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July 8, 2026

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बदहाल सिस्टम -मीडिल स्कूल भवन के लिए 2 बार लाखों रुपए आहरण का पैसा हजम, अधूरा निर्माण कार्य छोड़ ठेकेदार चलते बने

  • शेख हसन खान, गरियाबंद 
  • जर्जर बदहाल हो चुके प्राथमिक शाला पयलीखण्ड के एक कमरे में पांच कक्षा और दूसरे कमरे में मीडिल स्कूल के तीन कक्षाएं संचालित हो रही
  • 21 साल से एक स्कूल भवन अधूरा, दुसरा स्कूल भवन दो साल से अधूरा, शिकायत के बाद जांच करने तक नहीं पहुंचे अफसर

गरियाबंद। गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पयलीखण्ड मे 21 वर्ष पहले शासकीय मिडिल स्कूल भवन निर्माण के लिए 5 लाख 64 हजार रूपये सर्व शिक्षा अभियान राजीव गांधी शिक्षा मिशन द्वारा स्वीकृत किया गया। और बकायदा निर्माण कार्य भी प्रारंभ किया गया लेकिन 21 साल बाद भी यह स्कूल भवन अधूरा पड़ा हुआ है। कई बार अधूरे स्कूल भवन को पूर्ण कराने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने जनपद स्तर के अधिकारियों के अलावा जिला स्तर के अधिकारियों तक को आवेदन देकर थक चुके लेकिन अब तक अधूरा स्कूल भवन पूरा नहीं हुआ। और इस स्कूल भवन की सरकारी राशि हजम हो चुकी है और तो और इसके फाइल भी संबंधित विभाग के कार्यालय से गायब होने की जानकारी मिली है।

ग्रामीणों द्वारा बार -बार मिडिल स्कूल भवन नहीं होने की शिकायत करने पर मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत दो वर्ष पहले फिर लगभग 8 लाख रूपये की लागत से नया स्कूल भवन निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया। संबंधित निर्माण एजेंसी द्वारा नींव खुदाई के बाद डीपीसी भी किया गया लेकिन उसके बाद यह स्कूल भवन निर्माण कार्य भी अधूरा छोड़ दिया गया। ग्रामीणों ने कई बार जनपद पंचायत कार्यालय और शिक्षा कार्यालय का चक्कर लगा चुके है लेकिन दोनों अधुरे स्कूल भवन अब तक पूर्ण नहीं हुआ।

शासन प्रशासन ने इस गांव में मिडिल स्कूल भवन निर्माण के लिए दो बार लाखों रूपये की राशि जारी किया लेकिन संबंधित निर्माण एजेंसी और स्थानीय जिम्मेदार अफसरों के उदासीन रवैये के चलते इस आदिवासी गांव के बच्चों को स्कूल भवन का लाभ नहीं मिल पाया। इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्यवाही किया जा चाहिए।

  • जर्जर हो चुके प्राथमिक शाला में मिडिल स्कूल का भी हो रहा संचालन

ग्राम पंचायत जांगड़ा के आश्रित ग्राम पयलीखण्ड में अब तक मिडिल स्कूल भवन का निर्माण नहीं किया गया। यहां जो प्राथमिक शाला है वहां एक कमरे मे पहली से पांचवीं तक और दूसरे कमरे तथा बरामदा में मिडिल स्कूल की तीन कक्षाएं संचालित किया जा रहा है। यह प्राथमिक शाला भवन भी बेहद जर्जर हो गया है और उपर छत की हालत बहुत ज्यादा खराब हो गई है। टूट -टूटकर गिर रहा है कभी भी गंभीर दुर्घटना का डर बना हुआ है। स्कूल परिसर में शौचालय निर्माण कार्य वर्षो से अधुरा है। आपको जानकार बड़ा आश्चर्य होगा कि दो शौचालय का निर्माण अधुरा छोड़ दिया गया है और दोनों के टंकी भी नहीं बनाया गया है। पूरी राशि आहरण कर लिया गया है। दूरस्थ वनांचल क्षेत्रो मे निर्माण कार्यो को देखने वाला कोई नहीं है जिसका जीता जागता उदाहरण यहां के शौचालय को देखने पर मिलता है।

  • बारिश के चार माह जान जोखिम में डालकर ग्रामीण और शिक्षक नदी पार करने मजबूर होते हैं 

पयलीखण्ड के बहुमुल्य हीरे की चमक भले ही देश विदेशो तक पहुंच चुकी है और इस ग्राम मे सभी राजनीतिक दलो के बड़े -बडे़ जनप्रतिनिधि व आला अफसरों ने हीरा खदान के नाम से समय -समय पर दौरा भी किया है लेकिन आज छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के ढाई दशक बाद भी ग्राम पयलीखण्ड मुलभुत बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। इस गांव की धरती के नीचे अमूल्य हीरा अलेक्जेंडर कीमती रत्न भरे पड़े हैं लेकिन आज भी इस धरती के ऊपर निवास करने वाले विशेष पिछड़ी जन जाति भुंजिया आदिवासी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। तहसील मुख्यालय मैनपुर से लगभग 38 किमी दुर ग्राम पंचायत जांगड़ा के आश्रित ग्राम पयलीखण्ड की जनसंख्या लगभग 380 के आसपास है। इस गांव के धरती के नीचे अपार हीरा खनिज सम्पदा भरा पडा हुआ है और इसके उपर निवास करने वाले विशेष पिछडी जनजाति भुंजिया, आदिवासियों की जिदंगी अंधेरे में गुजर रही है और तो और इंद्रावन उदंती की बड़ी नदी में बारिश के पूरे चार माह पानी चलते रहने से यहां के निवासियों को जान जोखिम मे डालकर आना जाना पड़ रहा है।

राशन चांवल दाल, मिट्टी तेल, नमक खरीदने के लिए इस नदी को पार कर जांगड़ा ग्राम आना पड़ता है। बिजली अब तक इस गांव मे नहीं पहुंची है, रात के अंधेरे मे लालटेन जलाना पड़ता है। बुधराम नागेश, जादुराम नेताम, श्रीराम नागेश, खीरधर नेताम, जागेश्वर नागेश, भागीरथी नागेश, मोहन नेताम, देवसिंह नेताम, गोपाल नेताम, हीरालाल नागेश, कांशीराम नागेश, नयन नेताम, बिहारी सोरी, रूखमणी नागेश ग्रामीणो ने बताया कई बार मूलभूत सुविधाओ की मांग कर चुके है लेकिन अब तक समस्याओ का समाधान नहीं हुआ है।

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