साहित्य सृजन संस्थान अपनी सृजन की ओर बढ़ रही गढ़ रही नव इतिहास, मुझे ऐसे न देख , हमसफ़र कभी मैं भी तेरा हबीब था
- द न्यू दुनिया डाटकाम
- मेरे आंसुओं पे न मुस्कुरा कभी मैं ही तेरा नसीब था- उमेश कुमार
- साहित्य सृजन संस्थान की काव्य संध्या में कवियों ने अपनी छाप छोड़ी -ज्ञलक्ष्मी नारायण लहरे
रायपुर । साहित्य सृजन संस्थान की 45 वीं मासिक काव्य संध्या वृंदावन हॉल, सिविल लाइन्स रायपुर में प्रदेश भर से आए कवियों की रचनाओं से पूरा हॉल गूंजता रहा।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ संजय अलंग, पूर्व आईएएस, विशिष्ट अतिथि डॉ.राहुल कपूर, यूरोलॉजिस्ट एवं अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष वीर अजीत शर्मा ने किया। स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ राहुल कपूर, यूरोलॉजिस्ट ने किडनी और मूत्र रोग संबंधी जानकारी दी एवं श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर दिए। अप्रैल माह के कवि यशवंत चतुर्वेदी को श्रेष्ठ काव्य पाठ सम्मान,से सम्मानित किए किया गया।
कवियों का काव्य पाठ हुआ जिसमें कवियों ने मुखरता से अपनी रचनाएं मंच में साझा करते हुए समाज को संदेश दिए । वे कविताएं जो समाज को एक दूसरे से जोड़ती रही मन को बेचैन और हृदय को भेद कर बहुत कुछ कह गई । कवियों ने अपनी अपनी रचना में छाप तो छोड़ी ही साथ ही साथ इस भगमभग जीवन में एक नया संदेश दे गई ।
प्रमुख रूप से कवियों की कविता पाठ जिसमें उमेश कुमार सोनी जी कहते हैं …मुझे ऐसे न देख हमसफ़र कभी मैं भी तेरा हबीब था । मेरे आंसुओं पे न मुस्कुरा कभी मैं ही तेरा नसीब था ।।
उमेश कुमार सोनी ‘नयन’
गाय की पीर, मूक खड़ी गैया की अखियाँ, पूछ रहीं ये बात। बिना किसी गलती के हमपर , क्यों करते हो घात।।
डॉ. सरोज दुबे ‘विधा’
कवि वो नहीं…जो लंबी कविता बोले। या कठिन शब्द सजाए, कवि वो है,जो दिल छू जाए, और हंसते हंसते रुलाए
मंजूषा अग्रवाल..
बस इतना ही चाहा मैंने, समन्दर न सही,नदी की धारा ही बन जाऊं।बस, इस महफिल में एक नाम,अपना भी मशहूर कर जाऊं। समंदर न सही नदी की धारा ही बन जाऊं।
डा सुनीता पवार रायपुर
मां पर क्या लिखूं ? गीत,ग़ज़ल,नज़्म या कुछ नया लिखूं ? मां एक शब्द है सुकून भरा, जैसे कोई पल है जुनून भरा। मां वेदों की चेतना सी, मां कोई निश्चल आत्मा सी।
आयशा अहमद खान
समर्पण भाव है मेरा मुझे पहचान तुम देना। लिखे’ सुषमा’ नये नित छंद मैया ज्ञान तुम देना। करूँ शुचि सर्जना माते सदा कविता सजे निर्मल। मधुर वीणा सुनाकर माँ मुझे वरदान तुम देना।।
सुषमा प्रेम पटेल
भाग्य के लेख को आप भी आजमाना शुरू कीजिए। सामने घर के मन्दिर बड़ा आप जाना शुरू कीजिए। क्या हुआ, कब हुआ, क्यों हुआ फेर में इसके क्यों हो पड़े, गुठलियाँ गिन के क्या फायदा आम खाना शुरू कीजिए।
-रामचन्द्र श्रीवास्तव-
हॅ॑सने दो, मुस्काने दो जी। गीत खुशी के गाने दो जी। बच्चे हैं हम वृद्ध नहीं हैं, लम्बी दौड़ लगाने दो जी।
राजेंद्र रायपुरी
जान उल्फ़त में लुटाएंगे चले जाएंगे, फ़र्ज़ ये अपना निभाएंगे चले जाएंगे
अशोक कुमार दास
सुन लगाकर कान साथी सुन लगाकर कान, जंगल में फिर झींगुर गाए मीठी मधुर तान, सुन लगाकर कान, कुहुक रही मैना कोयल रमली करे शोर , झूम झूम कर नाच रहा है बिन बादल के मोर, करतल ध्वनि कर रहा है सागौन साल का पान , सुन लगाकर कान साथी सुन लगाकर कान।
डॉ.कुसुम जैन, कांकेर
उदित हुए हैं भानु ,घूम -घूम नभ देखो, अपनी तपन लिए, सबको डराए हैं। तप तप जन मन ,जलचर थलचर, तन संग ढोल रहे, बहुत बौराए हैं। वृक्ष तुम मत काटो हरियाल खूब बांटो, विजया लगाए पेड़, तुम्हें भी बताए हैं।
विजया पांण्डेय
कहते हो तुम हमसे से घर बार चलता है। उसके इशारों से संसार चलता है , उस ने जो बनाया उसी से सब बना है।
योगेश शर्मा योगी
हरी भरी फसले लहराती, और नदियों में बहाव है, मृदुभाषी है लोग वहां के, कोमल-सा स्वभाव है, रहती हूं शहर में मैं पर, प्यारा मुझे मेरा गांव है ।
अदिति वर्मा
कार्यक्रम में किशोर लालवानी,वासुदेव कन्नौजे,हबीब खान समर,आर के शिवपुरी,मोहम्मद ए खान, जगदलपुर, एस ए रहीम,सुरेंद्र रावल,डॉ.सुरेंद्र अहलूवालिया,विवेक भट्ट,अनिल राय भारत,आरव शुक्ला,डॉ.उर्मिला शुक्ल,कल्याणी तिवारी, प्रमदा ठाकुर,अजय सोनी,राम मूरत शुक्ला,सरोज सप्रे ,डॉ महेंद्र सिंह ठाकुर,अजंता चौधरी,शशि शर्मा अनामिका,वीरेंद्र कुमार साहू,राजकुमार पाण्डेय, के के पाठक,डॉ ओ पी सोनी,सूरज प्रकाश सोनी, एस एम जोशी,शीलकांत पाठक,डॉ.अर्चना पाठक,संजय देवांगन,राजेंद्र ओझा,लक्ष्मण सिंह राजपूत भाटापारा ने अपनी उपस्थिति दर्ज की। कवियों के कविता पाठ से वृंदावन हॉल गूंजता रहा ।कवियों की हुई सराहना ।
