चों को क्या संदेश?
- शेख हसन खान, गरियाबंद
गरियाबंद। गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला देवझर (अमली) से सामने आया एक कथित मामला। शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छिड़ गया है। जिस स्थान को समाज “शिक्षा का मंदिर” कहकर सम्मान देता है, वहीं से सामने आए आरोपों ने लोगों को हैरान कर दिया है। स्थानीय मीडिया टीम के अनुसार, स्कूल के औचक निरीक्षण के दौरान कार्यालय कक्ष में दो शिक्षक कथित रूप से शराब का सेवन करते हुए मिले। यदि जांच में यह मामला सही साबित होता है, तो यह केवल दो व्यक्तियों की गलती नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला माना जाएगा।

- कार्यालय में कथित ‘महफिल’, बाहर पढ़ाई का इंतजार करते बच्चे
स्थानीय मीडिया टीम के दावे के अनुसार, निरीक्षण के समय स्कूल में तीन शिक्षक अवकाश पर थे, जबकि मौजूद दो शिक्षक- मनोज कुमार भारद्वाज और कमल सिंह दीवान कथित रूप से कार्यालय कक्ष में शराब और चखने के साथ बैठे मिले। इसी दौरान विद्यालय परिसर में छात्र-छात्राएं मौजूद थे, लेकिन नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की बात भी सामने आई।
शिक्षकों के कथित पहनावे को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि दोनों शिक्षक निर्धारित ड्रेस कोड के बजाय टी-शर्ट और कार्गो जींस में थे। शिक्षा विभाग की आचार संहिता के बीच यह दृश्य स्थानीय लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गया।
- सवाल पूछे तो कथित तौर पर बढ़ा विवाद
मीडिया टीम का आरोप है कि जब इस पूरे मामले पर शिक्षकों से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया और नाराजगी जाहिर की। दावा यह भी किया गया कि पूरी घटना का वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया है, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल संबंधित शिक्षकों या शिक्षा विभाग की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
- मिड-डे मील के बाद मिड-डे पैग ?
समाज में शिक्षक को गुरु का दर्जा दिया जाता है। बच्चों के भविष्य को आकार देने वाले वही शिक्षक यदि किसी विवाद में घिर जाएं, तो सबसे बड़ा नुकसान भरोसे का होता है। तो ऐसा लगता है मानो “ब्लैकबोर्ड पर गणित नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों का हिसाब गड़बड़ा गया।” बच्चे स्कूल इसलिए भेजे जाते हैं कि वे अनुशासन, संस्कार और ज्ञान सीखें। यदि विद्यालयों में ही अनुशासन पर सवाल उठने लगें, तो यह केवल एक स्कूल की नहीं बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की चिंता बन जाती है।
