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July 15, 2026

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आजादी के बाद पहली बार दुर्गम पहाड़ी के ऊपर बसे गांवों में पहुंचने वाले जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर को अपनी समस्याएं बताकर भावुक हो उठे ग्रामीण 

  • शेख हसन खान, गरियाबंद 
  • ताराझर, कुरवापानी पहाड़ी इलाके कभी नक्सलियों का गढ़ रहा, आज पहुंचे जिला पंचायत सीईओ
  • ओड़िशा रास्ते से नदी नालों पथरीली पहाड़ी पगडंडी दुर्गम रास्तों को पैदल तय कर ग्रामीणों की समस्या जानने पहुंचे अफसर

गरियाबंद- गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखण्ड अंतर्गत अति पिछड़ी कमार जनजाति बाहुल्य ग्राम पंचायत कुल्हाड़ीघाट के पहाड़ी क्षेत्र में एक वर्ष पहले नक्सली कमांडर जयराम चलपति सहित कई दर्जनों हार्डकोर नक्सली नेताओं को पुलिस ने मार गिराया था। घुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहे यह इलाका लंबे समय से नक्सलियों के गढ़ के रूप में जाना जाता था। 31 मार्च को छत्तीसगढ़ राज्य सहित इस क्षेत्र को नक्सल मुक्त घोषित किया गया है जिसके बाद से अब विकास की उम्मीद ग्रामीणो मे जगी है। मैनपुर से 18 किमी दूर जंगल के अंदर बसे ग्राम पंचायत कुल्हाड़ीघाट है और इस कुल्हाड़ीघाट से लगभग 35-36 किमी दूर दुर्गम पहाड़ी के उपर ग्राम ताराझर, कुरवापानी बसा हुआ है। ग्राम ताराझर, कुरवापानी इन ग्रामो मे आज तक पहुंचने के लिए जहां एक ओर सड़क का निर्माण नहीं किया गया है।

वही पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा बुनियादी सुविधाओं के लिए यहां के ग्रामीण आजादी के बाद से लेकर अब तक तरस रहे हैं। इन ग्रामो मे आज तक ब्लॉक स्तर के अधिकारी भी नहीं पहुंचे थे लेकिन आज बुधवार को गरियाबंद जिला पंचायत के युवा मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर चंद्राकर स्थानीय प्रशासन के अमले को लेकर ओड़िशा के रास्ते लगभग 60-65 किमी दूरी तय कर और 2 से 3 किमी पैदल पगडंडी मार्ग को पार कर ग्राम ताराझर, कुरवापानी पहुंचे। पहली बार जिले के अफसर को अपने गांव मे पाकर आदिवासी ग्रामीण खुशी से गदगद हो गये। आत्मीयता से उनका स्वागत किया साथ ही अफसर को अपनी समस्याओं को बताते ग्रामीण भावुक हो उठे। पहाड़ी ग्राम कुरवापानी, ताराझर मे जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने प्रधानमंत्री आवास निर्माण, आंगनबाड़ी भवन निर्माण, स्कूल भवन निर्माण का निरीक्षण किया और स्वयं कमार जनजाति के ग्रामीणो के घरो तक पहुंचकर उन्हे शासन से मिलने वाली योजनाओ की जमीनी हकीकत को जाना और परखा ,इस दौरान ग्रामीणो ने यहां सबसे ज्यादा परेशानी पेयजल की है गांव से कुछ दूर सुख चुके नदी में झरिया खोदकर पानी लाकर प्यास बुझाते हैं , जहां अकेले जाना किसी एक ग्रामीण के बस की बात नहीं है क्योंकि हमेशा हिंसक वन्यप्राणियो का डर बना रहता है। जिला पंचायत सीईओ ने ग्रामीणों के साथ जाकर झरिया को देखा और गांव मे तत्काल चार सरकारी कुंआ खोदने के लिए मंजूरी दी एवं गांव मे चौपाल लगाकर ग्रामीणो की समस्याओ को सुना इस दौरान स्कूली बच्चो को पुस्तक कापी पेन गणवेश कपड़ा जूता बेग जरूरत की सामाग्री वितरण किया साथ ही बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई लिखाई करने को कहा।

  • सरपंच व ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग की

ग्राम पंचायत कुल्हाड़ीघाट के सरपंच बनसिंग सोरी एवं ग्रामीणो ने कहा आज तक कोई भी अधिकारी इस गांव में नहीं पहुंचे थे। आप जिले के पहले अफसर हो जो हमारी समस्याओं के समाधान के लिए उबड़ खाबड़ रास्तों को पारकर पहुंचे तो सरपंच व ग्रामीणों ने मांग किया कि इस गांव तक पहुंचने के लिए बोतलधारा मार्ग से पत्थरों को काटकर जी राम जी योजना के तहत सड़क का निर्माण किया। जाये क्योंकि यहां गंभीर बीमारी व गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाने से मौत हो जाती है। साथ ही गांव मे रोजगार के साधन उपलब्ध कराया जाये स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की भी मांग ग्रामीणों ने किया है। ग्रामीणों ने बताया कि राशन लेने के लिए उन्हे 35-40 किमी कुल्हाड़ीघाट या ओड़िशा जाना पड़ता है जिसके लिए ग्रामीण घोड़ा पाले हुए हैं। घोड़ा में लादकर चांवल दाल राशन को गांव तक लाते हैं।

सौर ऊर्जा पूरी तरह बंद – ग्रामीणों ने जिले के अधिकारी को बताया कि सौर ऊर्जा के तहत लगाये गये प्लेट पूरी तरह से खराब हो गया है। 5-6 साल से लगातार मरम्मत की मांग कर रहे हैं लेकिन अब तक मरम्मत नही किया गया।जिला पंचायत सीईओ को ग्रामीणों ने पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली सभी मूलभूत समस्याओ से अवगत कराते हुए सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग किया है। जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने कहा शासन प्रशासन लगातार दुरस्थ वनांचल के ग्रामो मे सुविधा पहुंचाने प्रयासरत है।

  • सरपंच और सचिव के प्रयास से स्कूल भवन का निर्माण जारी

ताराझर पहाड़ी के उपर रेत नहीं होने के कारण निर्माण कार्य कराने मे भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि ओड़िशा रास्ते से निर्माण कार्यो के लिए रेत को पहाड़ी के उपर ताराझर तक पहुंचाया जाता है जिसके कारण भवन निर्माण में लागत दुगुनी हो जाती है। पहाड़ी गांव में सामाग्री पहुंचाने के जो कच्ची सड़क का निर्माण ओडिशा के रास्ते किया गया था। वह पहली बारिश के साथ जगह जगह से बह गया है। इस दौरान प्रमुख रूप से जनपद पंचायत मैनपुर के सीईओ श्री जे के गजभिये, मनरेंगा परियोजना अधिकारी कपिल नायक, सरपंच बनसिंग सोरी, सचिव प्रेम ध्रुव, विकासखण्ड चिकित्सा अधिकारी डॉ गजेन्द्र ध्रुव, इशुलाल पटेल, हिना नेताम, ओमप्रभा वट्टी, हिरौंदी ठाकुर, रामेश्वर नेताम, जयराम, मंगलीबाई सहित स्थानीय अधिकारी कर्मचारी एवं ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।