इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है रानी दुर्गावती का बलिदान – कुमार ओंकार शाह
- शेख हसन खान, गरियाबंद
- पूर्व विधायक ओंकार शाह ने कहा, अदम्य साहस शौर्य और नारी शक्ति की प्रतिक रानी दुर्गावती का बलिदान राष्ट्र की प्रेरणा का अमर स्रोत
- कलश यात्रा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, रक्तदान लोगों का सम्मान कर मनाया रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस
गरियाबंद । आदिवासी समाज द्वारा छुरा नगर मे विरांगना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर जिला स्तरीय सम्मेलन का आयोजन कर धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व MLA कुमार ओंकार शाह पूर्व विधायक एवं मुख्य वक्ता के रूप में हीरा मीणा राजस्थान राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिवासी समाज पूर्व प्रोफेसर दिल्ली यूनिवर्सिटी, श्रीमती लोकेश्वरी नेताम जिला पंचायत सदस्य यशपेद्र शाह , श्रीमती माहेश्वरी शाह , लेखराज ध्रुव जिला पंचायत कृषि सभापति, पन्नालाल ध्रुव प्रान्तध्यक्ष ध्रुव समाज अध्यक्ष सरपंच संघ प्रमुख सलाहकार आ. वि. परिषद, लोकेन्द्र कोमर्रा महासचिव अखिल भारतीय गोड़वाना गोड़ महासभा, भाठीगढ़ राज आदिवासी नेता खेदु नेगी, टीकम कपिल,गुजरात कपिल एवं वरिष्ठ आदिवासी नेता उपस्थित थे।
आदिवासी समाज द्वारा विशाल शोभायात्रा निकाल कर बस स्टैंड के पास स्थित रानी दुर्गावती चौक पर प्रतिमा की पूजा-अर्चना किया गया। पश्चात उन्मुक्त खेल मैदान मे एक विशाल सभा का आयोजन किया गया। सभा के दौरान समाज के युवक युवतियों ने मनमोहक संस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के बड़े बुजुर्ग महिला पुरुष व युवा वर्ग के लोगों ने बढ़़चढ़ कर हिस्सा लिया। आदिवासी समाज द्वारा इस अवसर को और यादगार बनाने रक्तदान का भी आयोजन रखा गया था। रक्तदान में लोगों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
आयोजित सभा को पूर्व MLA ओंकार शाह ने संबोधित करते हुए कहा कि वीरांगना महारानी दुर्गावती का बलिदान भारतीय इतिहास में अदम्य साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। उन्होंने अपने राज्य, संस्कृति और सम्मान की रक्षा के लिए जिस वीरता के साथ संघर्ष किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
श्री शाह ने आगे कहा कि महारानी दुर्गावती ने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी आत्मसमर्पण नहीं किया और अपने प्राणों का बलिदान देकर स्वतंत्रता एवं स्वाभिमान की रक्षा की। उनका जीवन हमें अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने तथा अपने अधिकारों और अस्मिता की रक्षा के लिए सदैव सजग रहने का संदेश देता है।
कुमार ओंकार शाह ने कहा कि आदिवासी समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है। समाज के महापुरुषों, वीरांगनाओं और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को जन-जन तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, संगठन और सामाजिक एकता को मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि समाज तभी आगे बढ़ेगा जब वह अपने इतिहास, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ा रहेगा।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं राजस्थान के राष्ट्रीय आदिवासी समाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता, पूर्व प्रोफेसर (दिल्ली विश्वविद्यालय) हीरा मीणा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि महारानी दुर्गावती का जीवन साहस, स्वाभिमान, त्याग और मातृभूमि की रक्षा के लिए समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि महारानी दुर्गावती ने अपने सम्मान और राज्य की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष किया तथा वीरता और बलिदान की ऐसी मिसाल कायम की, जो आज भी समाज को प्रेरित करती है। उन्होंने आगे कहा रानी दुर्गावती जैसी वीरांगनाओं के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उनके आदर्श हमें अपने अधिकारों, संस्कृति, परंपराओं और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए जागरूक रहने की प्रेरणा देते हैं।
प्रांताध्यक्ष ध्रुव समाज, सरपंच संघ के अध्यक्ष एवं आदिवासी विकास परिषद के प्रमुख सलाहकार पन्नालाल ध्रुव ने कहा कि वीरांगना महारानी दुर्गावती का जीवन संघर्ष, साहस और स्वाभिमान की अनुपम गाथा है। उन्होंने अपने राज्य, संस्कृति और जनता की रक्षा के लिए जिस अदम्य वीरता का परिचय दिया, वह आज भी समाज को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि महारानी दुर्गावती ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपने सम्मान तथा स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका बलिदान हमें अपने अधिकारों, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए सदैव सजग रहने का संदेश देता है।
जिला पंचायत सदस्य श्रीमती लोकेश्वरी नेताम ने कहा कि समाज की उन्नति शिक्षा, संगठन और एकता से ही संभव है। हमें अपने गौरवशाली इतिहास, महापुरुषों और वीरांगनाओं के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना होगा ताकि युवाओं में समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति गौरव की भावना विकसित हो सके।
उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आपसी भाईचारा, सामाजिक समरसता और सामूहिक विकास के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि रानी दुर्गावती के आदर्श हमें अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने तथा समाज और राष्ट्रहित में समर्पित भाव से कार्य करने की प्रेरणा देते रहेंगे।
इस अवसर पर मानसिंह दिवान, पूरन सिंह ठाकुर, रंजीत सिंह ठाकुर, बलदाऊ राम ठाकुर, चंद्रशेखर रागवंशी, प्रहलाद ध्रुव, दीनदयाल दिवान, हिरऊ राम ध्रुव, शारदा दिवान, उमेश कुमार, भागवती दिवान, दीपक ध्रुव, नोहर सिंह ध्रुव, चमपेश्वर नेताम टेशू नेताम, विष्णुराम नागेश, खेदराम कंवर, सेवक राम कंवर, भुवन सिंह कंवर, अशोक, नीलकंठ ठाकुर, पुनीत ठाकुर, टीकम कपिल, कुमार दिवान, रामरतन नागेश फगवाराम खड़िया, मनहरण सिंह साँवरा, राजकुमार नागवंशी, योगराज बरिहा, टकेश्वर मरकाम, सुवेराम ओटी, बिसेराम जगत, चैतूराम नेताम, दयालु कुंजाम, कल्याण सिंह, तिहार सिंह नेताम, बुधराम मरकाम, श्रवण ठाकुर, मुंगेश्वरी ठाकुर, पार्वती ध्रुव, मिलनतिन कुंजाम, संतोष ध्रुव, रुखमणी ध्रुव, लच्छन नेताम, सहित बड़ी संख्या मे आदिवासी समाज के लोग मौजूद थे।
