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April 16, 2026

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17 अप्रैल को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय गरियाबंद जिले के 18.08 किमी लंबी 7 सड़कों का करेंगे वर्चुअल भूमिपूजन

  • शेख हसन खान, गरियाबंद 
  • मैनपुर, देवभोग, गरियाबंद क्षेत्र के वर्षो पुरानी सड़क निर्माण की मांग पर नई सड़कों की सौगात

गरियाबंद। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत गरियाबंद जिले में स्वीकृत 07 सड़कों की कुल लंबाई 18.08 किमी है। जिसकी कुल लागत 14 करोड़ 23 लाख 65 हजार रुपये हैं। निर्माण कार्य का भूमिपूजन 17 अप्रैल को सुबह 11 बजे कलेक्टर सभा कक्ष में वर्चुअल माध्यम से आयोजित होगा। इस वर्चुअल कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तथा अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों को बारहमासी सड़क संपर्क प्रदान करने वाले इन कार्यों का शुभारंभ किया जाएगा। जिसमें सांसद, विधायक, मीडिया प्रतिनिधि एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे।

इससे दूरस्थ क्षेत्र को पक्की सड़क से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगा। छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के कार्यपालन अभियंता ने बताया कि इसके अंतर्गत विकासखण्ड देवभोग के सुपेबेड़ा से परेवापाली तक सड़क की लंबाई 1.56 किलोमीटर बनेगी जिसकी लागत 125.26 लाख रुपये है इसी प्रकार विकासखण्ड गरियाबंद के मरदाकला से कारीडोंगरी तक की लंबाई 3.30 किलोमीटर है जिसकी लागत 272.44 लाख रुपये, रावनडिग्गी से सेम्हरा तक की लंबाई 2.71 किलोमीटर जिसकी लागत 185.11 लाख रुपये है आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर के मुड़गेलमाल से स्याहीडोंगरी तक की लंबाई 3.34 किलोमीटर है जिसकी लागत 300.66 लाख रुपये, भाठीगढ़ से भटगांव तक की लंबाई 0.86 किलोमीटर 64.73 लाख रुपये, कोदोभांठ से साल्हेभांठ 2.49 किलोमीटर एवं 205.72 लाख रुपये तथा अड़गडी (जरहीडीह) से कोसमबुडा 3.82 किमी एवं 269.63 लाख रुपये निर्धारित है।

  • मैनपुर क्षेत्र के वर्षो पुरानी सड़क निर्माण की मांग पूरी, ग्रामीणों में उत्साह

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा आज जो सड़क का जो भूमिपूजन किया जायेगा उसमे आदिवासी विकासखंड मैनपुर क्षेत्र के वर्षो पुरानी मांग अड़गड़ी जरहीडीह से कोसमबुड़ा सड़क निर्माण कार्य भी शामिल है जिससे इस क्षेत्र के लोगो मे भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। बीहड़ जंगल के अंदर बसे इस गांव मे पहुंचने के लिए आज तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं किया गया है और तो और यहां के ग्रामीणों को राशन के लिए पंचायत तक पैदल आना पड़ता है। स्कूली बच्चे जान जोखिम मे डालकर जंगल रास्ता तय कर स्कूल पहुंचते हैं, वहीं भाठीगढ़ भठगांव मार्ग की भी मांग लंबे समय से किया जा रहा था।