Recent Posts

May 21, 2026

समाचार पत्र और मीडिया है लोकतंत्र के प्राण, इसके बिन हो जाता है देश निष्प्राण।

महिला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हेमलता सिन्हा ने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा

  • शेख हसन खान, गरियाबंद 
  • श्रीमती सिन्हा ने कहा कि भाजपा राज में आम जनता आर्थिक संकट से जूझ रही है

गरियाबंद। कांग्रेस नेत्री हेमलता सिन्हा ने देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज देश की आम जनता सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, खाद्य तेल और रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिससे गरीब, मजदूर, किसान, मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों का जीवन प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता को राहत देने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।

उन्होंने आगे कहा कि किसानों को समय पर खाद और उर्वरक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसानों की आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। खाद की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है और इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसान महंगी खेती और फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने की दोहरी मार झेल रहे हैं। देश के युवाओं के सामने बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं और लाखों पढ़े-लिखे युवा नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के पास युवाओं के भविष्य को लेकर कोई ठोस योजना नहीं है।

  • जनता को राहत देने के बजाय सलाह देना अनुचित

उन्होंने कहा कि सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय लोगों को कम खर्च करने, कम यात्रा करने और कम उपभोग करने की सलाह दे रही है। उनके अनुसार सरकार का दायित्व नागरिकों को राहत देना है, न कि उन्हें अपनी बुनियादी जरूरतों में कटौती के लिए मजबूर करना।

  • पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों से बिगड़ा घरेलू बजट

श्रीमति सिन्हा ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि ने हर वर्ग की कमर तोड़ दी है। परिवहन महंगा होने से खाद्य सामग्री से लेकर निर्माण सामग्री तक लगभग सभी वस्तुओं के दाम बढ़ गए हैं। रसोई गैस की बढ़ती कीमतों से महिलाओं और गृहिणियों का घरेलू बजट प्रभावित हुआ है और कई परिवार आवश्यक जरूरतों में कटौती करने को मजबूर हैं।