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June 18, 2026

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गरियाबंद में महिलाएं लाख की खेती से हो रही आत्मनिर्भर, लाखों की आमदनी से जिंदगी में बिखरी खुशियां

  • शेख हसन खान, गरियाबंद 
  • मैनपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत डुमाघाट में महिलाएं लाख की खेती कर लाखों रूपये कमा रही
  • बिहान की दीदियों ने लाख उत्पादन से लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

गरियाबंद । गरियाबंद जिले की महिलाएं अब लाख की खेती कर लाखों रूपये आमदनी हासिल कर रही है जिससे उनकी जिंदगी में खुशिया देखने को मिल रही है। मैनपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत डुमाघाट में महिलाओं के द्वारा अपने गांव के कोसुम के वृक्ष में लाख की खेती कर लाखों रूपये आय अर्जित कर एक मिशाल कायम किया है। यह महिलाएं अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा दे रही है। गरियाबंद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर चंद्राकर के मार्गदर्शन एवं एफपीओ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी युवराज नागेश के नेतृत्व में सुरभि महिला संकुल संगठन अमलीपदर अंतर्गत गठित उन्नति महिला उत्पादक समूह, कांडसर (ग्राम पंचायत डुमाघाट) की बिहान की दीदियां बड़े पैमाने पर लाख की खेती कर रही हैं। इस गतिविधि से लगभग 50 महिला किसान जुड़ी हुई हैं।

वर्तमान में 50 से 60 क्विंटल लाख उत्पादन का अनुमान है, जिसका उत्पादन चक्र लगभग 6 माह का होता है। लाख वन आधारित आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन है, जिससे महिलाओं को प्रतिवर्ष लाखों रुपये की आय प्राप्त हो रही है। वर्तमान बाजार में लाख का मूल्य प्रतिकिलो 700 से 800 रुपये प्रति किलोग्राम है। समूह की महिलाएं लाख बीज, दाना एवं अन्य उत्पादों का विक्रय कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। धान की खेती के अतिरिक्त लाख उत्पादन अब क्षेत्र की महिलाओं के लिए आय का प्रमुख स्रोत बन गया है।

पूर्व में कांडसर क्षेत्र की महिलाएं लाख उत्पादों को बिचौलियों के माध्यम से कम कीमत पर बेचने को विवश थीं, जिससे उन्हें उचित लाभ नहीं मिल पाता था। इस समस्या को देखते हुए जिला पंचायत के सीईओ प्रखर चंद्राकर द्वारा मैनपुर ब्लॉक के एफपीओ को निर्देशित किया गया कि महिलाओं के लिए सीधे बाजार एवं फैक्ट्री स्तर पर मार्केट लिंकेज स्थापित किया जाए। इसी पहल के परिणामस्वरूप बिहान अंतर्गत गठित एफपीओ द्वारा अब लाख उत्पादों का गांव स्तर से सीधे फैक्ट्री तक विपणन किया जा रहा है। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है तथा महिलाओं को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है, जिससे उनकी आय एवं आर्थिक सशक्तिकरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

लाख की खेती करने से पहले महिलाओ को बकायदा प्रशिक्षण दिया गया है ज्ञात हो कि लाख काफी बहुमूल्य वस्तु है इससे चुड़ी आभूषण के साथ अनेक तरह से इसका उपयोग किया जाता है और लाख की खेती का समय समय पर जिला पंचायत सीईओ के द्वारा स्वयं इसकी मॉनिटरिंग की जा रही है। इस सफल पहल में जिला पंचायत गरियाबंद प्रखर चंद्राकर, पतंजलि मिश्रा, रमेश वर्मा, श्रीमती संगीता ध्रुव, युवराज नागेश तथा श्रीमती निधि साहू की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यह पहल ग्रामीण महिलाओं की आय वृद्धि, आत्मनिर्भरता एवं वन आधारित आजीविका संवर्धन का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है।

ग्राम पंचायत डुमाघाट के सरपंच यशवंत मरकाम* ने बताया महिला समूह द्वारा लाख उत्पादन किया जा रह है जिससे उन्हे बेहतर लाभ मिल रहा है पूरे जिले मे अब हमारे पंचायत को लाख उत्पादन क्षेत्र के रूप मे पहचान मिल गई है।