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June 15, 2026

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मुख्यमंत्री विष्णु के सुशासन में दुरस्त पहाड़ी गांव में लिखी जा रही विकास की इबारत

  • शेख हसन खान, गरियाबंद 
  • पहाड़ी पर बसे गांव के बच्चों को अब होगा स्कूल एवं आंगनवाड़ी भवन नसीब
  • संसाधन के अभाव में पहाड़ी के गांव में उड़ीसा के रास्ते पहुंचाई जा रही रेत और निर्माण सामग्री
  • गरियाबंद कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ के निर्देश पर आवास और निर्माण कार्य युद्ध गति से जारी
  • विशेष पिछड़ी कमार जनजाति परिवारों के लिए 353 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत, 200 से अधिक बनाकर पूर्ण

गरियाबंद । गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखंड मैनपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत कुल्हाड़ीघाट के आश्रित ग्राम जो बिहड़ पहाड़ी के ऊपर बसा हुआ है। इन ग्रामों में आजादी के 79 वर्षों बाद भी ग्रामीण मूलभूत बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं । तहसील मुख्यालय मैनपुर से 18 किलोमीटर दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत कुल्हाड़ीघाट जो विशेष पिछड़ी जनजाति कमार आदिवासी ग्राम के नाम से पूरे प्रदेश में जाना जाता है और यहां पंचायत क्षेत्र घुर नक्सल प्रभावित माना जाता था। यहां के पहाड़ी में हॉडकोर नक्सली नेता जयराम चलपती के साथ दर्जनों नक्सलियों को पुलिस ने मुठभेड़ मार गिराया। मार्च 2026 में अब छत्तीसगढ़ के साथ गरियाबंद जिला नक्सली मुक्त घोषित होने के बाद अब नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहे ग्रामीण इलाकों में विकास कार्य प्रारंभ हो गए हैं और तो और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों सहित लगातार अफसर भी पहुंचने लगे हैं। कुल्हाड़ीघाट ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम जो दुर्गम पहाड़ी के ऊपर बसा हुआ है जिसमें ग्राम कुरवापानी, ताराझर, मटाल, भालूडिग्गी यहां के ग्रामीणों को छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 26 वर्षों बाद भी पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध नहीं हो पा रही है, क्योंकि पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण और लंबे समय से नक्सल प्रभावित इलाका होने के कारण यह क्षेत्र विकास के कम से बेहद पिछड़ा गया है।

  • ताराझर के बच्चों को जल्द नसीब होगा स्कूल और आंगनबाड़ी भवन

पहाड़ी के ऊपर बसे ताराझर ग्राम में 25 वर्षों से शासकीय प्राथमिक शाला का संचालन किया जा रहा है और यहां स्कूल भवन निर्माण के लिए चार बार पूर्व में राशि स्वीकृत हो चुकी है लेकिन अब तक स्कूल भवन निर्माण नहीं होने के कारण इस विद्यालय के लगभग 25 से 30 बच्चे पेड़ के नीचे या किसी के झोपड़ी में पढ़ाई करने विवश होते हैं। आज तक यहां की स्कूल भवन का निरीक्षण करने जिला के अफसर तो बहुत दूर ब्लॉक के बीईओ तक नहीं पहुंच पाए हैं , अब ताराझर में नया स्कूल भवन और आंगनबाड़ी भवन का निर्माण किया जा रहा है जिसकी लागत लगभग 11 – 11 लाख रुपया बताई जा रही है। पहाड़ी के ऊपर होने के कारण ताराझर में स्कूल भवन का निर्माण करना किसी चुनौती से काम नहीं है। पहाड़ी के ऊपर बसे होने के कारण यहां सबसे पहले निर्माण सामग्री पहुंचाना बहुत मुश्किल का काम है। ऊपर से यहां निमार्ण कार्य के लिए रेत नहीं मिलता, ऐसे में ओड़ीसा के रास्ते ताराझर तक पहुंचने के लिए जैसे तैसे बड़े-बड़े पत्थरों को काटकर अस्थाई सड़क का निर्माण किया गया है और ओड़ीसा होते हुए निर्माण कार्य के लिए रेत और गिट्टी तथा निर्माण सामग्री मुश्किल से यहां पहुंचाई जा रही है। ओड़ीसा रास्ते में लगभग 27 किलोमीटर पहाड़ी पत्थरों को पार कर और चार किलोमीटर खड़ी पहाड़ी चढ़ना से ट्रैक्टर के सहारे निर्माण सामग्री पहुंचाना किसी चुनौती से काम नहीं है बावजूद इसके स्कूल भवन और आंगनबाड़ी भवन लेटर लेवल तक कार्य पूरा हो चुका है और यहां के ग्रामीणों में अब उम्मीद जगी है कि जल्द ही स्कूल और आंगनबाड़ी भवन का निर्माण कार्य पूर्ण हो जाएगा और यहां के बच्चों को पहली बार स्कूल भवन में पढ़ाई करने का मौका मिलेगा। गरियाबंद जिले के कलेक्टर भगवान सिंह उईके और जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर के निर्देश पर यहां बच्चों के समस्याओं को देखते हुए स्कूल और आंगनबाड़ी भवन का निर्माण कार्य बाद तेजी से किया जा रहा है, यहां स्कूल भवन और आंगनबाड़ी भवन निर्माण में यदि सफलता मिलती है तो निश्चित रूप से अन्य विकास कार्य भी यहां तेजी से होने लगेंगे जिसके लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।

