हजरत इमाम हुसैन की याद में मैनपुर में मनाई गई मोहर्रम
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- रजा मस्ज़िद में सुबह यौमें आशूरा पर विशेष नमाज अदा कर प्रदेश व देश में खुशहाली के लिए मांगी गई दुआ
गरियाबंद । तहसील मुख्यालय नगर में मुस्लिम समाज द्वारा मोहर्रम के अवसर पर 10 दिनों तक रजा मस्जिद में मौलाना सिब्तैन रजा द्वारा हजरत इमाम हुसैन की याद में नुरानी तकरीर पेश किया गया। आज दसवां मोहर्रम शुक्रवार को सुबह 8.30 बजे रजा मस्जिद में यौमें आशूरा के अवसर पर विशेष नमाज अदा कर प्रदेश व देश में अमन चैन खुशहाली की दुआ मांगी गई। मुस्लिम समाज के लोग कब्रिस्तान पहुंचकर अपने मरहूमों के कब्रों में फूल और ईत्र चढ़ाकर फातिहा पढ़ी। वही हजरत इमाम हुसैन की याद में मुस्लिम समाज के लोगो द्वारा अपने अपने घरो में फातिहा खानी कर लंगर और शरबत का वितरण किया गया।
सच्चाई और हक पर चलने का नाम हुसैन है – मौलाना सिब्तैन रजा
मैनपुर रजा मस्जिद में मोहर्रम का माह प्रारंभ होते ही प्रतिदिन रात 09 बजे से तकरीर का प्रोग्राम आयोजित किया गया जो 10 मोहर्रम तक लगातार चला। इस दौरान मौलाना सिब्तैन रजा ने अपने नुरानी तकरीर पेश करते हुए कहा कि सच्चाई और हक पर चलने का नाम हुसैन है, दिन के हिफाजत कर अपने पुरे खानदान की कुर्बानी देकर दुनिया के सामने मिशाल पेश करने वाला का नाम हुसैन है, हम अगर सच्चे हुसैनी है तो मजिस्दों को अपने सजदों से रौनक करे इससे हमारी दुनिया और आखरत दोनों संवर जायेगी।
मौलाना ने आगे कहा इमाम हुसैन की शहादत किसी एक कौम के लिए नही बल्कि पुरी इंसानियत के लिए था उन्होने पूरे दुनिया को सिखाया जब बात सिध्दांतो और हक के लिए हो तो तादात मायने नही रखती बल्कि बुलंद हौसला और खुदा पर अटुट भरोसा मायने रखता है मोहर्रम केवल मातम का महिना नही है बल्कि यह जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने और हक (संच्चाई) पर डटे रहने का पैगाम है।
10वां मोहर्रम को मुस्लिम समाज द्वारा आम लंगर का आयोजन
मैनपुर मुस्लिम समाज द्वारा आज शुक्रवार को आम लंगर का आयोजन किया गया जिसमें पूरे नगर और मुस्लिम समाज के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे।
इस मौके पर प्रमुख रूप से मौलाना सिब्तैन रजा, पेश ईमाम दिलसार आलम, हाजी रफीक मेमन, हाजी गुलाम मेमन, हाजी हुसैन मेमन, हाजी सत्तार मेमन, हाजी शब्बीर मेमन, हाजी गफ्फू मेमन, हाजी इलियास मेमन, हाजी वल्ली मोहम्मद धन्नाड़ी, हाजी सरफराज मेमन, हाजी कादिर मेमन, जाहिद रजा, हैदर मेमन, शेख हुसैन, अनीश सोलंकी, गोलू मेमन, सुल्तान मेमन, नदीम भाई, इकबाल भाई, गुलाम रसूल बेग, अहमद बेग, जुनैद रजा, शेख हसन खान, अहसन मेमन, इम्तियाज मेमन, शेख खलील खान, सिकंदर भाई, असलम भाई, आकिस खान, रब्बू भाई, जावेद मेमन, आसिफ मेमन, जब्बीर खान, नजीब बेग, रिजवान भाई, मकसूद अली एवं बड़ी संख्या मे मुस्लिम समाज के लोग उपस्थित थे।