  • आदिवासी कमार जनजाति परिवारों के 200 से ज्यादा प्रधानमंत्री आवास बनाकर तैयार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं छत्तीसगढ़ के विष्णु देव सरकार द्वारा जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी कमार जनजाति परिवारों के लिए ग्राम पंचायत कुल्हाड़ीघाट में 353 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं और 200 से ज्यादा प्रधानमंत्री आवास निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। इस क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री आवास किसी वरदान से काम नहीं है। यह क्षेत्र शुरू से वन्य प्राणियों के साथ जंगली हाथियों का रहनवास क्षेत्र के रूप में जाना जाता है और कच्चे मकान होने के कारण हाथियों के द्वारा हर वर्ष गांव में घुसकर अब तक सैकड़ो मकानों को जहां तोड़फोड़ कर ग्रामीणों के सामग्री को नष्ट किया गया है। वहीं कई ग्रामीण पूर्व वर्षों में हाथियों के शिकार भी हुए हैं। हाथियों के दल गांव के नजदीक विचरण करने पर यहां के ग्रामीणों को रात रात भर जाकर गांव और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए रातजग करना पड़ रहा है लेकिन अब प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध होने से काफी हद तक ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान होते दिखाई दे रहा है।

  • प्रधानमंत्री आवास निर्माण के लिए ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

कुल्हाड़ीघाट पंचायत सहित क्षेत्र के अनेक विशेष पिछड़ी कमार जनजाति ग्रामो के ग्रामीण दयाराम कमार , लखन कमार,जुगनी कमार,बसंत कमार,धनकुंवर कमार, विशाल कमार, मंगल सिंह सोरी, भंवर सिंह सोरी, राधेलाल नेताम एवं ग्रामीणों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास निर्माण से उनके जिंदगी में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले बास घास फूस की झोपड़ी में रहने मजबूर हो रहे थे जहां कभी भी हाथियों के द्वारा हमारे झोपड़ियां को तोड़ दिया जाता था और तो और हमेशा जीव जंतु का डर बना रहता था। बारिश के दिनों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। ग्रामीणों ने बताया प्रधानमंत्री आवास निर्माण के लिए शान द्वारा उन्हें पैसा मिला है। बहुत लोगों का आवास निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है और कई लोगों का निर्माण कार्य अधूरा है। ग्रामीणों ने बताया जंगली पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां रेत और निर्माण सामग्री लाने में भारी परेशानी हो रही है साथ इससे लागत भी बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री आवास के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।

  • ग्राम पंचायत के सचिव ने बताया

ग्राम पंचायत कुल्हीघाट के सचिव प्रेम ध्रुव ने बताया कि कुल्हाड़ीघाट ग्राम पंचायत क्षेत्र में आवास निर्माण कार्य युद्ध गति से किया जा रहा है। पहाड़ी के ऊपर बसे होने के कारण ताराझर में आंगनबाड़ी और स्कूल भवन निर्माण के लिए रेत और निर्माण सामग्री पहुंचाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ओड़ीसा रास्ता से सामग्रियों को पहुंचाया जा रहा है। जल्द भवन निर्माण कार्य पूर्ण हो जाएगा और इसका लाभ यहां के बच्चों को मिलेगा। सचिव प्रेम ध्रुव ने बताया कि पहाड़ी के ऊपर पहली बार स्कूल और आंगनबाड़ी भवन का निर्माण किया जा रहा है जिससे ग्रामीणों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।